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पंजाब उपचुनावः कांग्रेस के लिए बने सेमी फाइनल, लोकसभा चुनाव में चारों हलकों में हारी थी पार्टी
Mon, 23 Sep 2019 11:33 AM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 23 Sep 2019 11:33 AM IST
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पंजाब कांग्रेस
- फोटो : amarujala
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अपना आधा कार्यकाल पूरा कर रही कांग्रेस सरकार के लिए चार उप चुनाव को सेमी फाइनल माना जा रहा है। एक साथ चार उप चुनाव ने पार्टी को मुसीबत में डाल दिया है। वहीं, सरकार की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। चुनाव आयोग ने 21 अक्तूबर को मुकेरियां, फगवाड़ा, दाखा और जलालाबाद में उप चुनाव करवाने का एलान किया है। चारों सीटें जीतना सत्ताधारी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। मुकेरियां को छोड़ कर बाकी सभी सीटें पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव में हारी थी। जबकि, इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी इन चारों हलकों में हारी थी।
इस तरह समीकरण फिलहाल कांग्रेस के पक्ष में नहीं हैं। सबसे बड़ी मुुश्किल एक साथ चार चुनाव लड़ना है। सरकारों के लिए एक उप चुनाव जीतना कोई मुश्किल नहीं होता। इससे पहले भी उप चुनाव के दौरान एक हलके को विभिन्न जोन में बांट कर सभी मंत्रियों को जिम्मेदारी दे दी जाती थी। वे अपने-अपने जोन में पूरा जोर लगाते थे, सरकार की ताकत भी होती थी और चुनाव जीत लिया जाता था। लेकिन चार चुनाव के कारण ताकत बंट जाएगी। कांग्रेस के लिए दूसरी मुश्किल यह है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी लंबे समय से ठप पड़ी है।
प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ अपने चुनाव के चलते लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रहे। इस्तीफा अस्वीकार होने पर पिछले दिनों लंबे समय बाद उन्होंने पार्टी की मीटिंग बुलाई थी। उप चुनाव से पहले इतने कम समय में वर्करों को मोबिलाइज करना भी चुनौती होगी। जलालाबाद और फगवाड़ा में कांग्रेस को जबरदस्त टक्कर मिलने की उम्मीद है। ऐसे में अगर एक भी सीट पार्टी हारती है तो मिशन 2022 के मंसूबों पर उसका बुरा असर पड़ेगा।
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इस तरह समीकरण फिलहाल कांग्रेस के पक्ष में नहीं हैं। सबसे बड़ी मुुश्किल एक साथ चार चुनाव लड़ना है। सरकारों के लिए एक उप चुनाव जीतना कोई मुश्किल नहीं होता। इससे पहले भी उप चुनाव के दौरान एक हलके को विभिन्न जोन में बांट कर सभी मंत्रियों को जिम्मेदारी दे दी जाती थी। वे अपने-अपने जोन में पूरा जोर लगाते थे, सरकार की ताकत भी होती थी और चुनाव जीत लिया जाता था। लेकिन चार चुनाव के कारण ताकत बंट जाएगी। कांग्रेस के लिए दूसरी मुश्किल यह है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी लंबे समय से ठप पड़ी है।
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प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ अपने चुनाव के चलते लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रहे। इस्तीफा अस्वीकार होने पर पिछले दिनों लंबे समय बाद उन्होंने पार्टी की मीटिंग बुलाई थी। उप चुनाव से पहले इतने कम समय में वर्करों को मोबिलाइज करना भी चुनौती होगी। जलालाबाद और फगवाड़ा में कांग्रेस को जबरदस्त टक्कर मिलने की उम्मीद है। ऐसे में अगर एक भी सीट पार्टी हारती है तो मिशन 2022 के मंसूबों पर उसका बुरा असर पड़ेगा।
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सीएम के दो ओएसडी के बीच टिकट की जंग
उप चुनाव के एलान के साथ ही टिकट के दावेदारों ने दौड़ तेज कर दी है। सबसे दिलचस्प मुकाबला दाखा हलके में है। यहां टिकट के लिए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के दो ओएसडी कैप्टन संदीप संदू और दमनजीत मोही के बीच जंग छिड़ी है। मेजर सिंह भैणी भी दावा जता रहे हैं। जलालाबाद से टिकट के कई दावेदार हैं।
पुराने दिग्गजों हंसराज जोसन व मोहन सिंह फल्लियांवाला को रविंदर आंवला और गोल्डी कंबोज से चुनौती मिल रही है। पार्टी यहां से राय सि चेहरे की तलाश में है। फगवाड़ा से पुराने दिग्गजों जोगिंदर मान व रानी बलबीर सोढी के मुकाबले आईएएस बलदेव धालीवाल का नाम है। पार्टी यहां से किसी नए चेहरे को उतारने के मूड में है। मुकेरियां से टिकट स्व. रजनीश बब्बी के परिवार को ही जाना तय है।
पुराने दिग्गजों हंसराज जोसन व मोहन सिंह फल्लियांवाला को रविंदर आंवला और गोल्डी कंबोज से चुनौती मिल रही है। पार्टी यहां से राय सि चेहरे की तलाश में है। फगवाड़ा से पुराने दिग्गजों जोगिंदर मान व रानी बलबीर सोढी के मुकाबले आईएएस बलदेव धालीवाल का नाम है। पार्टी यहां से किसी नए चेहरे को उतारने के मूड में है। मुकेरियां से टिकट स्व. रजनीश बब्बी के परिवार को ही जाना तय है।