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पीयू को आर्थिक सहायता देने से पीछे क्यों हट रही पंजाब सरकार: हाईकोर्ट

Sat, 07 Oct 2017 03:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 07 Oct 2017 03:18 PM IST
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Punjab and haryana highcourt on PU financial crisis
- फोटो : File Photo
पंजाब यूनिवर्सिटी की बदहाली पर पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि राज्य की तरफ से यूनिवर्सिटी को दी जा रही ग्रांट ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। कोर्ट ने कहा कि पीयू के 90 प्रतिशत कॉलेज पंजाब में हैं तो प्रदेश सरकार उसको आर्थिक सहायता देने में पीछे क्यों हट रही है। यदि पंजाब चाहे तो पीयू का घाटा समाप्त हो सकता है लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को अपने हिस्से की ग्रांट बढ़ानी होगी।  
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हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर पंजाब सरकार को ग्रांट बढ़ाने पर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही पीयू के वीसी अरुण ग्रोवर ने पीयू का पक्ष रखते हुए कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी को पंजाब सरकार 2001 से केवल 20 करोड़ रुपयेे ग्रांट देती आ रही है। अभी हाल में ही पंजाब में ग्रांट में 7 करोड़ की वृद्घि की है लेकिन वर्तमान में पीयू को चलाने के लिए जितनी राशि पूंजी चाहिए उसके हिसाब से यह कुछ भी नहीं है। ग्रोवर ने कहा कि पंजाब सरकार को चाहिए कि वे पीयू को बचाने के लिए आगे आए और ग्रांट की राशि में बढ़ोत्तरी करे। 
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 वीसी ने बताया कि पीयू फीस और अन्य माध्यमों से 293 करोड़ प्राप्त करता है और केंद्र से प्रतिवर्ष 207 करोड़ मिलता है। यदि पंजाब सरकार अपनी ओर से पहल कर ग्रांट की राशि बढ़ा दे तो पीयू को इस हालात से बाहर निकाला जा सकता है। यदि पंजाब सरकार ग्रांट नहीं बढ़ाना चाहती तो पीयू का प्रतिवर्ष होने वाला घाटा ही पूरा कर दे तो भी पीयू को बचाया जा सकता है। वीसी की इस दलील पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को गौर करने के निर्देश दिए हैं। 
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केंद्र का प्रस्ताव पर जल्द फैसला ले हरियाणा
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि 17 साल में केवल 7 करोड़ बढ़ाए गए हैं और उसका ढिंढोरा पीटा जा रहा है। जबकि इस दौरान खर्चों में बेतहाशा वृद्घि हुई है। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की अेार से बताया गया कि हरियाणा में मौजूद कॉलेजों को पीयू के अधीन लाने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है जिस पर केंद्र ने बताया कि प्रस्ताव उन्हें मिल चुका है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जल्द से जल्द इस पर फैसला लेने के आदेश दिए हैं।
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