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पंजाब: सिद्धू के आगे झुकी चन्नी सरकार, महाधिवक्ता एपीएस देओल का इस्तीफा मंजूर किया

Tue, 09 Nov 2021 05:43 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 09 Nov 2021 05:43 PM IST
सार

पंजाब के महाधिवक्ता एपीएस देओल की जगह नई नियुक्ति होगी। मंगलवार को पंजाब कैबिनेट ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू देओल की नियुक्ति का लगातार विरोध कर रहे थे। 

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Punjab Cabinet accepted the resignation of Attorney General APS Deol
पंजाब सीएम चरणजीत सिंह चन्नी। - फोटो : एएनआई

विस्तार

पंजाब प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने के बाद से लगातार प्रयासरत नवजोत सिंह सिद्धू आखिरकार चरणजीत सिंह चन्नी सरकार पर हावी हो ही गए। मुख्यमंत्री ने नवजोत सिद्धू द्वारा उठाई जा रही, एजी और डीजीपी को हटाने की मांग को मानते हुए एडवोकेट जनरल एपीएस देओल का इस्तीफा मंजूर कर लिया। 

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वहीं, डीजीपी के पद पर तैनात इकबाल प्रीत सिंह सहोता को हटाने की सिद्धू की मांग को भी मानते हुए एलान किया कि यूपीएससी से पैनल मिलते ही नए डीजीपी की नियुक्ति की जाएगी। मंगलवार को पंजाब कैबिनेट की बैठक से पहले मुख्यमंत्री चन्नी और सिद्धू के बीच लगातार दूसरे दिन सुलह बैठक हुई, जिसके नतीजे के तौर पर फैसले सामने आए हैं। 
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कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री के साथ सिद्धू भी मौजूद रहे और वह उत्साहित दिखाई दे रहे थे। हालांकि उन्होंने चन्नी सरकार द्वारा रेत के दाम तय करने के फैसले का स्वागत किया लेकिन इसके साथ ही यह ताकीद भी कर दी कि सरकार को यह दाम और उससे होने वाली आय को बनाए रखना होगा। वहीं चन्नी के हावभाव से साफ दिखाई दे रहा था कि वह खुश नहीं हैं।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने बताया कि अटॉर्नी जनरल एपीएस देओल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, जो कुछ दिन पहले ही उन्हें सौंपा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस पद पर जल्दी ही नई नियुक्ति कर दी जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी एलान किया कि पंजाब पुलिस के डीजीपी पद पर नई नियुक्ति भी यूपीएससी से पैनल मिलते ही कर दी जाएगी। 

उन्होंने कहा कि डीजीपी पद के लिए 30 साल तक नौकरी कर चुके अफसरों के नाम केंद्र को भेजे गए हैं। केंद्र से इन नामों के संबंध में फाइनल पैनल भेजे जाने के बाद नए डीजीपी की नियुक्ति कर दी जाएगी। इस समय इकबाल प्रीत सिंह सहोता कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्य संभाल रहे हैं। खास बात यह है कि यह दोनों नियुक्तियां मुख्यमंत्री चन्नी ने अपनी पसंद से की थीं लेकिन नवजोत सिद्धू ने दोनों अधिकारियों का विरोध करते हुए प्रदेश प्रधान पद से इस्तीफा तक दे दिया था।

मैं रहूंगा या डीजीपी और एजी, जिद पर अड़े रहे सिद्धू
सोमवार को बेनतीजा रही चन्नी और सिद्धू के बीच बैठक का मुख्य कारण सामने आया है कि नवजोत सिद्धू ने बैठक में हरीश चौधरी की मौजूदगी में साफ कर दिया था कि या तो वह रहेंगे या डीजीपी (सहोता) और एजी (देओल)। सिद्धू के इस तरह सरकार के कामकाज में सीधे दखल से मुख्यमंत्री चन्नी काफी नाराज हुए थे और सिद्धू बैठक अधूरी छोड़कर बाहर आ गए थे। तब हरीश चौधरी ने चन्नी के मनाने की कोशिश की और बैठक के पूरे घटनाक्रम की जानकारी हाईकमान को भी दी। 

सूत्रों के अनुसार सोमवार को चन्नी भी इस बात पर अड़ गए कि वह सिद्धू को सरकार के कामकाज में दखल नहीं देने देंगे लेकिन मंगलवार को हालात बदले दिखाई दिए, जब चन्नी ने सिद्धू को लेकर पूरी तरह चुप्पी साध ली और नपे-तुले शब्दों में एजी को हटाने और नए डीजीपी की नियुक्ति का एलान किया। माना जा रहा है कि हाईकमान भी सिद्धू की जिद के आगे झुक गया, जिससे चन्नी बहुत आहत हुए हैं।

सिद्धू ने ट्वीट कर एसआईटी के स्टेटस पर उठाए सवाल
बेअदबी और नशे के मुद्दे को हल करने की लगातार मांग उठा रहे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्य के चरणजीत सिंह चन्नी सरकार पर दबाव बढ़ाने की अपनी नीति को जारी रखा है। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन्हीं मुद्दों को लेकर चन्नी सरकार पर निशाना साधने के बाद मंगलवार को सिद्धू ने ट्वीट कर नए सिरे से घटनाक्रम याद दिलाया। 

सिद्धू ने ट्वीट किया कि 9 अप्रैल 2021 को हाईकोर्ट ने नई एसआईटी को छह महीने में जांच पूरी करने के निर्देश दिए। 7 मई 2021 को नई एसआईटी का गठन किया गया। 7 नवंबर 2021 को नई एसआईटी को छह माह पूरे गए। लेकिन जांच की मौजूदा स्थिति क्या है? चार्जशीट कहां है?

पंजाब कैबिनेट ने इन प्रस्तावों को भी दी मंजूरी
किसानों को सजा देने वाला एक्ट रद्द: द पंजाब कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट-2013 में उत्पादकों, किसानों के लिए जेल की सजा का प्रावधान, वित्तीय जुर्माना और अन्य सख्त उपबंध दर्ज होने के कारण किसानों के मन में डर और दुविधा के मद्देनजर मंत्रिमंडल ने इस एक्ट को रद्द कर दिया है।

पंजाब कृषि उपज मंडियां एक्ट-1961 में संशोधन मंजूर: कृषि सुरक्षा को बहाल करने और किसानों, खेत मजदूरों और सहायक और आकस्मिक गतिविधियों में जुटे लोगों के हितों की रक्षा के लिए मंत्रिमंडल ने पंजाब एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट एक्ट-1961 के किसान विरोधी उपबंधों को हटाने के लिए हरी झंडी दे दी।

पंजाब फ्रूट नर्सरी एक्ट-1961 में संशोधन को मंजूरी: मंत्रिमंडल ने पंजाब फ्रूट नर्सरी एक्ट-1961 में संशोधन कर पंजाब हार्टिकल्चरल नर्सरी बिल-2021 विधानसभा में लाने की मंजूरी दे दी है। अब तक यह एक्ट सिर्फ फलदार पौधों की नर्सरी के लिए लागू था। प्रस्तावित संशोधनों से सब्जियों के पौधे लगाने के लिए सामग्री भी इसके अंतर्गत आ जाएगी, जिससे काश्तकारों को बेहतर रोपण सामग्री मिल सकेगी। पंजाब में मौजूदा समय में लगभग 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल फलों और सब्जियों के अधीन है, जिसके लिए पौधे लगाने के लिए मानक सामग्री की मांग बढ़ रही है।

पंजाब (इंस्टीट्यूट एंड अदर बिल्डिंग) टैक्स एक्ट-2011 रद्द: मंत्रिमंडल ने पंजाब (इंस्टीट्यूट एंड अदर बिल्डिंग टैक्स रिपील एक्ट-2011 को विधानसभा के मौजूदा सत्र में लाने की मंजूरी दे दी, ताकि सभी मामलों में बकाया राशि को माफ किया जा सके। उल्लेखनीय है कि पंजाब (इंस्टीट्यूट एंड अदर बिल्डिंग) टैक्स एक्ट म्यूनिसिपल हद से बाहर पड़ने वालीं औद्योगिक इकाइयां और संस्थागत इमारतों के लिए लागू किया गया था। इस फैसले से लाभार्थियों को 250 करोड़ की राहत मिलेगी।

आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना की रूपरेखा को मंजूरी: मंत्रिमंडल ने आयुष्मान भारत - मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना को सार्वभौमिक बनाने की मंजूरी दे दी। इसके तहत राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनरों को छोड़कर पंजाब की समूची आबादी को 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष का बीमा प्रदान किया जाएगा। इस फैसले से 61 लाख परिवारों को लाभ होगा। बाकी परिवारों की रजिस्ट्रेशन के आधार की प्रामाणिकता की जाएगी और फार्म सूचीबद्ध अस्पतालों, कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी) और सुविधा केंद्रों पर उपलब्ध होंगे, जहां बीआईएस पोर्टल द्वारा ई-कार्ड जारी करने की सुविधा उपलब्ध है। लाभार्थी को आधार कार्ड और रिहायश का सुबूत जैसे कि बिजली का बिल, पानी का बिल, पासपोर्ट या कोई भी सरकारी दस्तावेज/आईडी/सर्टिफिकेट, जिसमें रिहायश का पता हो, अपने साथ रखने की जरूरत होगी, जिससे वह अपने आप को रजिस्टर करवा कर ई-कार्ड जारी करवा सके और स्कीम के अधीन नकद रहित इलाज का लाभ ले सकें।

इमारतों में नॉन-कंपाउंडेबल उल्लंघन के एकमुश्त निपटारे को मंजूरी: मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर, 2021 तक सभी अनाधिकृत रूप से हुए निर्माण के लिए द पंजाब वन-टाइम वालंटरी डिस्कलोजर एंड सेटलमेंट ऑफ वॉयलेशन ऑफ बिल्डिंग बिल, 2021 को लागू करने की मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य उल्लंघन करने वालों को म्यूनिसिपल क्षेत्रों के अंदर एक बार का मौका प्रदान करना है, जिन्होंने लोगों की सुरक्षा और सुविधा के साथ समझौता किए बिना रेगुलराइजेशन की इमारतों के साथ कंपाउंडेबल उल्लंघन किया है। हालांकि कंपाउंडेबल फीस में भी 25 प्रतिशत की कटौती की गई है।

कुशल श्रमिकों का न्यूनतम मेहनताना बढ़कर 9192.72 रुपये हुआ: मंत्रिमंडल ने न्यूनतम मेहनताना एक्ट-1948 के उपबंधों के अनुसार 1 मार्च, 2020 और 1 सितंबर, 2020 से न्यूनतम मेहनताने में वृद्धि और इस एक्ट की धाराओं के अधीन गठित किए गए पंजाब मिनिमम वेजिज एडवाइजरी बोर्ड के फैसले के बाद 1 मार्च, 2020 और 1 सितंबर, 2020 से मेहनताने में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इससे कर्मचारी को अच्छी नौकरी की संतुष्टी भी मिलेगी और उसकी उत्पादकता में विस्तार होने के साथ साथ रोजगारदाता के साथ संबंधों में सुधार होगा। सीपीआई पर आधारित न्यूनतम मेहनताने को अब संशोधित कर 8776.83 रुपये से 9192.72 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह न्यूनतम मेहनताने में वृद्धि से कर्मचारी 1 मार्च, 2020 से अक्तूबर, 2021 तक 8251 रुपये के बकाए का हकदार होगा।

पंजाब वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन एक्ट, 2003 में संशोधन: भारत सरकार द्वारा मंजूर वित्तीय वर्ष 2021 -22 में अनुमानित जीएसडीपी की 4 फीसदी सामान्य शुद्ध उधार सीमा का लाभ लेने के लिए मंत्रिमंडल ने पंजाब वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन एक्ट, 2003 की धारा 4, उप-धारा (2) और क्लॉज (ए)में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है। अनुमानित जीएसडीपी के 4 फीसदी की इस सामान्य शुद्ध उधार सीमा में से राज्यों को वित्तीय वर्ष 2021 -22 के शुरुआत में जीएसडीपी के 3.50 फीसदी के आधार पर उधार लेने की अनुमति दी जाएगी। राज्यों द्वारा 2021-22 के दौरान निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध किये गए पूंजी खर्च के आधार पर राज्यों को जीएसडीपी के 0.50 फीसदी की बाकी उधार सीमा की अनुमति दी जाएगी।

पंजाब एनर्जी सेफ्टी, बिजली खरीद समझौते रद्द करने और पावर टैरिफ बिल, 2021 के निर्धारण को मंजूरी: मंत्रिमंडल ने पंजाब एनर्जी सेफ्टी, बिजली खरीद समझौते रद्द करने और पावर टैरिफ बिल, 2021 के पुन:निर्धारण को मंजूरी दे दी है। इसे विधानसभा के मौजूदा सत्र में लाया जाएगा।

पंजाब नवीकरणीय ऊर्जा सुरक्षा, सुधार, रद्द करने और बिजली दरों फिर-निर्धारण बिल -2021 को मंजूरी: राज्य के बिजली क्षेत्र में टिकाऊ विकास के लिए उचित कदम उठाने और उपभोक्ताओं को वाजिब कीमतें और स्थिरता से बिजली मुहैया करवाने के योग्य बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने पंजाब नवीकरणीय ऊर्जा सुरक्षा, सुधार रद्द करने और बिजली दरों बिल के फिर से निर्धारण संबंधित बिल -2021 को विधानसभा के जारी सत्र में लाने की मंजूरी दे दी है।

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