पीयू मामला: सीएम मान बोले- हरियाणा ने 50 साल से नहीं उठाया संबद्धता का मामला, अब क्या जरूरत पड़ गई
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि पीयू पंजाब की विरासत है। पिछले 50 साल से हरियाणा ने कॉलेजों की संबद्धता का मुद्दा नहीं उठाया, अब ऐसे क्या हालात बन गए कि इसकी जरूरत महसूस हो रही है। मेरी अपील है कि इस मसले को भविष्य के लिए भी खत्म समझा जाए। साथ ही बैठक के एजेंडे से भी इसको हटा दिया जाए।
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हरियाणा के कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) से संबद्ध करने का मुद्दा मंगलवार को अमृतसर में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की बैठक में गरमा गया। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने जहां बैठक में इसकी अनुशंसा की, वहीं पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। इसमें हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब के मुख्यमंत्रियों के अलावा चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर के प्रशासक भी शामिल रहे। इस दौरान हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने हरियाणा के कॉलेजों को पीयू से संबद्ध करने का मुद्दा उठाया, जिसे खारिज करते हुए पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि पीयू पंजाब की विरासत है। पिछले 50 साल से हरियाणा ने कॉलेजों की संबद्धता का मुद्दा नहीं उठाया, अब ऐसे क्या हालात बन गए कि इसकी जरूरत महसूस हो रही है। मेरी अपील है कि इस मसले को भविष्य के लिए भी खत्म समझा जाए। साथ ही बैठक के एजेंडे से भी इसको हटा दिया जाए।
पंजाब सरकार की ओर से पीयू के वित्तीय घाटे को भी दूर किया गया है। पीयू के लिए ग्रांट इन एड को बढ़ाकर 94.13 करोड़ कर दिया गया है। वहीं पीयू में नए हॉस्टलों के निर्माण को लेकर भी पंजाब की ओर से फंड जारी किया गया है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार भी पीयू के लिए यूजीसी पे-स्केल का फंड जारी करे।
चार माह पहले भी मुद्दे को लेकर हुई थी पंजाब-हरियाणा की बैठक
चंडीगढ़ में चार माह पहले पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित की ओर से भी पीयू में पंजाब और हरियाणा के शेयर को लेकर बैठक आयोजित करवाई गई थी। तब हरियाणा के सीएम ने कहा था कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम-1966 के तहत पीयू में हरियाणा को हिस्सा दिया गया था। हरियाणा के कॉलेज पीयू से संबद्ध थे लेकिन 1973 को एक अधिसूचना जारी कर इसे समाप्त कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी से भी राज्यों के कॉलेजों की संबद्धता हो रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य है कि सभी शिक्षण संस्थान देश की उन्नति में सहयोग करें, इसलिए हरियाणा के कॉलेजों की संबद्धता भी पीयू से की जाए। बीते तीन दशक से अधिक समय से पीयू को पंजाब सरकार की ओर से ग्रांट जारी की जा रही है जबकि पहले हरियाणा सरकार की ओर से भी 40 प्रतिशत ग्रांट दी जाती रही है।
प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने 12 जनवरी 2023 को चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने कहा था कि पीयू में हरियाणा के कॉलेज शामिल करने से विवि की फंड की राशि बढ़ेगी ही साथ ही यूनिवर्सिटी के स्टेटस में भी बढ़ोतरी होगी। इस एजेंडे को मंगलवार को आयोजित बैठक में भी यूटी की ओर से शामिल किया गया।
चंडीगढ़ में दुष्कर्म और पॉक्सो के लंबित 230 मामलों की चर्चा
अमृतसर में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की बैठक में दुष्कर्म और पॉक्सो के लंबित मामलों पर भी चर्चा हुई। बैठक में यूटी प्रशासन की ओर से रखे गए आंकड़ों के मुताबिक चंडीगढ़ में दुष्कर्म और पॉक्सो के कुल 230 मामले अदालत में लंबित हैं। यह आंकड़े एनजेडसी की पिछली बैठक में कानून एवं न्याय मंत्रालय के साथ भी साझा किए गए थे। बैठक में इन मामलों की प्रगति रिपोर्ट पर समीक्षा की गई। बैठक में मामलों के निपटारे को लेकर फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की भी अनुशंसा की गई।
पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन रोकने के लिए स्थापित हो सेंटर
पठानकोट में एनएसजी का रीजनल सेंटर जल्दी स्थापित करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरहद पार से आतंकवादी हमलों का हमेशा शिकार होता है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से किए गए एलान के मुताबिक पठानकोट में एनएसजी सेंटर स्थापित किया जाना चाहिए। मान ने कहा कि इस मसले को लटकाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि देश की सरहदों की रक्षा के लिए यह समय की जरूरत है। ड्रोन के खतरे का मुकाबला करने के लिए प्रौद्यौगिकी विकसित करने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में ड्रोन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाना चाहिए।
बासमती के निर्यात शर्तों का उठाया मुद्दा
बासमती के निर्यात पर शर्तों का ताजा मामला उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मसला सीधे तौर पर पंजाब के किसानों के साथ जुड़ा है, क्योंकि केंद्र सरकार ने बासमती के न्यूनतम निर्यात कीमत 1200 डॉलर प्रति टन तय कर दी है, जो फसल के घरेलू भाव को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसानों और कारोबारियों की आर्थिक हालत को बड़ी चोट पहुंचाएगा।
राज्यों को मिलें ज्यादा वित्तीय और राजनीतिक शक्तिः मान
देश में सही मायनों में संघीय ढांचे की जरूरत की वकालत करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि समूचे राजनीतिक परिपेक्ष्य में यह बात महसूस की जा रही है कि राज्यों को और ज्यादा वित्तीय एवं राजनीतिक शक्ति दी जाएं। उन्होंने कहा कि इस पक्ष पर सभी एकमत हैं कि राज्य सरकारों को अपनी विकास प्राथमिकताओं के चयन और राजस्व के लिए काम करने के लिए ज्यादा छूट देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संघवाद हमारे संविधान के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है लेकिन दुर्भाग्य से पिछले 75 सालों में इस अधिकार पर केंद्रीयकरण का रुझान हावी रहा है। मान ने कहा, ‘यह बात हर कोई जानता है कि आधुनिक युग में राज्य सरकारें अपने लोगों की समस्याओं को समझने और हल करने के लिए ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं।’