पंजाब विस बजट सेशन, अकाली-भाजपा विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण का किया बायकॉट
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पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन मंगलवार को अकाली दल-भाजपा गठबंधन और लोक इंसाफ पार्टी के विधायकों ने राज्याल के अभिभाषण का ही बायकाट कर दिया। सदन में राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने जैसे ही अभिभाषण पढ़ना शुरू किया, अकाली दल और भाजपा के विधायक अपनी-अपनी सीटों से उठकर खड़े हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
इसी दौरान लोक इंसाफ पार्टी के विधायक बैंस बंधुओं ने भी राज्यपाल द्वारा अंग्रेजी में अभिभाषण पढ़ने का विरोध करते हुए पंजाबी में अभिभाषण पढ़े जाने की मांग करनी शुरू कर दी। जब उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो बैंस बंधु सदन से उठकर चले गए।
इधर, अपनी सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी कर रहे अकाली और भाजपा विधायक वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी तेज कर दी। इस नारेबाजी से सदन में इतना शोर था कि अकाली विधायक क्या कहना चाह रहे हैं, साफ सुनाई नहीं दिया। हालांकि अकाली दल के परमिंदर सिंह ढींढसा राज्यपाल द्वारा अभिभाषण पढ़े जाने के दौरान ‘सब झूठ है’ के नारे लगाने के साथ ही कांग्रेस सरकार मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।
अभिभाषण की प्रति फाड़ी
राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने तय समय के अनुसार, सदन में सुबह 11 बजे अभिभाषण पढ़ना शुरू किया था लेकिन चार मिनट बाद लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सदन से उठकर चले गए। उन्होंने सदन से बाहर निकल कर अंग्रेजी में छपी अभिभाषण की प्रति भी फाड़ दी।
इस दौरान अकाली व भाजपा विधायक 11:04 बजे वेल में पहुंच गए और स्पीकर के आसन के सामने खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। लेकिन दो मिनट बाद ही अकाली-भाजपा विधायक भी सदन का बायकाट कर गए।
खास बात यह भी रही कि इस दौरान सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी के विधायकों द्वारा किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं की गई। अकाली-भाजपा और लोक इंसाफ पार्टी के विधायकों के सदन से चले जाने के बाद राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरे शांतिपूर्ण माहौल में पूरा किया।
शिअद ने पीड़ित किसानों के साथ किया विधानसभा की तरफ मार्च
बजट सत्र के पहले दिन शिरोमणि अकाली दल ने आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों के साथ विधानसभा की तरफ मार्च किया। पुलिस ने एमएलए हॉस्टल के पास चौक पर उन्हें बैरिकेड लगा कर रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने वहां करीब डेढ़ घंटे तक धरना दिया। एक तरफ सत्र में शिअद-भाजपा विधायकों ने लोगों के मुद्दों पर राज्यपाल के अभिभाषण का बायकाट कर रहे थे।
दूसरी तरफ पंजाब से आए करीब तीन सौ किसान परिवारों के साथ अकाली नेता एमएलए हॉस्टल स्थित पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के घर से सुखबीर की अगुवाई में विधानसभा की तरफ मार्च कर रहे थे। पहले से सूचना होने के कारण पुलिस ने पूरे इंतजाम कर रखे थे। धरने को बादल, सुखबीर, बिक्रम मजीठिया समेत कई नेताओं ने संबोधित किया।
साथ ही पीड़ित परिजनों ने भी अपनी व्यथा बयान की। उन्होंने मांग की कि सरकार वादे के मुताबिक किसानों का पूरा कर्ज माफ करे और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को दस लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी दे। शिअद नेताओं ने कहा कि किसान, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से अपने साथ किए विश्वासघात का हिसाब मांगना चाहते हैं। बादल ने कहा कि कैप्टन या तो किसानों से किए वादे पूरे करें या फिर इस्तीफा दे दें।
उन्होंने न सिर्फ भोले किसानों को धोखा दिया है, बल्कि गुटका साहिब की कसम से भी मुकर गए हैं। अकाली-भाजपा सरकार ने 15 साल तक किसानों को छह हजार करोड़ सालाना की मुफ्त बिजली दी।
राज्यपाल ने अकाली-भाजपा सरकार पर साधा निशाना
पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने राज्य की पिछली सरकार के दौरान दर्ज किए गए झूठे केसों और बेअदबी के मामलों की जांच को तर्कपूर्ण तरीके से निपटाने के लिए प्रदेश की मौजूदा सरकार की वचनबद्धता का एलान करते हुए अकाली-भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। 15वीं विधानसभा के तीसरे बजट सत्र के दौरान अपने अभिभाषण में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सियासी बदलाखोरी या असहनशीलता अपनाने की नीति पर कायम रहेगी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए राज्यपाल ने कहा कि पिछले शासनकाल के दौरान दर्ज झूठे केसों के खिलाफ जस्टिस मेहताब सिंह गिल की अगुवाई में जांच आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कार्रवाई शुरू की गई है और इस काम को तर्कपूर्ण परिणाम तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राजनीतिक मान्यताओं और विचारधाराओं को दरकिनार करते हुए सबके लिए उचित और बराबरी वाला व्यवहार करने में विश्वास रखती है।
इस सरकार ने पिछली सरकार के उलट किसी के खिलाफ भी झूठा केस दर्ज नहीं होने दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई के लिए वचनबद्ध है, जिनसे वर्ष 2015-16 के दौरान राज्य में धार्मिक बेअदबी के केसों की जांच की और कानून को मुकम्मल रूप में लागू होने की मंजूरी दी। इस सम्मानित सदन की ओर से पिछले सत्र के दौरान की गई सिफारिश के मुताबिक सरकार ने एक विशेष जांच टीम स्थापित की है और उम्मीद है कि यह जल्दी अपना काम मुकम्मल कर लेगी।
पिछली सरकार से मिला खाली खजाना
इससे पहले प्रदेश में अमन-कानून की व्यवस्था को अपनी सरकार की मुख्य तरजीह बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों की इच्छाएं पूरी करने की ओर तेजी से बढ़ रही है। लोगों से किए वादों की पूर्ति के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं और गंभीर वित्तीय समस्या के बावजूद सरकार अपनी प्रतिबद्धता की पूर्ति के हरसंभव प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार को अदायगियों के लिए भारी लंबित बिलों समेत खाली खजाना विरासत में मिला, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को अनगिनत चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसी कारण उत्पन्न हालात पर काबू पाने में जरूरत से ज्यादा समय लग रहा है। फिर भी प्रदेश सरकार अपने वादों के प्रति वचनबद्ध है और सूबे में आम आदमी द्वारा झेली जा रही मुश्किलों को खत्म करने के साधन जुटा रही है।
गुरु पर्व से पहले शुरू हो जाएगा करतारपुर कॉरिडोर
राज्यपाल ने सदन के सदस्यों को बताया कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। उन्होंने 26 नवंबर 2018 को श्री करतारपुर साहिब (पाकिस्तान में) तक कॉरिडोर का नींव पत्थर रखने का स्वागत करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार इस कॉरिडोर को 12 नवंबर 2019 को आ रहे गुरु पर्व तक शुरू करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
गैंगस्टरों व नशे पर शिकंजा कसने में सरकार सफल
प्रदेश में सक्रिय गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने में राज्य सरकार की बड़ी सफलता का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ए-श्रेणी के 10 गैंगस्टरों समेत 1414 गैंगस्टर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 101 आतंकियों और 22 विदेशी स्मगलरों को गिरफ्तार करके 19 आतंकी गिरोहों को नष्ट किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि पंजाब में से नशा खत्म करने के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता पहले की तरह ही मजबूत है और इसने नशा स्मगलरों को सिर न उठाने देने को यकीनी बनाया है। इसके अलावा तीन पक्षीय नीति- ईडीपी एनफोर्समेंट, डी-एडीक्शन और प्रिवेंशन को अपनाकर नशे के दुरुपयोग को रोकने और खत्म करने की अपनी नीति में व्यापक सुधार किया है।
एसवाईएल पर चुप्पी लेकिन जल संकट का जिक्र
राज्यपाल ने प्रदेश के जलसंकट का विशेष तौर पर जिक्र करते हुए इच्छा जताई कि केंद्र सरकार को इस समस्या के संदर्भ में अपेक्षित नजरिया अपनाना चाहिए, ताकि प्रदेश को मरुस्थल बनने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि भले ही केंद्रीय अथॉरिटी ने पंजाब को कम पानी वाला सूबा घोषित किया है और यह तथ्य कि राज्य के पास अतिरिक्त पानी नहीं है, इस पर पूरा ध्यान नहीं दिया गया। राज्यपाल ने जल संरक्षण और इसे नियमित बनाने के प्रदेश सरकार के प्रयासों के अलावा पंजाब के दक्षिण पश्चिम जिलों में सेम की समस्या से निपटने के लिए विशेष कार्यक्रम लागू करने की जानकारी भी दी।
राजस्व प्राप्ति में 23 फीसदी का इजाफा
पिछली सरकार द्वारा सूबे की वित्त व्यवस्था की परवाह किए बिना सरकारी पैसे का अंधाधुंध इस्तेमाल करके खजाना खाली कर दिए जाने और सूबे की अर्थव्यवस्था को फिर से पैरों पर खड़ा करने के सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि निरंतर प्रयासों के कारण दिसंबर 2018 में राजस्व प्राप्तियां 23 प्रतिशत अधिक हो गई हैं। सरकार की ओर से राज्य का वित्तीय घाटा वर्ष 2016-17 में जीएसडीपी के 12.34 फीसदी से घटकर वर्ष 2017-18 में जीएसडीपी के 2.65 प्रतिशत पर लाया गया है।