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हाईकोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदला, अपराध में शामिल को मिली राहत

Sun, 21 Mar 2021 02:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा विवेक शर्मा, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 21 Mar 2021 02:15 AM IST
सार

  • बठिंडा में युवक के टुकड़े करने वाली की सजा मौत से बदलकर उम्रकैद की
  • हाईकोर्ट ने कहा अगर मारते हुए टुकड़े किए होते तो होता रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस

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punjab and hayrana high court changed a verdict of trial court in a murder case
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

युवक का अपहरण कर उसकी हत्या करने और बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े करने के दोषियों की मौत की सजा हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर मारते हुए टुकड़े किए गए होते तो रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानकर मौत की सजा मंजूर की जा सकती थी।

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याचिका दाखिल करते हुए शैलेश कुमार ने बठिंडा की ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मौत की सजा के फैसले को चुनौती दी थी। मृतक विपिन कुमार शुक्ला की पत्नी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उनके पति एयरफोर्स में थे और 8 फरवरी 2017 को मंदिर के लिए निकले थे। इसके बाद से वह लापता थे। पुलिस ने तलाश शुरू की और इसी बीच शिकायतकर्ता को पता चला कि शैलेश, उसकी पत्नी व एक अन्य ने मिलकर पति को अगवा किया है। 
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जब वह उनके मकान पर पहुंची तो उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया। पुलिस को बुलाया गया और दरवाजा खोला तो नजारा भयावह था। विपिन शुक्ला के शव के टुकड़े-टुकड़े कर उसे 16 प्लास्टिक के काले बैग में भरा गया था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद 15 मार्च 2019 को ट्रायल कोर्ट ने शैलेश को मौत की सजा सुनाई और पत्नी अनुराधा को अपराध में मदद के लिए 5 साल की सजा सुनाई। इसी सजा को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 
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हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही है और दोष सिद्ध होता है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में मौत के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए काटा गया है, न कि व्यक्ति के अंगों को काटकर उसकी हत्या की गई है। ऐसे में यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस की श्रेणी में नहीं आता है।

आखिरी सांस तक रहना होगा जेल में
हाईकोर्ट ने शैलेश की मौत की सजा को तो बदल दिया, लेकिन जो सजा तय की है वह भी बेहद सख्त है। हाईकोर्ट ने याची को उम्रकैद की सजा सुनाई है और वह भी ऐसी कि उसे आखिरी सांस तक जेल में रहना होगा। इसके साथ ही इस दौरान उसे पैरोल व किसी अन्य तरह की रियायत भी नहीं मिल सकेगी।


शैलेश की पत्नी अनुराधा पटेल की सजा 6 माह की
शैलेश की पत्नी को ट्रायल कोर्ट ने हत्या में सहयोग के लिए 5 साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या के समय अनुराधा 8 माह की गर्भवती थी और ऐेसे में वह हत्या में सहयोग कैसे कर सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि वह सबूत और पुलिस से जानकारी छुपाने की दोषी है, ऐसे में वह 5 साल नहीं बल्कि 6 माह की सजा की पात्र है।

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