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बुजुर्गों को बच्चों के हाथों जलील होने को नहीं छोड़ सकते: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 29 Jul 2017 10:00 AM IST
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72 वर्षीय विधवा महिला को परेशान व जलील करने वाले बेटे-बहू को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। दोनों ने याचिका दाखिल करते हुए डीएम केआदेशों को चुनौती देते हुए घर से न निकाले जाने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि जिंदगी के आखिरी दौर में सीनियर सिटीजन को उनके बच्चों के हाथों जलील होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। इसलिए बेटे और बहू को मकान खाली करना होगा।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए सीनियर सिटीजन महिला के बेटे, बहू व तीन नाबालिग बच्चों की ओर से डीसी के आदेशों को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया कि 1 जून 2017 को डीसी चंडीगढ़ ने उनकी मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें मकान खाली करने के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ता ने कहा कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत डीसी को उनकी मां की अपील सुनने का अधिकार नहीं था। इस अपील को केवल ट्रिब्यूनल ही सुन सकता है।
ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील का भी प्रावधान होता है लेकिन यहां डीसी ने यह कार्य किया है। इसके साथ ही याचिका कर्ता ने कहा कि उनके पिता की मौत 2005 में हो गई थी और उससे पहले याची दुबई में था। जिस प्रॉपर्टी से उन्हें निकाला गया है उसके निर्माण के लिए याची ने दुबई से पैसा भेजा था।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए सीनियर सिटीजन महिला के बेटे, बहू व तीन नाबालिग बच्चों की ओर से डीसी के आदेशों को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया कि 1 जून 2017 को डीसी चंडीगढ़ ने उनकी मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें मकान खाली करने के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ता ने कहा कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत डीसी को उनकी मां की अपील सुनने का अधिकार नहीं था। इस अपील को केवल ट्रिब्यूनल ही सुन सकता है।
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ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील का भी प्रावधान होता है लेकिन यहां डीसी ने यह कार्य किया है। इसके साथ ही याचिका कर्ता ने कहा कि उनके पिता की मौत 2005 में हो गई थी और उससे पहले याची दुबई में था। जिस प्रॉपर्टी से उन्हें निकाला गया है उसके निर्माण के लिए याची ने दुबई से पैसा भेजा था।
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डीसी के घर छोड़ने के आदेश को चुनौती देने वाले बेटा-बहू को कोर्ट की खरी-खरी
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
हाईकोर्ट ने वादी और प्रतिवादी पक्ष को सुनने के बाद याचिकाकर्ता की यह दलील खारिज कर दी कि इस मामले की डीएम सुनवाई नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को यह शक्ति होती है कि वह इन मामलों की सुनवाई के लिए डीसी को अधिकृत करें।
इसके साथ ही ट्रिब्यूनल के पास वह मामले जाते हैं जहां सीनियर सिटीजन अपनी प्रॉपर्टी को वापिस लेने के लिए तथा मेंटेनेंस के लिए याचिका दाखिल करते हैं। इस मामले में प्रॉपर्टी के मालिकाना हक पर सवाल नहीं उठाया गया है। ऐसे में डीसी इसे सुनने के लिए अधिकृत है।
इसके साथ ही सीनियर सिटीजन विधवा महिला 72 वर्ष की है। उसने याचिका में कहा है कि उसका बेटा उसके साथ बुरा बर्ताव करता है और ऐसे में उसके मकान से बेटे व उसके परिवार को निकाला जाए। इस स्थिति में 72 वर्षीय वृद्घ महिला को, जो जीवन के अंतिम दौर में है, उसके बच्चों के हाथों जलील होने के लिए नहीं छोड़ सकते।
इसके साथ ही ट्रिब्यूनल के पास वह मामले जाते हैं जहां सीनियर सिटीजन अपनी प्रॉपर्टी को वापिस लेने के लिए तथा मेंटेनेंस के लिए याचिका दाखिल करते हैं। इस मामले में प्रॉपर्टी के मालिकाना हक पर सवाल नहीं उठाया गया है। ऐसे में डीसी इसे सुनने के लिए अधिकृत है।
इसके साथ ही सीनियर सिटीजन विधवा महिला 72 वर्ष की है। उसने याचिका में कहा है कि उसका बेटा उसके साथ बुरा बर्ताव करता है और ऐसे में उसके मकान से बेटे व उसके परिवार को निकाला जाए। इस स्थिति में 72 वर्षीय वृद्घ महिला को, जो जीवन के अंतिम दौर में है, उसके बच्चों के हाथों जलील होने के लिए नहीं छोड़ सकते।