कैप्टन अपने ही गढ़ में बोल्ड: न टोटका काम आया...न ही शाह व राजनाथ सिंह का प्रचार
पटियाला को कैप्टन अमरिंदर सिंह का गढ़ माना जाता रहा है, क्योंकि उन्होंने पटियाला शहरी सीट से लगातार साल 2002, 2007, 2012, 2017 के विधानसभा चुनावों में अपने विरोधियों को बड़े अंतर से हराकर जीत हासिल की थी।
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब लोक कांग्रेस के प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब विधानसभा चुनाव में अपने ही गढ़ में हार गए। कैप्टन को पटियाला शहर सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी पूर्व मेयर अजीतपाल सिंह कोहली ने 19873 मतों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। कोहली को 48104 वोट पड़े, वहीं कैप्टन को 28231 मत ही हासिल हो सके। इस सीट से अकाली दल (बादल) के हरपाल जुनेजा को 11835, कांग्रेस के पूर्व मेयर व प्रत्याशी विष्णु शर्मा को 9871 वोट मिले। जिसके बाद कैप्टन के बतौर सीएम रहते पंजाब की राजनीति का केंद्र बिंदु रहे मोती महल में सन्नाटा पसर गया।
कैप्टन के समर्थकों में निराशा देखी गई। दूसरी तरफ कैप्टन को हराने वाले अजीतपाल सिंह कोहली के घर में जश्न का माहौल देखा गया। ढोल की थाप पर समर्थक नाच गा रहे थे और इस दौरान मिठाई खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा करा रहे थे। सुबह आठ बजे मतगणना शुरू होने के बाद से ही कैप्टन लगातार आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी पूर्व मेयर अजीतपाल सिंह कोहली के पीछे चल रहे थे। जैसे-जैसे वोटों की गिनती का काम आगे बढ़ता गया, तो 10वें राउंड के आते-आते कोहली ने कैप्टन से काफी बढ़त बना ली थी, जिससे साफ हो गया था कि बाकी तीन राउंडों में कैप्टन इस बड़े अंतर को पार नहीं कर सकेंगे।
पटियाला शहरी सीट से कैप्टन की हार तय है। इस बार माहिरों की ओर से शुरुआत से कैप्टन के लिए चुनावी डगर आसान नहीं मानी जा रही थी। यह खुद कैप्टन भी भांप गए थे। जहां अब तक कैप्टन की ओर से विधानसभा चुनावों में पटियाला में दो या तीन बड़ी चुनावी रैलियां करके वोटरों को रिझाया जाता था वहीं इस बार उन्होंने पटियाला में डेरा जमाए रखा। इस दौरान चुनावी सभाओं से लेकर रैलियां तक उन्होंने कीं।
कैप्टन के हक में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह ने भी पटियाला पहुंचकर वोट मांगे। कैप्टन ने अपनी जीत की कामना को लेकर मोती महल में विशेष पूजा कराई। जिसमें भैंस के बच्चे को दान किया गया। जिससे शनि देवता प्रसन्न रहें और देवी मां की कृपा हासिल हो सके। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
कैप्टन के राजनीतिक कैरियर पर लगा सवालिया निशान: प्रोफेसर बराड़
पंजाबी यूनिवर्सिटी से जाने-माने राजनीतिक मामलों के माहिर प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़ का कहना है कि कैप्टन का अपने हलके में नान परफार्मेंस और हलके से गैरमौजूदगी उनकी हार के मुख्य कारण रहे। वोटरों में इस बात को लेकर कैप्टन प्रति नाराजगी थी। प्रोफेसर बराड़ ने कहा कि कैप्टन को अपनी बढ़ती उम्र के हिसाब से खुद ही राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए था लेकिन उन्होंने कांग्रेस छोडने के बाद नई पार्टी बना ली और फिर से चुनाव मैदान में उतर पड़े। जीतने से ज्यादा उनका मकसद ज्यादा कांग्रेस को हराना लग रहा था। प्रोफेसर बराड़ के मुताबिक चुनावों में हार के बाद कैप्टन के राजनीतिक कैरियर पर सवालिया निशान लग गया है।
लगातार चार बार पटियाला से जीते हैं कैप्टन
पटियाला को कैप्टन अमरिंदर सिंह का गढ़ माना जाता रहा है, क्योंकि उन्होंने पटियाला शहरी सीट से लगातार साल 2002, 2007, 2012, 2017 के विधानसभा चुनावों में अपने विरोधियों को बड़े अंतर से हराकर जीत हासिल की थी। पटियाला शाही घराने से होने कारण लोगों में कैप्टन का एक अलग ही क्रेज था। जिस कारण कैप्टन की रैलियों में लोगों की बड़ी भीड़ जुटती थी।
पंजाब व राजपुरा में आप की जीत पर राजपुरा में जश्न
पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की प्रचंड जीत पर राजपुरा में जश्न का माहौल है। आम आदमी पार्टी की राजपुरा से प्रत्याशी नीना मित्तल की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ता जगह-जगह जीत का जश्न मनाया। नीना मित्तल ने राजपुरा विस सीट से 54834 वोट प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी जगदीश जगा को 22493 वोटों से हराकर जीत प्राप्त की। पिछले चुनावों में राजपुरा से लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके कांग्रेस के हरदियाल सिंह कंबोज को पटखनी देते हुए उनको तीसरे स्थान पर धकेल दिया।