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35 करोड़ का पंजाब बजट, बदहाल किसानों को कोई राहत नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Mar 2016 12:50 PM IST
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वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा बजट पेश करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब सरकार ने चुनावी साल में बजट के दौरान किसानों को लुभाने की कोशिश तो की है, लेकिन बदहाल किसानी को बजट में कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद 35 हजार करोड़ रुपये केसरकारी कर्ज पर कोई कदम था, लेकिन बजट उस पर पूरी तरह मौन रहा।
विधानसभा चुनाव को देखते हुए वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने किसानों केलिए तीन अहम प्रावधान किए हैं। जिनमें सबसे महत्वपूर्ण छोटे किसानों को पचास हजार तक के फसली कर्ज को ब्याज मुक्त बनाना है। इस पर लगने वाला ब्याज अब सरकार वहन करेगी। इसके लिए दो सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों और माहिरों का मानना है कि इस योजना से किसानों को काफी फायदा होगा। यह उनकी लंबे समय से मांग थी।
इसके अलावा ढींढसा ने एलान किया है कि सरकार किसानों के लिए पेशन-कम-प्रॉविडेंट फंड स्कीम लाएगी, जिसमें कम से कम दस साल तक लाभपात्रियों को अंशदान देना होगा, उतनी ही राशि सरकार भी देगी। साठ साल के बाद किसानों को उस राशि में से मासिक पेंशन दी जाएगी। सहकारी बैंकों के जरिए इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। इसके लिए सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कच्चे शहद और मधुमक्खी पालन के उपकरणों पर वैट खत्म कर दिया गया है।
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साथ ही ढाई एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को पहल के आधार नया बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। 1.65 लाख ट्यूबवेल कनेक्शन जल्द जारी किए जाएंगे, लेकिन किसानों पर चढ़े 35 हजार करोड़ के सरकारी कर्ज से छुटकारा दिलाने को बजट में कोई योजना नहीं है, जो कि किसानों की सबसे अहम मांग थी। क्योंकि लगातार कुदरती आपदाओं केे चलते फसलें खराब हो रही हैं। खेती अर्थशास्त्री डॉ. एसएस जौहल ने कहा कि बजट में कुछ किसान हितैषी चीजें हैं, लेकिन खेती स्थिरता केलिए भी सोचने की जरूरत है।
गांवों में विकास से पहले किसान की आर्थिक दशा सुधारना जरूरी है। किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज अच्छा है, पर पेंशन स्कीम अगर निजी हाथों में दी तो गलत होगा। भारतीय किसान यूनियन के महासचिव सुखदेव सिंह ने भी आशंका जताई कि पेंशन स्कीम को निजी हाथों में दिया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इसका हाल भी फसल बीमा योजना की तरह होगा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि सरकार यह स्पष्ट करे कि ट्यूबवेल केइंस्टालेशन का खर्च कौन वहन करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों पर कर्ज और प्राकृतिक आपदा से तबाह हुई फसलों केमुआवजे को लेकर कोई एलान नहीं किया।
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विधानसभा चुनाव को देखते हुए वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने किसानों केलिए तीन अहम प्रावधान किए हैं। जिनमें सबसे महत्वपूर्ण छोटे किसानों को पचास हजार तक के फसली कर्ज को ब्याज मुक्त बनाना है। इस पर लगने वाला ब्याज अब सरकार वहन करेगी। इसके लिए दो सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों और माहिरों का मानना है कि इस योजना से किसानों को काफी फायदा होगा। यह उनकी लंबे समय से मांग थी।
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इसके अलावा ढींढसा ने एलान किया है कि सरकार किसानों के लिए पेशन-कम-प्रॉविडेंट फंड स्कीम लाएगी, जिसमें कम से कम दस साल तक लाभपात्रियों को अंशदान देना होगा, उतनी ही राशि सरकार भी देगी। साठ साल के बाद किसानों को उस राशि में से मासिक पेंशन दी जाएगी। सहकारी बैंकों के जरिए इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। इसके लिए सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कच्चे शहद और मधुमक्खी पालन के उपकरणों पर वैट खत्म कर दिया गया है।
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साथ ही ढाई एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को पहल के आधार नया बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। 1.65 लाख ट्यूबवेल कनेक्शन जल्द जारी किए जाएंगे, लेकिन किसानों पर चढ़े 35 हजार करोड़ के सरकारी कर्ज से छुटकारा दिलाने को बजट में कोई योजना नहीं है, जो कि किसानों की सबसे अहम मांग थी। क्योंकि लगातार कुदरती आपदाओं केे चलते फसलें खराब हो रही हैं। खेती अर्थशास्त्री डॉ. एसएस जौहल ने कहा कि बजट में कुछ किसान हितैषी चीजें हैं, लेकिन खेती स्थिरता केलिए भी सोचने की जरूरत है।
गांवों में विकास से पहले किसान की आर्थिक दशा सुधारना जरूरी है। किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज अच्छा है, पर पेंशन स्कीम अगर निजी हाथों में दी तो गलत होगा। भारतीय किसान यूनियन के महासचिव सुखदेव सिंह ने भी आशंका जताई कि पेंशन स्कीम को निजी हाथों में दिया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इसका हाल भी फसल बीमा योजना की तरह होगा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि सरकार यह स्पष्ट करे कि ट्यूबवेल केइंस्टालेशन का खर्च कौन वहन करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों पर कर्ज और प्राकृतिक आपदा से तबाह हुई फसलों केमुआवजे को लेकर कोई एलान नहीं किया।