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कैप्टन अमरिंदर सिंह बोले- पंजाबियों के हित में लगाना पड़ा कर्फ्यू, उल्लघंन पर होगी सख्त कार्रवाई
Tue, 24 Mar 2020 09:30 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 24 Mar 2020 09:30 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लोगों को कोरोना के कारण पैदा हुए मौजूदा जंग जैसे हालात से निपटने के लिए सोमवार से राज्य में लगाए गए कर्फ्यू का स्वेच्छा से पालन करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि राज्य के हित में लगाए गए कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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एक वीडियो संदेश में सूबे के लोगों से रू-ब-रू होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हितों और आपके भले के लिए मुझे मजबूरी में कर्फ्यू लगाने का कदम उठाना पड़ा, क्योंकि सोमवार को सुबह से राज्य में मुकम्मल बंद (लॉक डाउन) लागू होने के बावजूद शहरों, मोहल्लों और कस्बों में लोगों के आम दिनों की तरह इधर-उधर जाने की रिपोर्ट हासिल हुई थी।
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लोगों के सहयोग की मांग करते हुए कैप्टन ने कहा कि लोगों द्वारा बंद का उल्लंघन करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एक प्रमुख होने के नाते पंजाब को बचाना मेरी और मेरी सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में कर्फ्यू पूरे दिन 24 घंटों के लिए लागू रहेगा और आपातकालीन जरूरतें पैदा होने पर संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों से बाकायदा इजाजत लेकर ही बाहर जाने की आज्ञा होगी और डिप्टी कमिश्नरों के मोबाइल नंबर लोगों के साथ साझे किए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन समय में कठिन फैसले लेने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में से निकलने के लिए कर्फ्यू लगाना जरूरी हो गया था। उन्होंने लोगों से अपील की कि कृपया मेरी बात ध्यान से सुनो और मेरे साथ सहयोग करो। उन्होंने कहा कि हम सभी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं और इस संकट में से निकलने के लिए हमें कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहिए।
कैप्टन ने कहा कि हमें अपने राज्य और हमारे लोगों को बचाना चाहिए। जहां हमारे बच्चे हैं और परिवार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक छोटा राज्य होने के नाते पंजाब की अपनी जनसंख्या को सुरक्षित रखने और आने वाले वर्षों के लिए खुशी भरे जीवन को यकीनी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाने का सबसे बड़ा कारण है।
एक स्कूल की मान्यता रद्द, चार पर लटकी तलवार
कोविड-19 के बढ़ते खतरे के दौरान स्कूलों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर विद्यार्थियों से नियमों के विरुद्ध वसूली की खबरों का गंभीरता से लेते हुए पंजाब सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले 5 स्कूलों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है।
राज्य के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने बताया कि सरकार ने इस वायरस के खतरे को देखते हुए राज्य भर के स्कूलों की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी है और स्कूलों के स्टाफ को भी रिलीव कर दिया है लेकिन ऐसी खबरें आ रही हैं कि कुछ स्कूल इन निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पूरी जांच के बाद स्कूल प्रबंधकों को दोषी पाया गया है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संबंधित स्कूलों की मान्यता या एनओसी रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिंगला ने बताया कि श्री गुरु अमरदास सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोइन्दवाल (तरन तारन) की मान्यता 1 अप्रैल, 2020 से रद्द कर दी गई है। उन्होंने कहा कि संगरूर, बरनाला, जालंधर और तरन तारन के जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह उल्लंघन करने वाले चार स्कूल बंद करने के लिए अपेक्षित कार्रवाई को यकीनी बनाएं। उन्होंने आगे कहा कि भारत मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल मलेरकोटला और अकाल एकेडमी फतेहगढ़ छन्ना, माता गुजरी स्कूल धनौला (बरनाला) और आर्मी पब्लिक स्कूल, जालंधर को दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए सख्त कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।
कैबिनेट मंत्री ने सभी स्कूल अधिकारियों को हिदायतें जारी की कि वह विद्यार्थियों द्वारा 31 मार्च तक जमा करवाई जाने वाली अदायगियों पर कोई भी लेट फीस न लगाएं। उन्होंने आगे कहा कि माता-पिता स्कूल प्रबंधकों को फीसें या अतिरिक्त चार्ज नहीं दे सकेंगे क्योंकि राज्य में कर्फ्यू लगाया गया है जिसने लोगों की लगभग सभी गतिविधियों को घटा दिया है। उन्होंने स्कूल अधिकारियों से कहा कि माता-पिता के लिए बकाए की अदायगी के लिए आखिरी तारीख़ में विस्तार कर दें। सिंगला ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पंजाब में फैले कोरोना वायरस के खतरे को रोकने के लिए हर संभव कदम को यकीनी बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन को उच्च चेतावनी दी गई है और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।
राज्य के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने बताया कि सरकार ने इस वायरस के खतरे को देखते हुए राज्य भर के स्कूलों की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी है और स्कूलों के स्टाफ को भी रिलीव कर दिया है लेकिन ऐसी खबरें आ रही हैं कि कुछ स्कूल इन निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पूरी जांच के बाद स्कूल प्रबंधकों को दोषी पाया गया है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संबंधित स्कूलों की मान्यता या एनओसी रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिंगला ने बताया कि श्री गुरु अमरदास सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोइन्दवाल (तरन तारन) की मान्यता 1 अप्रैल, 2020 से रद्द कर दी गई है। उन्होंने कहा कि संगरूर, बरनाला, जालंधर और तरन तारन के जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह उल्लंघन करने वाले चार स्कूल बंद करने के लिए अपेक्षित कार्रवाई को यकीनी बनाएं। उन्होंने आगे कहा कि भारत मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल मलेरकोटला और अकाल एकेडमी फतेहगढ़ छन्ना, माता गुजरी स्कूल धनौला (बरनाला) और आर्मी पब्लिक स्कूल, जालंधर को दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए सख्त कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।
कैबिनेट मंत्री ने सभी स्कूल अधिकारियों को हिदायतें जारी की कि वह विद्यार्थियों द्वारा 31 मार्च तक जमा करवाई जाने वाली अदायगियों पर कोई भी लेट फीस न लगाएं। उन्होंने आगे कहा कि माता-पिता स्कूल प्रबंधकों को फीसें या अतिरिक्त चार्ज नहीं दे सकेंगे क्योंकि राज्य में कर्फ्यू लगाया गया है जिसने लोगों की लगभग सभी गतिविधियों को घटा दिया है। उन्होंने स्कूल अधिकारियों से कहा कि माता-पिता के लिए बकाए की अदायगी के लिए आखिरी तारीख़ में विस्तार कर दें। सिंगला ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पंजाब में फैले कोरोना वायरस के खतरे को रोकने के लिए हर संभव कदम को यकीनी बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन को उच्च चेतावनी दी गई है और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।