{"_id":"58bef5804f1c1bec43dc42a6","slug":"punjab-and-haryana-highcourt-on-central-government","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'चंडीगढ़ और PU के साथ केंद्र सरकार सौतेला व्यवहार क्यों करता है?'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'चंडीगढ़ और PU के साथ केंद्र सरकार सौतेला व्यवहार क्यों करता है?'
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 08 Mar 2017 09:22 AM IST
विज्ञापन
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘क्या चंडीगढ़ भारत का हिस्सा नहीं है? चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी के साथ केंद्र सरकार सौतेला व्यवहार क्यों करती है? ’ हाईकोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी पीयू को यूजीसी द्वारा 30.50 करोड़ की ग्रांट जारी न करने और उसके खिलाफ आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने संबंधी जानकारी मिलने के बाद की।
हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सरों पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यदि शिक्षण संस्थान को पैसा नहीं देना है तो इसमें ताला लगवा दीजिए या इसे रिजॉर्ट में बदल दीजिए। पीयू की खस्ता वित्तीय हालत के मद्देनजर पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (पुटा) ने हाईकोर्ट से शिक्षकों का वेतन जारी करने का आदेश देने की अपील की थी। पुटा ने कहा था कि शिक्षकों को वेतन जारी नहीं हो रहा है, वे हड़ताल पर जा सकते हैं।
यदि ऐसा हुआ तो पीयू के अधीन 200 कॉलेजों और उसमें पढ़ने वाले 2.5 लाख छात्रों के लिए मुसीबत पैदा हो जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी और यूजीसी से जवाब मांगा। हाईकोर्ट ने पूछा कि 19 जनवरी को पीयू को 30 करोड़ 50 लाख की ग्रांट जारी करने के आदेश दिए गए थे, उसका पालन क्यों नहीं किया गया? यूजीसी का जवाब था कि उन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सरों पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यदि शिक्षण संस्थान को पैसा नहीं देना है तो इसमें ताला लगवा दीजिए या इसे रिजॉर्ट में बदल दीजिए। पीयू की खस्ता वित्तीय हालत के मद्देनजर पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (पुटा) ने हाईकोर्ट से शिक्षकों का वेतन जारी करने का आदेश देने की अपील की थी। पुटा ने कहा था कि शिक्षकों को वेतन जारी नहीं हो रहा है, वे हड़ताल पर जा सकते हैं।
विज्ञापन
यदि ऐसा हुआ तो पीयू के अधीन 200 कॉलेजों और उसमें पढ़ने वाले 2.5 लाख छात्रों के लिए मुसीबत पैदा हो जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी और यूजीसी से जवाब मांगा। हाईकोर्ट ने पूछा कि 19 जनवरी को पीयू को 30 करोड़ 50 लाख की ग्रांट जारी करने के आदेश दिए गए थे, उसका पालन क्यों नहीं किया गया? यूजीसी का जवाब था कि उन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।
विज्ञापन
'अगर पैसे जारी नहीं करने हैं तो पीयू को बना दो रिजॉर्ट'
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
इस दौरान पुटा ने कहा कि यदि शिक्षकों को वेतन जारी नहीं हुआ तो उनसे परीक्षा ड्यूटी कैसे करवाई जा सकेगी। हाईकोर्ट ने वीसी से शिक्षकों के वेतन के बारे में जानकारी मांगी। वीसी ने बताया कि परीक्षा शुल्क के रूप में वसूली गई 20 करोड़ रुपये यूनिवर्सिटी के पास मौजूद है। इस पर हाईकोर्ट ने वीसी को आदेश दिया कि शिक्षकों को फरवरी माह का वेतन इसी राशि से जारी करें।
कर्मियों की संख्या में कटौती शुरू
पीयू ने बताया कि यूजीसी के निर्देशों पर पीयू ने कर्मियों की संख्या और अन्य खर्च को कम करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। एक बार में यह कार्य संभव नहीं है, इसमें समय लगेगा। जबकि यूजीसी इसे एक झटके में करने का दबाव बना रही है। पीयू ने बताया कि 2010 की असेसमेंट के अनुसार 1510 शिक्षक और 3011 गैर शिक्षकों के पद तय किए गए थे। बाद में वर्ष 2014 में इंटरनल असेसमेंट के बाद तय किया गया कि 1378 शिक्षक और 2609 गैर शिक्षकों को रखना है। अगले पांच वर्षों में 474 गैर शिक्षक कर्मी सेवानिवृत्त हो जाएंगे और 545 अस्थायी कर्मियों को भी अगले तीन साल में हटा दिया जाएगा। इस तरह गैर शिक्षक कर्मियों की संख्या अगले पांच साल में 1019 हो जाएगी।
कर्मियों की संख्या में कटौती शुरू
पीयू ने बताया कि यूजीसी के निर्देशों पर पीयू ने कर्मियों की संख्या और अन्य खर्च को कम करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। एक बार में यह कार्य संभव नहीं है, इसमें समय लगेगा। जबकि यूजीसी इसे एक झटके में करने का दबाव बना रही है। पीयू ने बताया कि 2010 की असेसमेंट के अनुसार 1510 शिक्षक और 3011 गैर शिक्षकों के पद तय किए गए थे। बाद में वर्ष 2014 में इंटरनल असेसमेंट के बाद तय किया गया कि 1378 शिक्षक और 2609 गैर शिक्षकों को रखना है। अगले पांच वर्षों में 474 गैर शिक्षक कर्मी सेवानिवृत्त हो जाएंगे और 545 अस्थायी कर्मियों को भी अगले तीन साल में हटा दिया जाएगा। इस तरह गैर शिक्षक कर्मियों की संख्या अगले पांच साल में 1019 हो जाएगी।