सिद्धू-मजीठिया की जफ्फी का विवाद: भगवंत मान ने बिना नाम लिए कसा तंज..., कहा-एक थाली के चट्टे बट्टे
जालंधर में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू और बिक्रम सिंह मजीठिया गले मिले थे। राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते सिद्धू और मजीठिया की इस जफ्फी से राजनीति गरमा गई है।
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ਜਦੋਂ …
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) June 4, 2023
ਜਨਰਲ ਡਾਇਰਾਂ ਨੂੰ ਰੋਟੀਆਂ ਖਵਾਉਣ ਵਾਲੇ
ਧਾਰਮਿਕ ਅਸਥਾਨਾਂ ਤੇ ਟੈਂਕ ਚੜਾਉਣ ਵਾਲੇ
ਗੁਰੂ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀਆਂ ਬੇਅਦਬੀਆਂ ਕਰਾਉਣ ਵਾਲੇ
ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਧਰਮ ਦੇ ਨਾਮ ਤੇ ਲੜਾਉਣ ਵਾਲੇ
ਕਿਸਾਨ ਵਿਰੋਧੀ ਕਾਨੂੰਨ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ
ਸਮਗਲਰਾਂ ਨੂੰ ਗੱਡੀਆਂ ਚ ਬਿਠਾਉਣ ਵਾਲੇ
ਗੱਲ ਗੱਲ ਤੇ ਤਾਲ਼ੀ ਠੁਕਵਾਉਣ ਵਾਲੇ
ਸ਼ਹੀਦਾਂ ਦੀਆਂ ਯਾਦਗਾਰਾਂ ਚੋਂ ਪੈਸੇ…
मान ने ट्वीट किया-जनरल डायर को रोटियां खिलाने वाले, धार्मिक स्थानों पर टैंक चढ़ाने वाले, गुरु साहिब की बेअदबी करवाने वाले, देश को धर्म के नाम पर लड़वाने वाले, किसान विरोधी कानून बनाने वाले, तस्करों को गाड़ियों में बिठाने वाले, बात बात पर ताली ठुकवाने वाले, शहीदों की यादगारों में पैसे कमाने वाले... हो गए सारे इकट्ठे। इसे कहते हैं-एक थाली के चट्टे बट्टे।
कांग्रेस के सीनियर नेता नवजोत सिंह सिद्धू और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जफ्फी पर इन दिनों पंजाब की राजनीति गरमाई हुई है। शनिवार को भी एक जनसभा में भगवंत मान ने कहा था कि देख लो जफ्फी डालने वालों का अब असली रूप सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि अब पुराना जमाना नहीं है। आजकल के युवा बहुत जागरूक हैं, पढ़े लिखे है। हर हाथ में मोबाइल फोन हैं। वह मोबाइल से पुराने वीडियो निकाल लेते हैं। पता चल चल जाता है कि पहले क्या बोलते थे और अब क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा जो दिल में है, वहीं जुबान पर होना चाहिए।
इससे पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता व लुधियाना के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने भी जफ्फी पर तंज कसा था। उन्होंने कहा कि ये दोनों ऐसे मिले जैसे 47 के बंटवारे में बिछड़े हुए हैं। पता नहीं इन दोनों में क्या डील हुई है, जो पहले 75-25 करते थे, अब क्या इनमें क्या समझौता हो गया। उन्होंने कहा कि सिद्धू की जफ्फी रिटायरमेंट का संकेत दे रही है। कांग्रेस कार्यकर्ता सिद्धू की इस हरकत से काफी निराश हैं और जनता कार्यकर्ताओं नेताओं पर विश्वास नहीं करेगी। विधानसभा में तो दोनों एक-दूसरे को गालियां निकालते थे। चुनावी रैलियों में सिद्धू एक ही बात करते थे कि मजीठिया नशा तस्कर ने पंजाब की जवानी खत्म कर दी है। लेकिन अब उनकी जफ्फी से लगता है कि सिद्धू और मजीठिया ने घुटने टेक दिए हैं।