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पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- पीयू पर दावा जताते हो, ग्रांट नहीं बढ़ाते
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 16 May 2017 09:17 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आप पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) पर अपना दावा तो जताते हो, लेकिन उसकी ग्रांट नहीं बढ़ाते। उधर, पंजाब यूनिवर्सिटी की बदहाल वित्तीय स्थिति संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने पीयू को मदद देने की पेशकश की।
जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले में पंजाब सरकार के ढुलमुल रुख पर नाखुशी जाहिर करते हुए यहां तक कह दिया कि पीयू को जब सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की बात आती है तो आप अड़ंगा लगा देते हो, लेकिन जब ग्रांट देने की बात आती है तो महज 20 करोड़ रुपये जारी कर पल्ला झाड़ लेते हो। पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि हाल ही में पीयू के कुलपति प्रो. अरुण ग्रोवर और पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के बीच ग्रांट के विषय पर बातचीत हुई है। पंजाब सरकार इस मामले में जल्द ही कोई निर्णय ले लेगी।
इस बीच, मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से कहा कि पीयू की बदहाल वित्तीय स्थिति को लेकर हरियाणा सरकार मदद करने को तैयार है। लेकिन यह निर्धारित किया जाए कि सरकार किस तरह से पीयू की मदद कर सकती है क्योंकि हरियाणा का एक भी कॉलेज पीयू से एफिलिएटेड नहीं है। इस पर केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने हाईकोर्ट को सुझाव दिया कि अगर हरियाणा के एक-दो जिलों के कॉलेजों को पीयू से एफिलिएटेड कर दिए जाएं तो हरियाणा सरकार पीयू की मदद कर सकती है।
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जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले में पंजाब सरकार के ढुलमुल रुख पर नाखुशी जाहिर करते हुए यहां तक कह दिया कि पीयू को जब सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की बात आती है तो आप अड़ंगा लगा देते हो, लेकिन जब ग्रांट देने की बात आती है तो महज 20 करोड़ रुपये जारी कर पल्ला झाड़ लेते हो। पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि हाल ही में पीयू के कुलपति प्रो. अरुण ग्रोवर और पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के बीच ग्रांट के विषय पर बातचीत हुई है। पंजाब सरकार इस मामले में जल्द ही कोई निर्णय ले लेगी।
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इस बीच, मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से कहा कि पीयू की बदहाल वित्तीय स्थिति को लेकर हरियाणा सरकार मदद करने को तैयार है। लेकिन यह निर्धारित किया जाए कि सरकार किस तरह से पीयू की मदद कर सकती है क्योंकि हरियाणा का एक भी कॉलेज पीयू से एफिलिएटेड नहीं है। इस पर केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने हाईकोर्ट को सुझाव दिया कि अगर हरियाणा के एक-दो जिलों के कॉलेजों को पीयू से एफिलिएटेड कर दिए जाएं तो हरियाणा सरकार पीयू की मदद कर सकती है।
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हरियाणा ने की पीयू को वित्तीय मदद की पेशकश
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
इस पर खंडपीठ ने पीयू के कुलपति को हरियाणा के शिक्षा सचिव के साथ बैठक कर इसका समाधान निकालने के आदेश दिए। खंडपीठ ने माना कि अगर हरियाणा के कुछ कॉलेज भी पीयू से एफिलिएटेड हो जाएं तो पीयू की एडमीशन और एग्जामिनेशन फीस में बढ़ोतरी होगी और हरियाणा सरकार से भी उसे ग्रांट मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पीयू की ग्रांट बढ़ाने के विषय में जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
हाईकोर्ट का दखल से इंकार
पंजाब यूनिवर्सिटी की ग्रांट बढ़ाने के हाईकोर्ट के आदेश को यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई चार जुलाई को होगी। इसके मद्देनजर हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह इस मामले में फिलहाल दखल नहीं दे सकते। हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई 11 जुलाई तक स्थगित कर दी। इससे पहले पीयू की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि मामले की पिछली सुनवाई पर अदालत के आदेश के तहत यूजीसी ने 20 करोड़ रुपये की ग्रांट तो जारी कर दी है, लेकिन यह राशि पर्याप्त नहीं है। पीयू की ओर से कहा गया कि जून माह में वेतन जारी करना मुश्किल हो जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही हाईकोर्ट इस पर आगे फैसला लेगा।
हाईकोर्ट का दखल से इंकार
पंजाब यूनिवर्सिटी की ग्रांट बढ़ाने के हाईकोर्ट के आदेश को यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई चार जुलाई को होगी। इसके मद्देनजर हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह इस मामले में फिलहाल दखल नहीं दे सकते। हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई 11 जुलाई तक स्थगित कर दी। इससे पहले पीयू की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि मामले की पिछली सुनवाई पर अदालत के आदेश के तहत यूजीसी ने 20 करोड़ रुपये की ग्रांट तो जारी कर दी है, लेकिन यह राशि पर्याप्त नहीं है। पीयू की ओर से कहा गया कि जून माह में वेतन जारी करना मुश्किल हो जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही हाईकोर्ट इस पर आगे फैसला लेगा।