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पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक पांचवीं बार स्थगित, आबकारी नीति को लेकर आज होगी मीटिंग

Thu, 30 Jan 2020 11:20 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 30 Jan 2020 11:20 PM IST
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Punjab cabinet meeting today, new education policy will be discussed
पंजाब कैबिनेट की बैठक। - फोटो : फाइल फोटो

पंजाब के वर्ष 2020-21 के आगामी बजट की तैयारियों से पहले राज्य मंत्रिमंडल की गुरुवार 30 जनवरी को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। अब यह बैठक 31 जनवरी को पंजाब भवन के कमेटी रूम में दोपहर तीन बजे बुलाई गई है। लेकिन यह भी जानकारी मिली है कि नई एक्साइज पॉलिसी को मंत्रिमंडल की बैठक में पेश करने के उद्देश्य से बैठक एक दिन के लिए स्थगित की गई। शुक्रवार को होने वाली बैठक में बाकी एजेंडा पूर्व निर्धारित ही रहेगा। इस बैठक में, फरवरी माह के दौरान बुलाए जाने वाले विधानसभा के बजट सत्र के एजेंडे पर भी चर्चा होगी।

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गौरतलब कि इस महीने पंजाब विधानसभा से विशेष सत्र के बाद से बुलाई जाने वाली इस बैठक को अब तक पांच बार स्थगित किया गया है। गुरुवार को इस संबंध में मुख्य सचिव करण अवतार सिंह की ओर से जारी नोटिस में बैठक स्थगित किए जाने की जानकारी दी गई। उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि बैठक का जो एजेंडा 30 जनवरी की बैठक के लिए तय किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। गुरुवार की बैठक में प्रदेश की शिक्षा नीति के अलावा दो प्रमुख विभागों के पुनर्गठन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा तय थी। 
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वहीं बजट से पहले राज्य की वित्तीय हालत पर चिंतन भी सरकार के लिए प्रमुख एजेंडा बन गया है। पता चला है कि मंत्रिमंडल की बैठक में पेश की जा रही शिक्षा नीति के तहत राज्य सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्ले-ग्राउंड का उपयोग शिक्षा विभाग की आमदन बढ़ाने के लिए करने जा रही है। इसके तहत स्कूलों के मैदानों को क्लबों, खेल अकादमियों, सांस्कृतिक आयोजनों आदि के लिए किराए पर दिया जाएगा।

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एक्साइज पॉलिसी पर टिकी उम्मीदें

पंजाब में शराब सभी पड़ोसी राज्यों के मुकाबले सबसे महंगी है लेकिन हैरानी की बात यह भी है कि महंगी शराब बेचकर भी राज्य सरकार को आमदनी नहीं हो रही। 2019-20 के बजट से पहले सरकार ने एक्साइज पॉलिसी के तहत जो फैसले लिए, उनसे राजस्व बढ़ने की भारी उम्मीद लगाई गई थी। चालू वित्त वर्ष के लिए एक्साइज राजस्व का लक्ष्य भी 6201 करोड़ रुपये तय किया गया था लेकिन यह पॉलिसी सरकार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। 

दिसंबर 2019 तक पंजाब सरकार की शराब से आमदन में केवल 0.4 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ है। इससे पहले 30 नवंबर 2019 तक सरकार को शराब की बिक्री से 3300 करोड़ रुपये प्राप्त हुए जो वार्षिक लक्ष्य का 52 फीसदी है और वित्त वर्ष की केवल एक तिमाही शेष है। 2018-19 के दौरान सरकार ने एक्साइज से राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य 5700 करोड़ रुपये तय किया था और उसे कुल 5150 करोड़ रुपये हासिल हुए थे। वैसे एक्साइज आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने बार और शराब परोसने वाले होटलों पर 14.3 फीसदी वैट लगाया, जिससे 30 नवबर 2019 तक 20 करोड़ की आमदनी हुई।

पंजाब सरकार की आमदनी में गिरावट
एक तरफ, राज्य सरकार को वर्ष 2020-21 के लिए बजट तैयार करना है वहीं वित्त विभाग के फिस्कल इंडीकेटर राज्य की वित्तीय हालत को पूरी तरह चरमराया हुआ दिखा रहे हैं। बजट के लिए अभी तक राज्य के सरकारी विभागों ने अपने अनुमान वित्त विभाग को नहीं सौंपे हैं। वहीं, आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों के दौरान पंजाब सरकार का कर और गैर-कर राजस्व कलेक्शन घटकर महज 5139 करोड़ रह गया है। 

दिसंबर 2019 तक सरकार का कर राजस्व पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 5139 करोड़ से घटकर 3612 करोड़ और गैर-कर राजस्व घटकर 1527 करोड़ रह गया है। इसे वार्षिक आमदनी के रूप में देखा जाए तो वर्ष 2019-20 के आम बजट में सरकार ने राजस्व प्राप्ति के जो अनुमान लक्ष्य तय किए थे, उनकी आधी कमाई भी दिसंबर तक नहीं हुई है। 

सरकार ने कर राजस्व का वार्षिक अनुमान 50993 करोड़ रुपये लगाया था लेकिन दिसंबर तक प्राप्ति केवल 27190 करोड़ यानी 53 फीसदी है जबकि गैर-कर राजस्व भी दिसंबर तक की तीन तिमाहियों के अनुमान 9476 करोड़ के मुकाबले केवल 2919 करोड़ (30 फीसदी) ही हासिल हुआ है।

कर्ज जाल में बुरी तरह फंस गया पंजाब
पंजाब सरकार कर्ज के जाल में इतनी बुरी तरह फंस चुकी है कि उसे अपने पहले से लिए कर्ज और उसका ब्याज चुकाने के लिए भी अब बाजार से और कर्ज उठाना पड़ रहा है। कर्ज लेकर कर्ज चुकाने की व्यवस्था ने सरकार के लिए अपनी प्रतिबद्ध जिम्मेदारियों का निर्वाह करना भी मुश्किल हो गया है। 

कर्ज, ब्याज, वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर ब्याज जैसी मदों में इतना पैसा जा रहा है, जितनी सरकार की आय भी नहीं है। राज्य सरकार को वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तीन तिमाहियों में 8,335 करोड़ रुपये का बाजार कर्ज लिया क्योंकि उसे अपने पहले कर्ज के ब्याज के रूप में 9,280 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। 

इस भुगतान में प्रति 270 करोड़ रुपये की वह राशि भी है, जो राज्य सरकार को खाद्य ऋण के रूप में केंद्र सरकार से विरासत में मिले 31,000 करोड़ रुपये के एवज में चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं, बीते वित्त वर्ष के मुकाबले ब्याज अदायगी की रकम में भी इजाफा हो गया है। सब्सिडी की राशि चुकाने के मामले में भी सरकार मुश्किल में है। 

चालू वित्त वर्ष में सरकार अब तक सब्सिडी के 3731 करोड़ रुपये ही चुका सकी है जबकि यह कुल राशि 8000 करोड़ के आसपास पहुंचती है। इसके अलावा, वेतन-पेंशन पर भी सरकार का खर्च बढ़ा है। वर्ष 2018-19 के दौरान 15204 करोड़ रुपये वेतन-पेंशन पर खर्च किए जाने के मुकाबले 2019-20 में 15825 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।

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