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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab CM Amarinder Singh invites Navjot Sidhu for chai ahead of elevation ceremony

पंजाब: अगर कैप्टन न मानते तो फीकी रहती सिद्धू की ताजपोशी, पार्टी में होती गुटबाजी, हाईकमान की होती किरकिरी

Fri, 23 Jul 2021 04:26 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 23 Jul 2021 04:26 AM IST
सार

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर अपने रूख में कुछ नरमी बरती है। शुक्रवार को सिद्धू के कार्यभार ग्रहण से ठीक पहले कैप्टन ने उन्हें चाय पर बुलाया है। इसके बाद कैप्टन सिद्धू के कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।  
 

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Punjab CM Amarinder Singh invites Navjot Sidhu for chai ahead of elevation ceremony
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : फाइल

विस्तार

नवजोत सिंह सिद्धू भले ही विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के दल-बल के साथ शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह अगर समारोह में आने से इनकार कर देते तो शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस प्रधान पद पर सिद्धू की ताजपोशी फीकी रह जाती। सिद्धू की माफी के बगैर कैप्टन के इस कदम को लेकर माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान के आदेश पर कैप्टन को सिद्धू का न्योता स्वीकार करना पड़ा है। 

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सिद्धू के समर्थक कांग्रेसी इसे कैप्टन का पार्टी में कमजोर होना भी मान रहे हैं। वहीं, कैप्टन ने इस मामले में अपनी जिद छोड़कर साबित कर दिया कि वे पार्टी की गरिमा बनाए रखने के लिए किसी भी निजी मत को आड़े नहीं आने देंगे।
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यह पूरा विवाद जोकि अब समाप्ति के करीब पहुंचने लगा है, कैप्टन ने अनुभवी और सुलझे हुए राजनीतिज्ञ के रूप में स्पष्ट कर दिया कि पंजाब में कांग्रेस के कप्तान वहीं हैं, जबकि नवजोत सिद्धू ने नए और हठी खिलाड़ी के रूप में अपने शक्ति प्रदर्शन के दौरान न सिर्फ कैप्टन को अनदेखा किया, बल्कि उनसे माफी मांगने को लेकर भी चुप्पी साधे रखी। हालांकि परंपरा के अनुसार सिद्धू को अपनी नियुक्ति का एलान होते ही अन्य विधायकों से मेल-मिलाप बढ़ाने से पहले विधायक दल के नेता से मिलना चाहिए था। साथ ही राजनेता के तौर पर कैप्टन के साथ अपने मनमुटाव भी दूर करने चाहिए थे।
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यह कैप्टन की ही सूझबूझ है कि शुक्रवार को अगर प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता एक मंच पर न आते तो सीधे तौर पर पंजाब कांग्रेस दो धड़ों में बंट जाती। दूसरी ओर, पार्टी हाईकमान की भी किरकिरी होती क्योंकि सिद्धू को प्रदेश प्रधान बनाने का एलान सीधे तौर पर हाईकमान ने कैप्टन व पंजाब के अन्य कांग्रेसी नेताओं की सलाह के बिना लिया है। सीनियर नेता और अनेक मंत्री-विधायक कैप्टन के साथ होते और नए अध्यक्ष के रूप में नवजोत सिद्धू के कार्यकाल का ज्यादातर हिस्सा विधायक-बल जुटाने की कवायद में ही बीत जाता। 


तो सिद्धू का कद ही घटेगा
शुक्रवार को जब पंजाब कांग्रेस भवन में बनाए गए मंच पर कैप्टन भी मौजूद होंगे तो सिद्धू के लिए यह आवश्यक होगा कि वे पार्टी विधायकों और सीनियर नेताओं के सामने यह एलान करें कि उनका कैप्टन के साथ किसी तरह का मनमुटाव नहीं है और वे पार्टी हित में मिलकर कार्य करेंगे। वैसे सिद्धू के स्वभाव को देखते हुए इतना भी मुश्किल नजर आ रहा है लेकिन सिद्धू अगर कैप्टन से खिंचे-खिंचे रहे तो इससे कैप्टन का नहीं बल्कि सिद्धू का कद ही घटेगा।

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