फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab and haryana highcourt, Chandigarh private schools

चंडीगढ़ हिंदुस्तान का ही हिस्सा है तो इससे भेदभाव क्यों करता है केंद्र: हाईकोर्ट

Thu, 11 May 2017 09:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 May 2017 09:10 AM IST
विज्ञापन
Punjab and haryana highcourt, Chandigarh private schools
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
चंडीगढ़ के निजी स्कूलों में मनमाने तरीके से फीस बढ़ोतरी पर लगाम के लिए पंजाब एक्ट अपनाने का मामला विभिन्न मंत्रालयों के बीच फंसना केंद्र के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। कोर्ट को बताया गया कि यूटी प्रशासन ने प्रस्ताव एमएचआरडी को भेजा गया था जबकि इसे एमएचए को भेजा जाना था। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्यों चंडीगढ़ के हर काम में टांग अड़ा दी जाती है। पीयू हो या एयरपोर्ट, पीजीआई हो या डेंटल कॉलेज हर मामले में केंद्र चंडीगढ़ प्रशासन के साथ सौतेला व्यवहार करता नजर आता है। ऐसा लगता है कि चंडीगढ़ प्रशासन को पाकिस्तान प्रशासन मान कर केंद्र ने बर्ताव करना आरंभ कर दिया है।
विज्ञापन


बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा कि पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन एक्ट-2016 की तर्ज पर नियम चंडीगढ़ में लागू करने को मंजूरी दी गई या नहीं। इस पर केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने इस बिल को मंजूरी के लिए गलती से ऐसे मंत्रालय को भेजा जिससे इसका कोई लेना-देना नहीं था। जब इस बारे में जानकारी मिली तो प्रस्ताव को एमएचआरडी ने संबंधित मंत्रालय एमएचए को भेज दिया है। इस मामले में कानूनी राय ली जा रही है और इसके बाद नोटिफिकेशन को मंजूरी दे दी जाएगी।
विज्ञापन


इस प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा। इसलिए केंद्र सरकार को समय दिया जाए। केंद्र के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि केंद्र ने क्या सौतेला व्यवहार करने के लिए इसी शहर को चुना है। कोई भी प्रोजेक्ट हो या योजना सभी में दिल्ली में बैठे अफसर अड़ंगा लगा देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

केंद्र नहीं, पंजाब बनता है चंडीगढ़ के लिए मुसीबत : मित्तल

Punjab and haryana highcourt, Chandigarh private schools
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
ब्रिटिश कॉलोनी की तरह किया जाता है शहर के साथ बर्ताव : कोर्ट
केंद्र सरकार की ओर से आए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल चेतन मित्तल से हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या दिल्ली वालों के लिए चंडीगढ़ ब्रिटिश कॉलोनी है जो केंद्र हर स्तर पर इसके साथ भेदभाव करता हैं। हाईकोर्ट ने कहा  कि कोर्ट आंख बंद कर छात्रों को लुटने नही देगा। केंद्र का रवैया ऐसा है कि चंडीगढ़ में रहने वाले लोग देश का हिस्सा नहीं है, उन पर भारत का संविधान लागू नहीं होता है। 

केंद्र नहीं, पंजाब बनता है चंडीगढ़ के लिए मुसीबत : मित्तल
असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल मित्तल ने कहा कि चंडीगढ़ के लिए केंद्र नहीं बल्कि पंजाब मुसीबत बनता है। पंजाब सरकार ही खुद से एक्ट में संशोधन करती है जो प्रशासन के लिए मुसीबत बनते हैं। केंद्र जब भी शहर के लिए कोई फैसला लेेता है तो पंजाब मुसीबत बनता है और टांग अड़ाता है। पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार काम कर रही थी तो उसके बीच में भी पंजाब ने टांग अड़ाई। 

सही मंत्रालय केा प्रस्ताव भेजे यूटी प्रशासन
मित्तल ने कहा कि यूटी को भी चाहिए था कि वो सही मंत्रालय को प्रस्ताव भेजें, जब यूटी के मामलों में कुछ ही मंत्रालय को निर्णय लेने का अधिकार है तो आखिर क्यों गलत मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया गया। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि उसे चंडीगढ़ में इस बिल को लागू करने के लिए कितना समय चाहिए, इस पर केंद्र के वकील ने कोर्ट  कहा कि यह काम तीन सप्ताह में पूरा हो जाएगा। कोर्ट ने प्रशासन व केंद्र को 24 मई तक का समय देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed