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वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने बताया- कैसी है खजाने की सेहत, पढ़ें किस क्षेत्र को मिला कितना बजट

Sat, 29 Feb 2020 01:29 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 29 Feb 2020 01:29 AM IST
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Punjab budget: Manpreet Badal says Punjab will become a state with primary surplus
वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल - फोटो : अमर उजाला

वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने उम्मीद जताई है कि पंजाब इसी वित्त वर्ष के दौरान प्राइमरी सरप्लस वाला राज्य बन जाएगा। सदन में बजट भाषण शुरू करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वे कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार का चौथा बजट पेश कर रहे हैं और तीन साल बाद यह पहला बजट है जब राज्य की वित्तीय स्थिति में व्यापक सुधार नजर आ रहा है। 

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उन्होंने कहा कि तीन साल में पंजाब एक बार भी डबल ओवरड्राफ्ट की स्थिति में नहीं आया और इस तरह राज्य सरकार ने तीन सालों में उपायों, पेशगियों और ओवरड्राफ्ट की अवधि घटाकर कुल 52.45 करोड़ रुपये बचाए। वित्त मंत्री ने बताया कि 15वें वित्त कमीशन ने वित्त वर्ष 2020-21 की अपनी पहली रिपोर्ट में करों से आमदनी को 1.788 फीसदी बढ़ाने की सिफारिश की है, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार भी कर लिया है। 
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यानी, अब केंद्र से पंजाब को मिलने वाला टैक्स-शेयर ज्यादा मिलेगा। इससे पहले 14वें वित्त कमीशन ने यह हिस्सा 1.577 फीसदी तय किया था। वित्त मंत्री ने कहा कि अग्रिम अनुमान दर्शा रहे हैं कि वर्ष 2019-20 के दौरान राज्य का जीएसडीपी, वर्ष 2018-19 के 521861 करोड़ के मुकाबले 574760 करोड़ पर पहुंच गया है और 2020-21 में यह 644326 करोड़ रुपये पर पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि 2019-20 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय भी 166830 रुपये हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत के 135050 रुपये से 23.53 फीसदी अधिक है।

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59 साल वाले 1 अप्रैल को होंगे रिटायर

वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने वर्ष 2020-21 के बजट में कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र कम किए जाने के बारे में पत्रकारों को विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के जिन कर्मचारियों की उम्र 59 साल या उससे अधिक हो गई है, उन्हें आगामी एक अप्रैल को रिटायर कर दिया जाएगा जबकि 58 साल से अधिक या 59 साल से कम उम्र वाले कर्मचारियों को इसी साल एक अक्तूबर को रिटायर कर दिया जाएगा। 

कुछ बड़े ओहदों पर 65 साल तक की उम्र के अधिकारियों की नियुक्ति के बारे में पूछे गए सवाल पर मनप्रीत बादल ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में उन्हीं अधिकारियों की दोबारा सेवाएं लेती है, जिन्हें संबंधित कामकाज का गहरा अनुभव होता है और जिन अधिकारियों के लिए माना जाता है कि संबंधित कार्य को यही अधिकारी मुकम्मल कर सकते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि रिटायरमेंट की उम्र संबंधी नया आदेश ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति को प्रभावित नहीं करेगा।

अकालियों की सौदेबाजी से हर पंजाबी बना कर्जदार: मनप्रीत
वित्त मंत्री ने सीसीएल का उल्लेख करते हुए कहा कि मार्च 2020 तक राज्य को इस कर्ज के भुगतान के रूप में 10530 करोड़ रुपये की बड़ी रकम अदा करनी होगी। कहा कि अगर पिछली सरकार यह विरासत न छोड़ती तो राज्य आज इस पैसे से बड़ी तरक्की करता। उन्होंने कहा कि सीसीएल के 31000 करोड़ रुपये की अदायगी के लिए केंद्र से साथ समझौता हो गया था कि इस राशि को केंद्र, राज्य और बैंक एक-एक तिहाई हिस्से के तौर पर वहन करेंगे। 

अकाली दल केंद्र से समझौता कर आया कि सारा पैसा पंजाब चुकाएगा। उन्होंने कहा कि अब पंजाब पर 1/6 हिस्से का भार है। राज्य को 2034 तक कुल 57358 करोड़ रुपये चुकाने हैं। इस तरह हर पंजाबी 2034 तक केंद्र का कर्जदार रहेगा। अनुमानों में यह जोड़ा कि अगर सरकार को 10530 करोड़ रुपये न चुकाने पड़ते तो इस राशि से-पठानकोट-शंभु और चंडीगढ़-अबोहर फोरलेन (2500 करोड़), राज्य में तीन नए मेडिकल कॉलेज (1200 करोड़), प्रत्येक जिले में 100 बिस्तरों वाला एक-एक अस्पताल (900 करोड़), प्रत्येक हलके में 5 नए पीएचसी (600 करोड़), प्रत्येक हलके में एक नई आईटीआई (1800 करोड़), प्रत्येक हलके में एक नया सीनियर सेकेंडरी स्कूल (1800 करोड़), दो नए इंडस्ट्रियल पार्क (2000 करोड़), किसानों की आमदन बढ़ाने के लिए कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवीनीकरण के लिए 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था हो जाती।

यह कहते हैं बजट के आंकड़े
वित्त मंत्री ने वर्ष 2020-21 के बजट में राज्य के कुल खर्च का अनुमान 154805 करोड़ रुपये का लगाया है। वर्ष 2019-20 में राज्य का राजस्व खर्च 86602 करोड़ रुपये रहा था, जो वर्ष 2020-21 में 95716 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। यह वृद्धि 10.52 फीसदी की है। इस अवधि के दौरान वेतन, भत्ते और ग्रांट-इन-एड (वेतन) पर होने वाला खर्च 25449 करोड़ रुपये से बढ़कर 27639 करोड़ रुपये हो जाने की भी संभावना है।

दूसरी ओर पेंशन अदायगी के मामले में भी, मौजूदा 10213 करोड़ रुपये से बढकर 12267 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। यह दोनों बढ़ोतरी क्रमश: 8.61 फीसदी और 20.11 फीसदी है। वित्त मंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान के तहत वित्तीय घाटा 2.92 फीसदी रहने का अंदाजा लगाया गया है जोकि पंजाब फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) एक्ट 2003 के अधीन निर्धारित 3 फीसदी की सीमा के भीतर है। वित्त मंत्री ने इस बार पूंजीगत खर्च यानी विकास कार्यों के लिए पैसे की मद में, 10280 करोड़ रुपये रखे हैं जोकि बीते वित्त वर्ष के दौरान केवल 4013 करोड़ रुपये ही थे और राज्य के विकास कार्य ठप्प हो गए थे।

कर्ज की हालत में सुधार की उम्मीद

आगामी 31 मार्च को राज्य का कुल बकाया कर्ज 228906 करोड़ रुपये रह जाएगा, जो वर्ष 2019-20 के अनुमान के अनुसार जीएसडीपी का 39.83 फीसदी है। लेकिन वर्ष 2020-21 के बजट अनुमानों में दावा किया गया है कि यह कर्ज 248236 करोड़ रुपये तक पहुंचेगा। वित्त मंत्री ने कर्ज की अदायगी के लिए खर्च में संयम की नीति के चलते वर्ष 2019-20 में कुल राजस्व प्राप्तियों के मुकाबले बकाया कर्ज की प्रतिशतता 309.44 और नए वित्त वर्ष में 282.07 फीसदी हो सकती है। उन्होंने बताया कि कर्ज अदायगी का यह रुझान 2017 से बदस्तूर जारी है।

  • कृषि व संबंधित क्षेत्र : 12526 करोड़ रुपये।
  • शिक्षा क्षेत्र : 13092 करोड़ रुपये।
  • स्वास्थ्य : 4675 करोड़ रुपये।
  • सामाजिक न्याय व पिछड़ा वर्ग और सामाजिक सुरक्षा : 901 करोड़ रुपये।
  • महिला एवं बाल विकास : 3498 करोड़ रुपये।
  • खेल : 270 करोड़ रुपये।
  • शहरी विकास : 5026 करोड़ रुपये।
  • ग्रामीण विकास : 3830 करोड़ रुपये।
  • सड़कें व ढांचागत विकास : 2276 करोड़ रुपये।
  • वाटर सप्लाई और सेनिटेशन : 2029 करोड़ रुपये।
  • जल स्त्रोत : 2510 करोड़ रुपये।

केंद्रीय योजनाओं में डाला राज्य का हिस्सा

वित्त मंत्री ने नए बजट में उन सभी केंद्रीय योजनाओं में राज्य के बनते हिस्से की व्यवस्था भी की है, जो पंजाब में लागू की गई हैं। वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के लिए 200 करोड़ रुपये मुहैया कराए हैं जबकि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के लिए 141 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, जिसके तहत अनुसूचित जाति बहुल्य गांवों में बुनियादी ढांचे का विकास किया जाना है, के लिए 46 करोड़ रुपये और इसी योजना के तहत 50 फीसदी एससी आबादी वाले गांवों के लिए 10 करोड़ रुपये रखे गए हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (आरईजीएस) 320 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 

इनके अलावा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी अर्बन मिशन के लिए नए वित्त वर्ष के बजट में 90 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 125 करोड़ रुपये, आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना के लिए 221 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए 45 करोड़ रुपये, स्वच्छ भारत मिशन के लिए 103 करोड़ रुपये, अमृत योजना के लिए 700 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के लिए 249 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

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