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पंजाब: राज्यपाल के बजट अभिभाषण की खास बातें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 13 Mar 2015 01:00 AM IST
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चंडीगढ़, पंजाबी बोलते इलाके, नदी जल बंटवारे, 1984 के सिख विरोधी दंगे और पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर पंजाब को विशेष औद्योगिक पैकेज के मुद्दे एक बार फिर पंजाब के राज्यपाल के अभिभाषण का हिस्सा बने। राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के अभिभाषण के साथ वीरवार को पंजाब विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ।
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ड्रग्स के मुद्दे पर कांग्रेस के बॉयकाट के बीच सोलंकी ने लंबित मुद्दों के आने वाले समय में हल होने की उम्मीद जताई, वहीं पंजाब को विभिन्न प्रोजेक्ट देेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की तारीफ करते हुए सशक्त संघीय ढांचे की वकालत की। अपने अभिभाषण में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के संगत दर्शन कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का जिक्र भी किया।
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राज्यपाल ने अपनी बात केंद्र में नई सरकार के गठन को देश में असल संघीय ढांचे की स्थापना और आर्थिक सुधारों व विकास के नए क्रम की शुरुआत करार देते हुए पंजाब में नगर निकाय चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न होने पर जनता को बधाई दी।
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पंजाब के मसलों का उठाते हुए राज्यपाल ने कहा कि पंजाब को इसकी राजधानी चंडीगढ़ और बहुत से पंजाबी भाषाई क्षेत्रों से वंचित रखा गया है। अन्य राज्यों के साथ नदी जल बंटवारे के संबंध में रायपेरियन सिद्धांत अपनाने की प्रदेश की मांग को भी लगातार नकारा जा रहा है। प्रदेश में निरंतर घट रहा जल स्तर चिंता का विषय है। इसके बावजूद प्रदेश अपने पड़ोसी राज्य के हितों के खिलाफ नहीं है बल्कि उनकी सहायता करने का इच्छुक है, लेकिन रायपेरियन सिद्धांत को लागू करके पंजाब के अविभाज्य अधिकार सुरक्षित किए जाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि पंजाब पहले से ही अपने पास पानी की उपलब्धता कम होने की बात कह कर नदी जल बंटवारा नए सिरे से करने के लिए केंद्र से आग्रह कर रहा है। यह मसले पिछले कई वर्षों से अभिभाषण का हिस्सा बनते आ रहे हैं, लेकिन इनका हल आज तक नहीं निकल पाया है।
1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दंगा पीड़ित लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। उस वक्त उच्च पदों पर तैनात प्रभावशाली व्यक्तियों, जिनकी इन दंगों में अहम भूमिका थी, के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई न होने से पीड़ित चिंतित हैं। उन्होंने इन दंगों की जांच के लिए एसआईटी के गठन और दंगा पीड़ितों को पांच-पांच लाख रुपये की मुआवजा राशि का स्वागत भी किया।
वहीं, पीड़ितों के लिए शीघ्र न्याय की मांग की। पंजाब के पड़ोसी राज्यों को औद्योगिक रियायतें मिलने से पंजाब में इंडस्ट्री को नुकसान का जिक्र करते हुए सोलंकी ने कहा कि सामीवर्ती क्षेत्र होेने के चलते प्रदेश को भी विशेष सुविधाएं मिलनी चाहिएं।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की कि उन्होंने राज्यों की समस्याओं को समझते हुए योजना आयोग की जगह नीति आयोग का गठन कर देश को अत्यधिक केंद्रीयकरण से मुक्ति दिलाने की दिशा में शुरुआत की है। इसकी झलक केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से पेश बजट में मिली।
वहीं, केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 32 से बढ़ाकर 42 फीसदी करना भी केंद्र सरकार की सही मंशा को दर्शाता है। वहीं केंद्रीय बजट में जलियांवाला बाग को वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल करने, अमृतसर में पोस्ट ग्रेजुएट बागबानी अनुसंधान एवं शैक्षणिक केंद्र और प्रदेश के लिए आईआईएम की घोषणाओं के लिए जेटली की सराहना की गई।
सरकार की प्राप्तियों का किया जिक्र
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में पंजाब सरकार की विभिन्न प्राप्तियों का जिक्र भी किया। इनमें कृषि, पशु पालन, डेयरी विकास, मछली पालन, बिजली, उद्योग एवं वाणिज्य, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कैंसर अभियान, नशा विरोधी मुहिम, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, स्थानीय निकाय, स्वच्छ भारत अभियान, समाज कल्याण, वित्त, सिंचाई, बुनियादी ढांचा, जलापूर्ति एवं स्वच्छता, ग्रामीण विकास, शिक्षा, सहकारिता आदि विभागों में सरकार की ओर से किए गए कामाें और उपलब्धियों का जिक्र किया।
चंडीगढ़ से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें जल्द
राज्यपाल सोलंकी ने कहा कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जल्द शुरू होने जा रही हैं। भारत सरकार ने इसके लिए विभिन्न एयरलाइंस को स्वीकृति दे दी है।
पंजाब में कुछ, हरियाणा में कुछ
राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के पास पंजाब और हरियाणा दोनों का प्रभार है। जब हरियाणा का बजट सत्र शुरू हुआ तो उन्होंने वहां अभिभाषण दिया और वीरवार को पंजाब में।
सोलंकी ने पंजाब में नदी जल बंटवारा रायपेरियन सिद्धांत के अनुसार नए सिरे से करने की मांग रखी, वहीं हरियाणा में अभिभाषण के दौरान कहा था कि प्रदेश इस बात के लिए वचनबद्ध है कि इसे सभी अंतरराज्यीय नदी जल समझौतों से इसके हिस्से का पानी मिले। फिर भी यहां यह बताना उचित होगा कि अभिभाषण में राज्यपाल के अपने निजी विचार नहीं होते। यह तो राज्य की सरकार का दस्तावेज होता है, जिसे वह पढ़ते हैं।