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मंत्रियों और नेताओं को बांटे विदेशी हथियार, पंजाब आर्म्ड फोर्स तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Thu, 05 May 2016 12:42 PM IST
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11 साल से न्याय के लिए भटक रही है पीड़िता
- फोटो : Demo
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आंतकवादियों से पकड़े हथियार नेताओं और मंत्रियों को बांट दिए तो सूचना आयोग ने पंजाब आर्म्ड फोर्स को तलब कर लिया। सूचना आयोग ने पंजाब आर्म्ड पुलिस (पीएपी), फिल्लौर को आयोग के समक्ष सही जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं। इसकी तारीख एक जून निर्धारित की गई है।
सूचना आयोग के कमिश्नर चंद्रप्रकाश ने कहा कि हथियारों के आवंटन मामले में आयोग ने पीएपी से जवाब मांगा था। लेकिन पीएपी फिल्लौर की ओर से सही जवाब नहीं देने के चलते उनको एक जून को तलब किया है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को पीएपी की ओर से हथियारों के आवंटन मामले संबंधी आयोग के समक्ष पेश किया गया जवाब सही नहीं था।
इस बारे में कांग्रेस विधायक सुनील जाखड़ ने आरोप लगाया कि ये हथियार अकाली-भाजपा मंत्रियों के अलावा राजनीतिक शरण हासिल कर चुके गैंगस्टरों को भी अलॉट किए गए है। इससे साफ है कि अकाली-भाजपा सरकार ने गैंगस्टरों को शरण दे रखी है। गौरतलब है कि आतंकवादियों से 371 विभिन्न विदेशी हथियार पकड़े गए थे।
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पीएपी से पूछे थे तीन सवाल
1. क्या हथियार अलॉटमेंट करवाने वाले को खतरा है, अगर है तो उसका रिकार्ड दर्ज है?
2. क्या हथियारों के अलॉटमेंट करने से पहले मार्केट रेट पता किया गया था और किन नियमों के तहत आवंटित किए गए?
3. अलॉटमेंट संबंधी क्या प्रिंट या इलेक्ट्रानिक मीडिया में विज्ञापन दिया गया था?
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सूचना आयोग के कमिश्नर चंद्रप्रकाश ने कहा कि हथियारों के आवंटन मामले में आयोग ने पीएपी से जवाब मांगा था। लेकिन पीएपी फिल्लौर की ओर से सही जवाब नहीं देने के चलते उनको एक जून को तलब किया है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को पीएपी की ओर से हथियारों के आवंटन मामले संबंधी आयोग के समक्ष पेश किया गया जवाब सही नहीं था।
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इस बारे में कांग्रेस विधायक सुनील जाखड़ ने आरोप लगाया कि ये हथियार अकाली-भाजपा मंत्रियों के अलावा राजनीतिक शरण हासिल कर चुके गैंगस्टरों को भी अलॉट किए गए है। इससे साफ है कि अकाली-भाजपा सरकार ने गैंगस्टरों को शरण दे रखी है। गौरतलब है कि आतंकवादियों से 371 विभिन्न विदेशी हथियार पकड़े गए थे।
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पीएपी से पूछे थे तीन सवाल
1. क्या हथियार अलॉटमेंट करवाने वाले को खतरा है, अगर है तो उसका रिकार्ड दर्ज है?
2. क्या हथियारों के अलॉटमेंट करने से पहले मार्केट रेट पता किया गया था और किन नियमों के तहत आवंटित किए गए?
3. अलॉटमेंट संबंधी क्या प्रिंट या इलेक्ट्रानिक मीडिया में विज्ञापन दिया गया था?