कृषि सुधारों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह बोले- कृषि पर कानून बनाने का हक केंद्र को नहीं, यह संघीय ढांचे पर हमला
- कहा- पंजाब में 60 साल से चला आ रहा सिस्टम ही मुफीद
- केंद्र के आर्डिनेंस को संघीय ढांचे पर हमला करार दिया
- कृषि राज्यों का विषय केंद्र के हस्तक्षेप का मतलब नहीं
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र की ओर से घोषित किए गए कृषि सुधारों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि यह राज्यों का विषय है। केंद्र सरकार राज्यों की बिना सलाह के कृषि संबंधी मामलों में अपना फरमान लागू करेगी तो संघीय ढांचा बिगड़ जाएगा। कैप्टन ने केंद्र को विरोध की चेतावनी देते हुए इसे सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में केंद्र सरकार को पत्र भेजकर अपना विरोध भी जताएंगे।
सीएम ने चेतावनी दी कि इससे फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और खरीद व्यवस्था के खात्मे का आधार बंधेगा और राज्य के किसानों में बेचैनी पैदा होगी। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के तहत यह राज्य के अधिकारों को दबाने का प्रयास है। पंजाब सरकार मुल्क के संघीय ढांचे को कमजोर करने वाले हर उस कदम के खिलाफ लड़ेगी जिससे राज्य के मजबूत कृषि उत्पादन और विपणन प्रणाली में सीधा या नुकसानदायक दखल दिया जा रहा हो।
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उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा फैसला देश की अन्न सुरक्षा को बुरी तरह और नकारात्मक ढंग से प्रभावित करेगा। भारत का संघीय ढांचा केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारियों और भूमिका को स्पष्ट रूप में निर्धारित करता है। संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत कृषि राज्य का विषय है। केंद्र सरकार के पास ऐसा कानून बनाने के लिए कोई शक्तियां नहीं हैं। जिससे कृषि उत्पादन, विपणन और प्रसंस्करण की गतिशीलता से निपटा जा सके।
मंडीकरण प्रणाली रही प्रभावी
पंजाब में कृषि की उपज के लिए प्रभावशाली मंडीकरण प्रणाली का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था राज्य के हक में खरी उतरी है। 60 सालों के लंबे समय तक इसने हर परीक्षा की घड़ी को पार किया है। राज्य में उपज के खुले मंडीकरण और खेतों से मंडियों और गोदामों तक निर्वाध ढुलाई के लिए अति आधुनिक ढांचा विकसित है।
अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केंद्रीय मदद जरूरी
कैप्टन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा छोटे राज्यों का साथ नहीं दे रही है। केंद्र का कर्तव्य है कि इस जंग में राज्यों की मदद के लिए केंद्रीय मदद जरूरी है। सीएम ने कहा कि सूबे में आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए सभी कदम राज्य सरकार ने उठाए हैं। राज्य के अधिकारों को घटाते हुए केंद्र द्वारा बहुत कम और देरी से की गई वित्तीय मदद का लाभ भी कम हो गया है।
बताया कि राज्य के कुल 2.56 लाख औद्योगिक इकाइयों में से 20 हजार को छोड़कर सभी चालू हो चुकी हैं। कैप्टन ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार जल्द ही सहकारी चीनी मिलों का बकाया अदा करेगी और निजी मिल मालिकों पर भी दबाव डाल रही है कि वह किसानों का बकाया अदा करे।
स्वेच्छा से पंजाब में रहने वाले प्रवासी कामगारों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि 11.50 लाख लोग, जिन्होंने अपने घरों को वापस जाने के लिए आवेदन किया था में से 5 लाख से अधिक ने उद्योगों के खुलने से पंजाब में ही रहने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि कई प्रवासी कामगार अब दोबारा काम शुरू करने के लिए पंजाब वापस आना चाहते हैं।