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Punjab: ऊर्जा मंत्री आरके सिंह से मिले भगवंत मान, रेल के जरिये कोयले की सीधी आपूर्ति की उठाई मांग

Fri, 09 Dec 2022 11:46 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 09 Dec 2022 11:46 PM IST
सार

भगवंत मान ने कहा कि तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के पास एमसीएल/तलचर से 67.20 लाख टन कोयले की लिंकेज है। इस एडवाइजरी के मुताबिक तकरीबन 12-13 लाख टन कोयला आरएसआर के माध्यम से लाना पड़ेगा।

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Punjab CM Bhagwant Mann met Union Power Minister RK Singh
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह से मिलने पहुंचे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह से केंद्र सरकार के उस फैसले की समीक्षा करने की मांग की, जिसमें राज्य को मौजूदा ‘रेल-शिप-रेल’ (आरएसआर) सिस्टम से कोयले की सप्लाई करने का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से मांग की है कि पंजाब को आरएसआर के बजाय सीधा रेलवे के जरिये कोयले की 100 फीसदी सप्लाई की अनुमति दी जाए।

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केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के कार्यालय में हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊर्जा मंत्रालय ने महानदी कोलफील्ड लिमिटेड (एमसीएल/तलचर खदानों) से जनवरी 2023 से पंजाब को 15-20 प्रतिशत घरेलू कोयले की लिफ्टिंग ‘रेल-शिप-रेल’ (आरएसआर) सिस्टम से शुरू करने के लिए कहा है। 
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भगवंत मान ने कहा कि तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के पास एमसीएल/तलचर से 67.20 लाख टन कोयले की लिंकेज है। इस एडवाइजरी के मुताबिक तकरीबन 12-13 लाख टन कोयला आरएसआर के माध्यम से लाना पड़ेगा।  मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से राज्य के कोटे में से बीबीएमबी में सदस्य (पावर) की नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया। दोनों नेता बीबीएमबी के मामलों को सुचारु बनाने के लिए जल्द से जल्द सदस्य नियुक्त करने पर सहमत हुए। उन्होंने इस बात पर भी सहमति जताई कि सदस्य की नियुक्ति की समूची प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। 

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1600 रुपये प्रति टन महंगी पड़ेगी कोयले की ढुलाई
मुख्यमंत्री ने इस बात पर नाराजगी जताई कि आरएसआर सिस्टम से कोयले के पहुंच मूल्य में तकरीबन 1600 रुपये प्रति टन की बड़ी वृद्धि होगी। इससे हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बर्दाश्त करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एमसीएल और पंजाब के बीच रेल-मार्ग द्वारा दूरी तकरीबन 1900 किलोमीटर है, जबकि प्रस्तावित आरएसआर माध्यम से रेल मार्ग तकरीबन 1700-1800 किलोमीटर के साथ-साथ परादीप और मुंदरा के बीच तकरीबन 4360 किलोमीटर का अतिरिक्त समुद्री सफर पड़ेगा। 

इस कारण कोयले की कुल पहुंच लागत का 60 प्रतिशत तो ढुलाई की ही लागत हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस पर भी रोष जताया कि 1400 किलोमीटर से ज्यादा दूर स्थित ताप बिजली घरों को रेलवे द्वारा किराए में दी गई राहत 31 दिसंबर, 2021 को खत्म होने के बाद से बढ़ाई नहीं गई, जिसके चलते रेल भाड़े में एकदम वृद्धि हुई है। मान ने कहा कि आरएसआर माध्यम से कोयले की ढुलाई के दौरान लादने और उतारने के लिए कई साधन लगेंगे, जिससे ट्रांजिट नुकसान 0.8 से बढ़कर 1.4 प्रतिशत हो जाएगा। इसके अलावा ढुलाई समय रेल माध्यम के 4-5 दिन के मुकाबले तकरीबन 25 दिन का हो जाएगा।

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