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Punjab: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इजरायली कंपनी के प्रतिनिधियों से की मुलाकात, स्वच्छ पेयजल पर हुई चर्चा

Thu, 28 Jul 2022 03:47 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 28 Jul 2022 03:47 PM IST
सार

इजराइल कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात कर कंपनी के साथ मिलकर नए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। पंजाबियों को साफ पानी मुहैया करवाने के लिए मेरी सरकार वचनबद्ध हैं। 

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Punjab CM Bhagwant Mann held special meeting with representatives of Israel company Mekorot
इजरायली पदाधिकारियों से मिले सीएम भगवंत मान। - फोटो : koo

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में हो रही पानी की समस्या को लेकर इजराइल की कंपनी मीकोरोट के प्रतिनिधियों के साथ खास मुलाकात की। यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री ने अपने कू हैंडल के जरिए दी। इससे पहले मान ने मंगलवार को जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी मुलाकात कर प्रदेश में दूषित पेयजल के मुद्दे पर चर्चा की। 

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मुख्यमंत्री ने कू पोस्ट किया कि पंजाब स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। दुख की बात है कि पांच नदियों की भूमि के लोगों के पास साफ पानी नहीं है। इस संबंध में मैंने इजरायल की कंपनी मीकोरोट के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। मेरी सरकार पंजाबियों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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उन्होंने कहा कि पंज आबों की धरती के लोगों को साफ पानी न मिलना बहुत बड़ी त्रासदी है। इजराइल कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात कर कंपनी के साथ मिलकर नए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। पंजाबियों को साफ पानी मुहैया करवाने के लिए मेरी सरकार वचनबद्ध हैं। 

ग्रामीण पेयजल की स्थिति

वैसे तो पंजाब एक विकसित राज्य माना जाता है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में गरीबों का एक वर्ग कुपोषण की चपेट में है। कुपोषण की स्थिति जल प्रदूषण के प्रभाव के चलते और अधिक जटिल बन गई है। जनवरी 2020 में विश्व बैंक ने एक अध्ययन रिपोर्ट सार्वजनिक की थी, जिसमें कहा गया था कि पंजाब में कई परिवार मकान परिसर में ही निजी कुएं बना रहे हैं। ग्रामीण पंजाब में कई दशकों से बड़ी मात्रा में भूजल का दोहन होता रहा है। वहीं यहां मुफ्त बिजली की दीर्घकालिक नीति रही है। यही वजह है कि यहां घर-घर निजी उथले बोरवेल होते हैं। लेकिन, ये बोरवेल रासायनिक प्रदूषण युक्त पानी की चपेट में हैं। 



कैग की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के 23 जिलों में से 16 फ्लोराइड-युक्त, 19 नाइट्रेट-युक्त, 6 आर्सेनिक-युक्त और 9 आयरन-युक्त पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। दरअसल, हरित क्रांति ने भारत के अनाज उत्पादन को बढ़ाने में मदद की, लेकिन इसके अधिक हानिकारक प्रभावों का खामियाजा पंजाब, हरियाणा और कुछ अन्य क्षेत्रों को भुगतना पड़ा है। पंजाब देश में सबसे तेज गति से जमीन से पानी निकाल रहा है।

विश्व बैंक ने जनवरी 2020 में एक रिपोर्ट तैयार की, जिसके मुताबिक करीब 16,000 कुंओं में से, 38 प्रतिशत में उच्च फ्लोराइड, 8 प्रतिशत में उच्च से बहुत अधिक, जबकि 30 प्रतिशत निम्न से मध्यम स्तर का फ्लोराइड था। इनमें मानसा और पटियाला जिलों की स्थिति सबसे खराब है। 

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