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गुड न्यूजः फिर शुरू होगी किला रायपुर की प्रसिद्ध बैलगाड़ी दौड़, पंजाब कैबिनेट के 3 अन्य फैसले

Mon, 18 Feb 2019 09:57 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 18 Feb 2019 09:57 AM IST
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Punjab Cabinet Decision on Bullock Cart Race in Kila Raipur Ludhiana Sports Festival
कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो
लुधियाना के पास गांव किला रायपुर की प्रसिद्ध बैलगाड़ी दौड़ दोबारा शुरू होगी। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में हुई कैबिनेट की मीटिंग में दौड़ शुरू करवाने को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट ने बजट सत्र के दौरान प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टु एनिमल्स (पंजाब संशोधन) बिल को कानून बनाने के लिए पेश करने को स्वीकृति दी। बैलगाड़ी दौर पंजाब समृद्ध विरासत का हिस्सा रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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बैलगाड़ी दौड़ दोबारा शुरू करवाने के लिए राज्य के तमाम संगठनों ने राज्यपाल, सीएम और पशुपालन मंत्री को ज्ञापन सौंपे थे। कैबिनेट ने पिछले साल अक्तूबर की मीटिंग में इस पर विचार-विमर्श किया था और किला रायपुर खेल को कानूनी तौर पर आज्ञा देने को कानून बनाने के हक में राय दी थी। इन खेलों में बैलगाड़ी दौड़ के अलावा कई और पशु भी हिस्सा लेते हैं।
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गौरतलब है कि यह कानून पशुओं पर क्रूरता रोकने को बनाया गया था। इस एक्ट में विशेष हालात में इसकी व्यवस्थाओं को अमल में लाने से छूट देने की जरूरत को भी मान्यता दी गई है। राज्य सरकार ने 1960 के सेंट्रल एक्ट की व्यवस्थाओं से किला रायपुर ग्रामीण खेल में बैलगाड़ी दौड़ करवाने से छूट देने का फैसला लिया है।
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परंपरागत ग्रामीण खेलों और मेलों द्वारा निभाई अहम भूमिका के कारण ऐसा किया गया है। किला रायपुर में 1930 से यह खेल चल रहे हैं, जो खेल भावना को बढ़ाते हैं। सरकार महसूस करती है कि खेल संस्कृति, विरासत और पंजाब की परंपरा को समृद्ध बनाते हैं। ये ग्रामीण पंजाब में मनोरंजन का बड़ा स्रोत हैं।

अत्याचारों के कारण लगी थी पाबंदी
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के स्टेट अफसर डॉ. संदीप जैन ने कहा कि पशुपालक दौड़ में जीत केलिए ट्रेनिंग के दौरान डर और लालच देते थे। बैलों को शराब पिलाई जाती थी, नशे के टीके लगाए जाते थे और मारा जाता था। वर्ष 2000 में भेड़ों की लड़ाई में एक की मौत के बाद मेनका गांधी के दबाव में जिला प्रशासन ने किला रायपुर खेलों पर पाबंदी लगाई थी। उसके बाद ये फिर श्रुरू हो गए। 2014 में सुप्रीम कोर्ट में बैन लगा दिया। हालांकि कैबिनेट ने एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बैलों के साथ क्रूरता न हो।

पंजाब के मेडिकल कॉलेजों में दूर होगी टीचरों की किल्लत

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में टीचरों की किल्लत जल्द दूर हो सकेगी। कैबिनेट ने पटियाला और अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीधे कोटे के 153 पद भरने को हरी झंडी दे दी है। इनमें 42 प्रोफेसर, 46 एसोसिएट प्रोफेसर और 65 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद हैं। ये पद पीजीआई के पूर्व डायरेक्टर डॉ. केके तलवाड़ की अगुवाई वाली कमेटी भरेगी।

इन्हें पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के दायरे से बाहर कर पंजाब मेडिकल एजुकेशन (ग्रुप ए) सर्विस रूल्स 2016 के अधीन भरा जाएगा। पंजाब के सेहत व मेडिकल एजुकेशन सलाहकार डॉ. तलवाड़ा की अगुवाई में कमेटी 22 अप्रैल 2016 को गठित की गई थी। 22 अप्रैल 2019 को इसे तीन साल की एक्सटेंशन दे दी गई है। कमेटी के सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई है।

पहले इसमें बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के वीसी, मेडिकल एजुकेशन व रिसर्च विभाग के सचिव, पीजीआई के डायरेक्टर या उनके प्रतिनिधि, टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई के डायरेक्टर या उनके कैंसर माहिर प्रतिनिधि और एम्स, पीजीआई, टीएमसी जैसी संस्थाओं के संबंधित विषय के दो मेंबर शामिल थे। मेडिकल एजुकेशन व रिसर्च के डायरेक्टर मेंबर सचिव थे।

अब कल्याण विभाग का एक प्रतिनिधि भी शामिल होगा। कमेटी ने दोनों मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ, एमबीबीएस की सीटों और बेड की संख्या का जायजा लिया। जिसके बाद सीधे कोटे के 153 पद भरने की आज्ञा दी। कमेटी ने सिफारिश की है कि अगर सभी पद एक बार में नहीं भरे जाते हैं तो विभाग बार-बार प्रयास करता रहे। साथ ही कहा है कि भविष्य में रिटायरमेंट के बाद खाली होने वाले पद वित्त्त विभाग और ऑफिसर्स कमेटी में जाए बगैर ही भर लिए जाएं।

अब ऑनलाइन बोली से होंगे ट्रांसपोर्ट ठेके

फूड सप्लाई विभाग ने पिछले गेहूं खरीद सीजन में ट्रांसपोर्टरों का गठजोड़ तोड़ने में कामयाबी हासिल की की। इसी कड़ी में अब से खरीद सीजन के दौरान ट्रांसपोर्टेशन की बोली ऑनलाइन ही लगाई जाएगी। पंजाब कैबिनेट ने द पंजाब फूड ग्रेन्स ट्रांसपोर्टेशन पॉलिसी 2019 को मंजूरी दी है। जिससे मंडियों से स्टोरेज वाले स्थानों तक अनाज की ढुलाई कम से कम रेट में सुनिश्चित करेगी। साथ ही खरीद में कुशलता और पारदर्शिता आएगी।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एक अप्रैल से शुरू हो रहे गेहूं खरीद सीजन आठ किलोमीटर से अधिक दूरी तक अनाज ढुलाई की आज्ञा प्रतियोगी ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया द्वारा दी जाएगी। इसका संचालन डिप्टी कमिश्नर की अगुवाई में बनी जिला टेंडर कमेटी करेगी। इसमें जिला एफसीआई हेड, राज्य की खरीद एजेंसियों के जिला प्रमुख व जिला फूड सप्लाई कंट्रोलर मेंबर होंगे।

नई नीति के तहत 2019-20 के लिए टेंडर मांगे जाएंगे, जो 31 मार्च 2020 तक वैध होंगे। इस नीति में निश्चित प्रतियोगी दरों, विस्तृत अनुसूची (एसओआर) दरों के दिशा-निर्देश शामिल किए गए हैं। आठ से 52 किलोमीटर तक प्रति मीट्रिक टन की दर से दरों की सूची दिखाई गई है। जबकि, 52 किलोमीटर के बाद हरेक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए दरें 3.10 रुपये प्रति टन के हिसाब से लागू होंगी।

एसओआर में दर्शायी दरों के 120 प्रतिशत के बाद कोई प्रीमियम नहीं होगा। जिलास्तरीय कमेटी के पास टेंडर खोलने, तकनीकी बोलियों का मूल्यांकन करने और वित्तीय बोलियों को अंतिम रूप देने के अधिकार होंगे। अनाज ढुलाई पर कम से कम खर्च सुनिश्चित करने को क्लस्टर-वार टेंडर मांगे जाएंगे।

खरीद से संबंधित सेवा, कार्य को रद्द करने, पेनल्टी और ब्लैक लिस्टिंग संबंधित जानकारी को नीति का हिस्सा बनाया गया है। कमेटी को अधिकार दिया गया है कि वह दो साल के समय तक अधूरे ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने के अलावा सिक्योरिटी भी जब्त कर सकती है। ठेके की कीमत का दो प्रतिशत तक जुर्माना भी लगा सकती है।

हाईकोर्ट के जजों को मिलेगी एयर एंबुलेंस की सुविधा

पंजाब कैबिनेट ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के मौजूदा व रिटायर्ड जजों और उनके आश्रितों को एयर एंबुलेंस की सेवा देने को मंजूरी दी है। इस संबंध में पंजाब सेवाएं (मेडिकल अटेंडेंट्स) नियमों में जरूरी संशोधन को स्वीकृति दी गई, जिसके अधीन सरकारी मुलाजिम आते हैं। हाईकोर्ट के जजों सहित अदालत के मुलाजिम, जिन्होंने पंजाब सरकार के नियमों को अपनाया है, को मेडिकल री-एंबर्समेंट यूटी प्रशासन द्वारा दी जाती है। गौरतलब है कि 28 जनवरी 2019 को हाईकोर्ट में हुई मीटिंग के दौरान चीफ जस्टिस व अन्य जजों ने नियमों में संशोधन की मांग की थी, ताकि जजों को एयर एंबुलेंस की सुविधा दी जा सके।
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