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आदेश के बाद भी बार्डर पर बसे किसानों को मुआवजा क्यों नहीं दिया: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:38 AM IST
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- फोटो : Demo Photo
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे गांवों के किसानों की जमीनों का तो सरकार ने अधिग्रहण कर लिया, परंतु न तो उन्हें जमीन का मुआवजा दिया गया और न ही खड़ी फसल के नुकसान का। सीमा से सटे छह जिलों के किसानों को नुकसान का मुआवजा न देने पर हाईकोर्ट ने केंद्र व पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब -तलब किया है।
कोर्ट ने कहा कि मई 2015 के आदेशों में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि ट्रिब्यूनल बनाने से पहले अंतरिम तौर पर जो मुआवजा व भुगतान तय किया गया है उसका भुगतान पंजाब सरकार करे। आदेश के बाद भी भुगतान क्यों नहीं किया गया? कोर्ट ने कहा कि सरकार किसानों के मामले में गंभीर क्यों नहीं है और भुगतान क्यों नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने मई 2015 में बार्डर पर किसानों की जमीन का मुआवजा तय करने के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि केंद्र व पंजाब सरकार ट्रिब्यूनल गठित करने से पहले जो अंतरिम मुआवजा तय किया हैं उसका भुगतान करें।
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कोर्ट ने कहा कि मई 2015 के आदेशों में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि ट्रिब्यूनल बनाने से पहले अंतरिम तौर पर जो मुआवजा व भुगतान तय किया गया है उसका भुगतान पंजाब सरकार करे। आदेश के बाद भी भुगतान क्यों नहीं किया गया? कोर्ट ने कहा कि सरकार किसानों के मामले में गंभीर क्यों नहीं है और भुगतान क्यों नहीं किया गया।
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हाईकोर्ट ने मई 2015 में बार्डर पर किसानों की जमीन का मुआवजा तय करने के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि केंद्र व पंजाब सरकार ट्रिब्यूनल गठित करने से पहले जो अंतरिम मुआवजा तय किया हैं उसका भुगतान करें।
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1996 से विचाराधीन है मामला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
हाईकोर्ट ने यह आदेश यह आदेश बार्डर किसान वेलफेयर सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि वह पहले ही इस जमीन के लिए पंजाब सरकार को मुआवजा जारी कर चुकी है। अब पंजाब सरकार की ही जिम्मेदारी है की वह मुआवजा किसानों को जारी करे। हाईकोर्ट में यह मामला 1996 से विचाराधीन है जब बार्डर किसान वेलफेयर सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर लाइन ऑफ कंट्रोल के साथ लगती जमीन का अधिग्रहण करने की मांग की थी।
212 गावों के छह हजार लोग प्रभावित
पंजाब के पाकिस्तान सीमावर्ती जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से सटी हुई कई किसानों की जमीन जिसे सीमा सुरक्षा बल द्वारा उपयोग में लाए जाने के कारण किसान उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसी को लेकर सोसाइटी ने याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि पठानकोट से फाजिल्का तक छह जिलों की करीब 20 हजार एकड़ जमीन बार्डर एरिया फेन्सिंग जोन में आती है। इससे 212 गांव व 6 हजार लोग प्रभावित है।
इन लोगों की जमीन होने के बाद भी बीएसएफ ने अवैध रूप से इनकी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। 540 किलो मीटर का यह क्षेत्र 1947 से सुरक्षा बलों के कब्जे में हैं। प्रभावित किसान परिवार यहां रह रहे है और बड़ी मुश्किल से गुजारा कर रहे हैं। उनकी जमीन होने के बाद भी वो उस जमीन के मालिक नहीं हैं। बार्डर एरिया के फेन्सिंग जोन में होने के कारण ये जमीन न तो बेची जा सकती है और न ही इसमें ज्यादा फसल उगाई जा सकती है।
212 गावों के छह हजार लोग प्रभावित
पंजाब के पाकिस्तान सीमावर्ती जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से सटी हुई कई किसानों की जमीन जिसे सीमा सुरक्षा बल द्वारा उपयोग में लाए जाने के कारण किसान उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसी को लेकर सोसाइटी ने याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि पठानकोट से फाजिल्का तक छह जिलों की करीब 20 हजार एकड़ जमीन बार्डर एरिया फेन्सिंग जोन में आती है। इससे 212 गांव व 6 हजार लोग प्रभावित है।
इन लोगों की जमीन होने के बाद भी बीएसएफ ने अवैध रूप से इनकी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। 540 किलो मीटर का यह क्षेत्र 1947 से सुरक्षा बलों के कब्जे में हैं। प्रभावित किसान परिवार यहां रह रहे है और बड़ी मुश्किल से गुजारा कर रहे हैं। उनकी जमीन होने के बाद भी वो उस जमीन के मालिक नहीं हैं। बार्डर एरिया के फेन्सिंग जोन में होने के कारण ये जमीन न तो बेची जा सकती है और न ही इसमें ज्यादा फसल उगाई जा सकती है।