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कैप्टन अमरिंदर सिंह बोले- जीएसटी से बाहर रहे पेट्रोल-डीजल, राज्यों का हक छीना जा रहा है

Sun, 07 Oct 2018 12:35 PM IST
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 07 Oct 2018 12:35 PM IST
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Punjab CM Captain Amrinder Singh Said, Petrol Diesal must be out from gst
अमरिंदर सिंह - फोटो : SELF
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। वहीं एक और मुद्दे पर वे खुलकर बोले। कैप्टन के इस विचार के साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमार स्वामी ने भी सहमति जताई, लेकिन महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस तेल को जीएसटी के दायरे में लाने के हक में थे।
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जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और अमरिंदर कैबिनेट में वित्त मंत्री मनप्रीत बादल पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी में लाने की वकालत कर चुके हैं ताकि कीमतों को नियंत्रण में लाया जा सके। शनिवार को नई दिल्ली में एक समिट में हिस्सा लेते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनके राज्य की माली हालत अच्छी नहीं है।
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पिछले साल जीएसटी लागू होने के बाद राज्य का वित्तीय ढांचा केंद्र पर निर्भर होकर रह गया है। हमारे पास राज्य को चलाने के लिए पैसा नहीं है। जीएसटी के बाद, राज्य में हमारे पास कुछ नहीं बचा है। हम केंद्र पर निर्भर होकर रह गए हैं। हमारे पास उद्योग नहीं हैं,  केवल खेतीबाड़ी है। हमारे पास राजस्व के तीन माध्यम हैं।
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एक तेल है, एक एक्साइज है और एक संपत्ति ट्रांसफर के एवज में ली जा रही स्टांप ड्यूटी। जहां तक रियल इस्टेट का सवाल है, पंजाब अभी तक आगे नहीं बढ़ रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था अच्छी तरह से नहीं है। आखिर मैं राजस्व कहां से हासिल करूं? मुख्यमंत्री द्वारा बासमती के अलावा अन्य अनाज को निर्यात के अंतर्गत लाने पर भी जोर दिया।

डीजीपी व जज नियुक्ति में छिन रहा राज्यों का हक : कैप्टन

Punjab CM Captain Amrinder Singh Said, Petrol Diesal must be out from gst
कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : File Photo
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्यों की शक्तियों को कमजोर करने पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे देश के संघीय ढांचे में केंद्र-राज्य संबंधों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि डीजीपी व जज नियुक्ति में राज्यों का हक छिन रहा है। शनिवार को नई दिल्ली में एक समिट में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्हें केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने में कोई दिक्कत नहीं है।

उन्हें पूरा सहयोग भी मिल रहा है लेकिन राज्य को वित्त और प्रमुख नियुक्तियों के मामलों समेत कुछ मसले पेश आ रहे हैं। राज्यों के हक को कमजोर किया जा रहा है और यहां तक कि उनके पास अपने राज्यों का पुलिस प्रमुख नियुक्त करने का भी अधिकार नहीं है बल्कि नियुक्ति के लिए नामों की सूची यूपीएससी को भेजनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि क्या उन्हें हमसे ज्यादा पता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार डीजीपी की नियुक्ति के मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले पर पंजाब के साथ खड़ी होगी क्योंकि वह कैप्टन के साथ इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि राज्यों को अपने डीजीपी नियुक्त करने की पूर्ण आज़ादी होनी चाहिए। र्काटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी कहा कि केंद्र द्वारा उनके राज्य को सहयोग नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्यों से सभी शक्तियां, शक्तियों छीन रहा है जिसके कारण राज्य कर इकठ्ठा करने से वंचित हो जाएंगे और इनके पास अपनी आय वृद्धि के साधन भी कमज़ोर हो जाएंगे। कैप्टन ने कहा कि जजों की नियुक्ति के समय भी राज्यों के साथ विचार-विमर्श नहीं किया जाता जबकि पहले संबंधित राज्य द्वारा सिफारशें भेजी जातीं थीं और अब सिर्फ नाम भेजे जाते हैं।

नशों पर बने राष्ट्रीय नीति

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कैप्टन अमरिंदर सिंह
नशों संबंधी सवाल पर कैप्टन ने एक राष्ट्रीय नीति बनाए जाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस तरह की नीति बनाने के लिए उनके  द्वारा केंद्र के साथ बातचीत की जा रही है। उत्तरी राज्यों के  युवाओं को बर्बाद करने के लिए पाकिस्तान द्वारा सरहद पार से नशे भेजे जा रहे हैं। उन्होंने तथ्य रखा कि चाहे दिल्ली और मुंबई में महंगे दाम पर नशे बेचे जा सकते हैं लेकिन नशों की गुजरात से अमृतसर तस्करी की जा रही है।

इसका एकमात्र मकसद जवानी को तबाह करना और सेना को बहादुर जवानों से वंचित करना है। उन्होंने बताया कि सेना की दो-तिहाई संख्या उत्तरी बेल्ट से है। उन्होंने पूछा, ‘‘यदि आपके पास स्वस्थ और हट्टे-कट्टे नौजवान नहीं होंगे तो आपको सेना के जवान कहां से मिलेंगे?’’

बादलों के प्रति नरमी बरतने के आरोप से इंकार
राज्य सरकार द्वारा बादलों के प्रति नरमी बरतने के आरोपों पर पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को भी पकड़कर सलाखों के पीछे नहीं डाला जा सकता। उन्होंने कहा कि जस्टिस (सेवामुक्त) रणजीत सिंह जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट दे दी है और बेअदबी के मामलों की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है।

कैप्टन ने कहा कि उनकी सरकार एसजीपीसी पर कंट्रोल नहीं करना चाहती लेकिन बादलों को वहां से बाहर करना चाहती है क्योंकि इन्होंने धार्मिक संस्था को अपनी जागीर बनाया हुआ है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी कांग्रेस द्वारा हर उस एक को समर्थन दिया जायेगा, जो बादलों को शिरोमणी कमेटी से बाहर का रास्ता दिखा सकता हो। उन्होंने कहा कि अकाली नेता सिख समुदाय के कल्याण के लिए काम नहीं कर रहे।

 
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