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कलह तो बाकी है: फिर दिखी नवजोत सिद्धू की अकड़, भट्ठल-लाल सिंह और रावत के पांव छुए, कैप्टन को देखा तक नहीं

Fri, 23 Jul 2021 05:32 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 23 Jul 2021 05:32 PM IST
सार

ताजपोशी समारोह में आकर कैप्टन ने अनुभवी और सुलझे हुए राजनीतिज्ञ के रूप में स्पष्ट कर दिया कि पंजाब में कांग्रेस के कप्तान वहीं हैं, जबकि नवजोत सिद्धू ने नए और हठी खिलाड़ी के रूप में अपने शक्ति प्रदर्शन के दौरान न सिर्फ कैप्टन को अनदेखा किया, बल्कि उनसे माफी मांगने को लेकर भी चुप्पी साधे रखी। परंपरा के अनुसार सिद्धू को अपनी नियुक्ति का एलान होते ही अन्य विधायकों से मेल-मिलाप बढ़ाने से पहले विधायक दल के नेता से मिलना चाहिए था। साथ ही राजनेता के तौर पर कैप्टन के साथ अपने मनमुटाव भी दूर करने चाहिए थे। 

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Punjab Congress Chief Navjot Sidhu Attitude is Cold towards Captain Amarinder Singh 
नवजोत सिद्धू ने कैप्टन को किया अनदेखा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब कांग्रेस की कलह अभी बाकी है। सारे गिले-शिकवे भुलाकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो दरियादिली दिखाई लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू के कैप्टन के प्रति रवैये में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया। सभी को साथ लेकर चलने का एलान करते हुए सिद्धू ने शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस भवन में आयोजित समारोह में पंजाब प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रधान के रूप में पदभार संभाल लिया।

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इस मौके पर उस समय बड़ी विचित्र स्थिति बन गई जब नवजोत सिद्धू भाषण देने के लिए कुर्सी से उठे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल, पूर्व अध्यक्ष लाल सिंह और पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश रावत के पांव छूकर तो आशीर्वाद लिया लेकिन मंच पर ही मौजूद कैप्टन अमरिंदर सिंह को पूरी तरह अनदेखा कर दिया।
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सिद्धू के साथ ही नवनियुक्त चारों कार्यकारी अध्यक्षों- कुलजीत सिंह नागरा, सुखविंदर सिंह डैनी, संगत सिंह गिलजियां और पवन गर्ग ने भी पदभार संभाल लिया। इस मौके पर कैप्टन ने सिद्धू और चारों कार्यकारी अध्यक्षों को बधाई दी। अपने भाषण में कैप्टन ने कहा कि आगामी चुनाव में न तो बादल दिखाई देंगे और न ही मजीठिया। उन्होंने कहा कि नवजोत सिद्धू के पिता को वे (कैप्टन) ही सियासत में लाए थे। उन्होंने कहा कि अब वह और सिद्धू पंजाब की ही नहीं बल्कि देश की सियासत में एकजुट दिखाई देंगे। कैप्टन ने कहा कि जब पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें बताया कि नवजोत सिद्धू को प्रदेश प्रधान बनाया जा रहा है, तो उन्होंने हाईकमान के फैसले का खुला स्वागत किया था।

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भाषण में उठाए वे सभी मसले, जिन पर थी रार

प्रधान पद संभालने के बाद नवजोत सिद्धू ने अपने भाषण में सबसे पहले अपने ओहदे को लेकर बीते कई महीनों तक चले विवाद का ही जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि उनके लिए प्रधान पद कोई मसला है। उन्होंने कहा कि ओहदे तो मैंने वैसे ही छोड़ दिए, कैबिनेट भी ऐसे ही छोड़ दी। सिद्धू ने आगे कहा कि अगर उन्होंने पंजाब के मसले हल नहीं करवाए तो यह प्रधानी उनके किसी काम की नहीं होगी। 

सिद्धू ने अपने भाषण में उन सभी मसलों का जिक्र किया, जिन्हें वे लंबे समय से ट्वीटों के जरिए कैप्टन पर सवाल के रूप में दागते रहे थे। उन्होंने कहा कि मसला प्रधानी का नहीं, किसानी का है, मसला ईटीटी टीचरों का है जो सड़कों पर हैं। डाक्टरों व नर्सों का है जो हड़ताल पर हैं, मसला ड्राइवर-कंडक्टरों का है, जो धरने पर बैठे हैं। इसके अलावा मसला मेरे गुरु का है और चिट्टे के व्यापारी बड़े मगरमच्छों का है, जिन्हें अभी तक अंदर नहीं किया गया है।

फिर बोले रावत, 2022 चुनाव कैप्टन की अगुवाई ही लड़ेंगे

पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस परंपराओं को आगे ले जाने वाली पार्टी है और पार्टी की परंपरा है, सबको साथ लेकर चलना। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सिद्धू अपनी जिम्मेदारी बढ़िया ढंग से निभाएंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब का शेर बताते हुए रावत ने कहा कि शेर कभी बूढ़ा नहीं होता और हमेशा शेर ही रहता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पंजाब में 2022 के चुनाव कैप्टन की अगुवाई में ही लड़े जाएंगे।

छलका जाखड़ का दर्द
इससे पहले पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सिद्धू को प्रधान बनने की बधाई दी लेकिन भाषण के दौरान उनका दर्द साफ झलक आया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने ज्यादातर समय कैप्टन के साथ बिताए बीस साल के संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि 2022 में कांग्रेस की वापसी का रास्ता बहिबलकलां और कोटकपूरा से होकर निकलता है। अगर इनके पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला तो सत्ता की सीढ़ियां भी पार्टी से दूर हो जाएंगी।
 
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