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पंजाब : फसल के सीधे भुगतान से परेशान किसान, बोले- खातों में रुपये भेजना बनेगा कलह की वजह

Tue, 13 Apr 2021 04:18 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर/मुक्तसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर/मुक्तसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 13 Apr 2021 04:18 PM IST
सार

फिरोजपुर की दाना मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे किसान दर्शन सिंह व सुरजीत का कहना है कि किसान और आढ़ती का रिश्ता बहुत गहरा है। रात या दिन जब भी किसानों को पैसों की जरूरत पड़ती है तो आढ़तियों से ले लेते हैं। ज्यादातर किसानों का लेनदेन कई सालों से आढ़तियों के साथ चल रहा है। सरकार किसानों के सीधे खाते में भुगतान करने की बजाय आढ़तियों के खाते में करें। 

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Punjab Farmers Worried by direct payment system of crop
फिरोजपुर मंडी में पड़ा गेहूं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सीधा भुगतान कई किसानों के घर का माहौल खराब कर सकता है क्योंकि जमीन पिता के नाम होती है। बेटे पिता से अलग रहते हैं तो ऐसे में बेटों की फसल का भुगतान भी पिता के खाते में जाएगा। इससे बचने के लिए सरकार किसानों के खाते में सीधे भुगतान के बजाय आढ़तियों को फसल का भुगतान करे। ये कहना है मंडी में आए किसानों का। वहीं आढ़तियों का कहना है कि किसानों को जब भी जरूरत होती है आढ़ती उन्हें पैसा मुहैया करवा देते हैं।

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शहर की दाना मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे किसान दर्शन सिंह व सुरजीत का कहना है कि किसान और आढ़ती का रिश्ता बहुत गहरा है। रात या दिन जब भी किसानों को पैसों की जरूरत पड़ती है तो आढ़तियों से ले लेते हैं। ज्यादातर किसानों का लेनदेन कई सालों से आढ़तियों के साथ चल रहा है। सरकार किसानों के सीधे खाते में भुगतान करने की बजाय आढ़तियों के खाते में करें। 
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किसान नेता सतनाम सिंह का कहना है कि खाते में सीधी पेमेंट किसानों के घरों में लड़ाई का माहौल पैदा करेगी। बहुत से ऐसे मामले हैं, जमीन पिता के नाम पर है और घरेलू कलह के चलते बेटे अलग हैं। उन्हें जमीन दी हुई है और खेती कर घर का गुजारा कर रहे हैं। फसल का भुगतान उसी किसान के खाते में आएगी जिसके नाम पर जमीन है ऐसे में घरेलू झगड़े बढ़ेंगे। 

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आढ़ती मनोज कुमार मोंगा का कहना है कि ज्यादातर किसान जिन आढ़तियों से एडवांस पेमेंट लेते हैं, उन्हें फसल बेच देते हैं। जब आढ़ती के पास पेमेंट पहुंचती है तो आढ़ती अपनी उधारी काटकर बाकी धनराशि किसान को दे देता है। मोंगा ने कहा कि जमींदार सीधी पेमेंट लेना चाहते हैं तो ले भी सकते हैं। यदि आढ़ती के जरिए लेनी है वे भी ले सकते हैं। 

मोंगा ने कहा कि प्रदेश सरकार आढ़ती के खाते में पेमेंट डालने को तैयार है लेकिन केंद्र सरकार ,क्योंकि किसान की सीसीएल लिमिट केंद्र सरकार की तरफ से बनती है। मंडी में काम करने वाले मजदूर उनके अधीन हैं। जैसे वो कहेंगे वैसे ही करेंगे। मंडी में गेहूं आने वाला है और खरीद शुरू हो चुकी है।

मुक्तसर मंडी में न साफ-सफाई, न पीने का पानी
किसान आंदोलन, पिछले दिनों हुई बारिश और आढ़तियों की हड़ताल के चलते इस बार मंडियों में गेहूं की आवक देरी से शुरू हुई है। रविवार तक जहां अनाज मंडी में एक-दो किसान ही पहुंचे थे। वहीं सोमवार को मंडी में गेहूं की आवक शुरू होती नजर आई। मंडी में न तो साफ-सफाई का प्रबंध है और न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था है।

कोविड-19 के चलते सैनिटाइजर मशीन लगी तो हैं लेकिन वो भी खराब व खाली हैं। ऊपर से लावारिस पशु किसानों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बने हैं। यही नहीं एक अलग समस्या यह है कि मंडी में बाहरी राज्यों से आए अनेक ट्रक खड़े हैं जो जगह घेरे हुए हैं। 

गांव संगूधौण के किसान रेशम सिंह ने बताया कि वो दो दिन पहले मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे हैं। न तो सफाई व्यवस्था का कोई प्रबंध है न ही पीने के पानी का। सबसे बड़ी गंभीर समस्या लावारिस पशु हैं जो फसल में मुंह मार रहे हैं। पिछली रात भी उन्होंने जागकर काटी। मंडी में शेड के नीचे सफाई न होने से उन्हें अपनी फसल धूप में खुले आसमान के नीचे डालनी पड़ी। मार्केट कमेटी के सचिव बलकरन सिंह का कहना था कि साफ-सफाई करवाई जा रही है। सैनिटाइजर मशीन ठीक करवा दी गई हैं। 

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