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मां को बेटियों से गुजारा भत्ता पाने का हक: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 11 Jan 2017 12:28 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मां के पास भले ही आय का जरिया हो, तो भी वह बेटियों से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। मामले में हाईकोर्ट ने महिला की तीन बेटियों की याचिका खारिज करते हुए मां का गुजारा भत्ता उन्हें मासिक तौर पर सौंपने के आदेश दिए हैं।
एक वृद्ध महिला ने अपनी तीन बेटियों से प्रतिमाह गुजरा भत्ता दिलवाने के लिए मानसा (पंजाब) के एसडीएम से गुहार लगाई थी। महिला की चार संतानों में से एकमात्र पुत्र की मौत हो चुकी है। जबकि उसकी तीन बेटियां जीवित हैं। एसडीएम मानसा ने महिला की अर्जी को स्वीकार करते हुए मैंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन एक्ट-2007 के तहत बड़ी बेटी से 1500 रुपये और अन्य दो बेटियों से 1-1 हजार रुपये प्रतिमाह गुजरा भत्ता पाने के लिए योग्य मानते हुए बेटियाें को इसका भुगतान करने के निर्देश दिए थे।
उधर, एसडीएम के इस फैसले के खिलाफ तीनों बेटियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
बेटियाें की ओर से दलील देते हुए कहा गया कि उनकी मां के पास आय के अन्य साधन भी हैं। ऐसे में उन्हें बेटियों से गुजारा भत्ता पाने की जरूरत नहीं है। जस्टिस राजन गुप्ता ने इस केस के रिकार्ड का अध्ययन कर एसडीएम के आदेशों को सही करार दिया। साथ ही एसडीएम के आदेशों के अनुरूप बेटियाें से मां को गुजारा भत्ता पाने के लिए योग्य करार दिया। साथ ही संबंधित अथॉरिटी को आदेश दिए कि मां को गुजारा भत्ता मिले, इसे वे सुनिश्चित करें। ऐसा न होने की स्थिति में बेटियों के खिलाफ कानूनन कार्रवाई की जाए।
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एक वृद्ध महिला ने अपनी तीन बेटियों से प्रतिमाह गुजरा भत्ता दिलवाने के लिए मानसा (पंजाब) के एसडीएम से गुहार लगाई थी। महिला की चार संतानों में से एकमात्र पुत्र की मौत हो चुकी है। जबकि उसकी तीन बेटियां जीवित हैं। एसडीएम मानसा ने महिला की अर्जी को स्वीकार करते हुए मैंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन एक्ट-2007 के तहत बड़ी बेटी से 1500 रुपये और अन्य दो बेटियों से 1-1 हजार रुपये प्रतिमाह गुजरा भत्ता पाने के लिए योग्य मानते हुए बेटियाें को इसका भुगतान करने के निर्देश दिए थे।
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उधर, एसडीएम के इस फैसले के खिलाफ तीनों बेटियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
बेटियाें की ओर से दलील देते हुए कहा गया कि उनकी मां के पास आय के अन्य साधन भी हैं। ऐसे में उन्हें बेटियों से गुजारा भत्ता पाने की जरूरत नहीं है। जस्टिस राजन गुप्ता ने इस केस के रिकार्ड का अध्ययन कर एसडीएम के आदेशों को सही करार दिया। साथ ही एसडीएम के आदेशों के अनुरूप बेटियाें से मां को गुजारा भत्ता पाने के लिए योग्य करार दिया। साथ ही संबंधित अथॉरिटी को आदेश दिए कि मां को गुजारा भत्ता मिले, इसे वे सुनिश्चित करें। ऐसा न होने की स्थिति में बेटियों के खिलाफ कानूनन कार्रवाई की जाए।
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