{"_id":"5d5a58c68ebc3e89cd66ec3b","slug":"punjab-cm-captain-amrinder-singh-strategy-to-complete-mission-2022-via-sc-vote-bank","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"भाजपा के खिलाफ हुई रविदास बिरादरी, तो पंजाब सीएम ने मौका भुनाया और 'मिशन 2022' में जुट गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा के खिलाफ हुई रविदास बिरादरी, तो पंजाब सीएम ने मौका भुनाया और 'मिशन 2022' में जुट गए
Mon, 19 Aug 2019 01:37 PM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 19 Aug 2019 01:37 PM IST
विज्ञापन
पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एससी वोटों के जरिए मिशन 2022 की तैयारी शुरू कर दी है। मिशन 2022 में दोआबा की रविदास बिरादरी का बड़ा वोट बैंक सबसे अहम है। पिछले दिनों दिल्ली में हुए रविदास मंदिर विवाद के बाद वह फिलहाल कांग्रेस के पाले में खड़ा दिखाई दे रहा है। अदालत के फैसले केबाद दिल्ली का प्राचीन रविदास मंदिर गिरा दिया गया। पंजाब सरकार का सीधे तौर पर इससे कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन सरकार ने मामले की सियासी गंभीरता को समझा और एक्टिव हो गई। सीएम ने एक दिन में तीन बार केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से खुद बात की।
साथ ही बयान जारी कर मंदिर के दोबारा निर्माण और कानूनी सलाह का खर्च उठाने का एलान किया। दो कैबिनेट मंत्रियों और दोआबा के तीन एससी नेताओं की कमेटी बना दी। दोनों मंत्रियों अरुणा चौधरी और चरनजीत चन्नी को 12 अगस्त को जालंधर भेजा। जिन्होंने पहले डीसी दफ्तर, फिर सर्किट हाउस में रविदास बिरादरी के प्रतिनिधियों से बातचीत की। जिसमें अंदरखाते 13 अगस्त के बंद को सफल बनाने की पटकथा लिखी गई। 14 अगस्त को सीएम खुद जालंधर गए और बिरादरी के करीब 25 संतों के साथ बात की।
उन्हें आश्वासन दिया गया कि सरकार दिल्ली की जमीन खरीद कर मंदिर दोबारा बनाने का प्रयास करेगी। इतना ही नहीं, इस पूरे प्रकरण में दोआबा में दलित लीडरशिप विकसित करने की भी कोशिश की गई। चौधरी जगजीत के निधन के बाद से कांग्रेस को यह कमी खलती रही है। सीएम ने विधायक सुशील रिंकू से भी लगातार बात कर सारे डेवलपमेंट की जानकारी दी। उन्हीं को बिरादरी के प्रतिनिधियों को लामबंद करने का जिम्मा दिया गया। पूरे मंदिर प्रकरण में कांग्रेस ने दूसरी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया।
विज्ञापन
शिरोमणि अकाली दल पहले मुद्दे को समझ नहीं पाया। फिर उसने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगा दिए। आप और शिअद आपस में उलझे रहे। बसपा का कहीं अता-पता नहीं था। जबकि, भाजपा इस प्रकरण में विलेन बनी, बंद के दिन पीएम नरेंद्र मोदी के ही पुतले जलाए।
विज्ञापन
साथ ही बयान जारी कर मंदिर के दोबारा निर्माण और कानूनी सलाह का खर्च उठाने का एलान किया। दो कैबिनेट मंत्रियों और दोआबा के तीन एससी नेताओं की कमेटी बना दी। दोनों मंत्रियों अरुणा चौधरी और चरनजीत चन्नी को 12 अगस्त को जालंधर भेजा। जिन्होंने पहले डीसी दफ्तर, फिर सर्किट हाउस में रविदास बिरादरी के प्रतिनिधियों से बातचीत की। जिसमें अंदरखाते 13 अगस्त के बंद को सफल बनाने की पटकथा लिखी गई। 14 अगस्त को सीएम खुद जालंधर गए और बिरादरी के करीब 25 संतों के साथ बात की।
विज्ञापन
उन्हें आश्वासन दिया गया कि सरकार दिल्ली की जमीन खरीद कर मंदिर दोबारा बनाने का प्रयास करेगी। इतना ही नहीं, इस पूरे प्रकरण में दोआबा में दलित लीडरशिप विकसित करने की भी कोशिश की गई। चौधरी जगजीत के निधन के बाद से कांग्रेस को यह कमी खलती रही है। सीएम ने विधायक सुशील रिंकू से भी लगातार बात कर सारे डेवलपमेंट की जानकारी दी। उन्हीं को बिरादरी के प्रतिनिधियों को लामबंद करने का जिम्मा दिया गया। पूरे मंदिर प्रकरण में कांग्रेस ने दूसरी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया।
विज्ञापन
शिरोमणि अकाली दल पहले मुद्दे को समझ नहीं पाया। फिर उसने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगा दिए। आप और शिअद आपस में उलझे रहे। बसपा का कहीं अता-पता नहीं था। जबकि, भाजपा इस प्रकरण में विलेन बनी, बंद के दिन पीएम नरेंद्र मोदी के ही पुतले जलाए।
खोया वोट बैंक वापस लाने की कवायद
कांग्रेस ने रविदास मंदिर विवाद के जरिये अपना खोया हुआ वोट बैंक वापस लाने की कवायद की है। इतिहास गवाह है कि जब-जब दोआबा के एससी वोटरों ने कांग्रेस को आंखों पर बिठाया, यह सत्ता में आई है। 2002 में दोआबा में पार्टी ने क्लीन स्वीप कर सरकार बनाई थी। पर 2007 और 2012 में यह खिसका और कांग्रेस सत्ता से दूर हो गई।
2017 में इसी ने कांग्रेस की फिर सरकार बनाई। लेकिन दो साल बाद ही हुए लोकसभा चुनाव में बसपा ने कांग्रेस के एससी वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई थी। दोआबा के फिल्लौर, करतारपुर,जालंधर वेस्ट, आदमपुर, जालंधर नॉर्थ, फगवाड़ा, शाम चौरासी, चब्बेवाल, बंगा विधानसभा हलकों में बसपा, कांग्रेस के काफी वोट ले गई थी।
होशियारपुर सीट पार्टी हार गई थी, बड़ी मुश्किल से जालंधर और आनंदपुर साहिब सीटें जीत पाई थी। कांग्रेस जानती है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत के लिए दोआबा के एससी वोट अहम हैं। इसीलिए पार्टी ने इस पर पूरा फोकस किया है।
2017 में इसी ने कांग्रेस की फिर सरकार बनाई। लेकिन दो साल बाद ही हुए लोकसभा चुनाव में बसपा ने कांग्रेस के एससी वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई थी। दोआबा के फिल्लौर, करतारपुर,जालंधर वेस्ट, आदमपुर, जालंधर नॉर्थ, फगवाड़ा, शाम चौरासी, चब्बेवाल, बंगा विधानसभा हलकों में बसपा, कांग्रेस के काफी वोट ले गई थी।
होशियारपुर सीट पार्टी हार गई थी, बड़ी मुश्किल से जालंधर और आनंदपुर साहिब सीटें जीत पाई थी। कांग्रेस जानती है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत के लिए दोआबा के एससी वोट अहम हैं। इसीलिए पार्टी ने इस पर पूरा फोकस किया है।