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क्या जो कोर्ट आएगा, उसी को करेंगे मुआवजे का भुगतान: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 07 Apr 2017 09:19 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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हरियाणा में हजारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने के बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में मुआवजे के नाम पर अपनी खाली जेबें दिखा दी हैं। हरियाणा सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने हाजिर होकर बताया कि मुआवजे के भुगतान के लिए बैंक से 3 हजार करोड़ का लोन लेने को सरकार ने मंजूरी दे दी है। हाईकोर्ट में एजी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के मुआवजे का भुगतान अभी किया जा सकता है।
इस पर अदालत ने कहा कि केवल याचियों का ही नहीं बल्कि जिन-जिन की भूमि सरकार ने ली है उन सभी को भुगतान किया जाए। क्या सरकार ने यह सोच लिया है कि जो मुआवजा पाने के लिए कोर्ट आएगा केवल उसी को भुगतान किया जाएगा। इस पर एजी ने हाईकोर्ट से समय मांगा और आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक वे इस बारे में बेहतर जवाब के साथ और स्थायी उपाय के साथ आएंगे। हाईकोर्ट ने एजी की दलीलों को स्वीकार करते हुए सुनवाई 18 अप्रैल तक टाल दी।
एजी नहीं बता पाए कितनी जमीन का अधिग्रहण किया
मामले में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया गया कि भूमि का अधिग्रहण करने के बावजूद उनको मुआवजा नहीं दिया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने हुडा से जवाब तलब किया था। हुडा ने हाईकोर्ट में हाजिर होकर बताया था कि वे लोन लेकर मुआवजा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके बाद जब हाईकोर्ट ने कुल अधिग्रहीत भूमि और कुल मुआवजा राशि के बारे में जानकारी मांगी तो हैरान करने वाली स्थिति सामने आई। हुडा यह बताने में नाकाम रहा कि कुल कितनी भूमि का मुआवजा देना है, लेकिन यह जरूर बताया गया कि मुआवजा राशि के रूप में करीब 15 हजार करोड़ की राशि का भुगतान करना है।
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इस पर अदालत ने कहा कि केवल याचियों का ही नहीं बल्कि जिन-जिन की भूमि सरकार ने ली है उन सभी को भुगतान किया जाए। क्या सरकार ने यह सोच लिया है कि जो मुआवजा पाने के लिए कोर्ट आएगा केवल उसी को भुगतान किया जाएगा। इस पर एजी ने हाईकोर्ट से समय मांगा और आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक वे इस बारे में बेहतर जवाब के साथ और स्थायी उपाय के साथ आएंगे। हाईकोर्ट ने एजी की दलीलों को स्वीकार करते हुए सुनवाई 18 अप्रैल तक टाल दी।
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एजी नहीं बता पाए कितनी जमीन का अधिग्रहण किया
मामले में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया गया कि भूमि का अधिग्रहण करने के बावजूद उनको मुआवजा नहीं दिया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने हुडा से जवाब तलब किया था। हुडा ने हाईकोर्ट में हाजिर होकर बताया था कि वे लोन लेकर मुआवजा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके बाद जब हाईकोर्ट ने कुल अधिग्रहीत भूमि और कुल मुआवजा राशि के बारे में जानकारी मांगी तो हैरान करने वाली स्थिति सामने आई। हुडा यह बताने में नाकाम रहा कि कुल कितनी भूमि का मुआवजा देना है, लेकिन यह जरूर बताया गया कि मुआवजा राशि के रूप में करीब 15 हजार करोड़ की राशि का भुगतान करना है।
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धन की कमी के ये कारण बताए
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
पिछली सुनवाई पर की थी सख्त टिप्पणी
बीती सुनवाई पर भू मालिकों की जमीन का अधिग्रहण करने के बाद भी मुआवजा जारी न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि भूमि मालिक हक मांग रहे हैं, दे दो, हमने सख्ती की तो पछताना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने सरकार से उस खाते की जानकारी मांगी थी जिनमें 15 हजार करोड़ मुआवजे के लिए मौजूद हों या आने वाले हों। इस पर वीरवार को सुनवाई आरंभ होते ही हरियाणा सरकार की अेार से एडवोकेट जनरल हाजिर हुए। एजी ने बताया कि हरियाणा सरकार इस दिशा में काम कर रही है और हुडा को बैंक से 3 हजार करोड़ का कर्ज लेने की अनुमति दे दी है। साथ ही योजना यह है कि 2 हजार करोड़ की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाएगी।
धन की कमी के ये कारण बताए
इस दौरान एजी ने बताया कि हुडा की आय के कुछ साधनों पर कानूनी ब्रेक लगी है जिसके चलते उसके पास पैसा नहीं है। हुडा को प्लाटों की ऑक्शन से पैसा आने वाला था परंतु उसपर स्टे लगा है जिस कारण आमदनी रुक गई है। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि इसके लिए भी हुडा ही जिम्मेदार है। भूमि लेने के बाद ओस्टी कोटा के तहत भूमि मालिकों को स्थान नहीं दिया तो वो कोर्ट आएंगे ही। यदि सही नीति के तहत यह कार्य किया होता तो कोर्ट के चक्कर में नहीं पड़ते। इस पर हाईकोर्ट से एजी ने समय दिए जाने की मांग की और कहा कि वे इसका रास्ता निकालने के लिए काम कर रहे हैं और अगली सुनवाई पर बेहतर जवाब के साथ आएंगे। हाईकोर्ट ने एजी की अपील स्वीकार करते हुए सुनवाई को टाल दिया।
बीती सुनवाई पर भू मालिकों की जमीन का अधिग्रहण करने के बाद भी मुआवजा जारी न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि भूमि मालिक हक मांग रहे हैं, दे दो, हमने सख्ती की तो पछताना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने सरकार से उस खाते की जानकारी मांगी थी जिनमें 15 हजार करोड़ मुआवजे के लिए मौजूद हों या आने वाले हों। इस पर वीरवार को सुनवाई आरंभ होते ही हरियाणा सरकार की अेार से एडवोकेट जनरल हाजिर हुए। एजी ने बताया कि हरियाणा सरकार इस दिशा में काम कर रही है और हुडा को बैंक से 3 हजार करोड़ का कर्ज लेने की अनुमति दे दी है। साथ ही योजना यह है कि 2 हजार करोड़ की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाएगी।
धन की कमी के ये कारण बताए
इस दौरान एजी ने बताया कि हुडा की आय के कुछ साधनों पर कानूनी ब्रेक लगी है जिसके चलते उसके पास पैसा नहीं है। हुडा को प्लाटों की ऑक्शन से पैसा आने वाला था परंतु उसपर स्टे लगा है जिस कारण आमदनी रुक गई है। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि इसके लिए भी हुडा ही जिम्मेदार है। भूमि लेने के बाद ओस्टी कोटा के तहत भूमि मालिकों को स्थान नहीं दिया तो वो कोर्ट आएंगे ही। यदि सही नीति के तहत यह कार्य किया होता तो कोर्ट के चक्कर में नहीं पड़ते। इस पर हाईकोर्ट से एजी ने समय दिए जाने की मांग की और कहा कि वे इसका रास्ता निकालने के लिए काम कर रहे हैं और अगली सुनवाई पर बेहतर जवाब के साथ आएंगे। हाईकोर्ट ने एजी की अपील स्वीकार करते हुए सुनवाई को टाल दिया।