{"_id":"59760f904f1c1bd13f8b4809","slug":"punjab-and-haryana-highcourt-asked-to-meat-shop","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुकानों के बाहर खुले में मीट को लटकाने पर हाईकोर्ट सख्त, रिकार्ड तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुकानों के बाहर खुले में मीट को लटकाने पर हाईकोर्ट सख्त, रिकार्ड तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 25 Jul 2017 09:27 AM IST
विज्ञापन
Meat Shops
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से राज्य में चल रहे सभी स्लॉटर हाउस और मीट शॉप्स का ब्योरा तलब कर लिया है। यह मामला गुरुद्वारा गुरु गोबिंद सिंह जी की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है। इसमें पालकी के गुजरते समय बाहर मीट के टंगे होने से होने वाली परेशानी का जिक्र किया गया था। याचिका में खुले में इस तरह से मीट को डिस्प्ले करने पर रोक की अपील की गई थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए इसका दायरा बढ़ा दिया है।
सिरसा के गुरुद्वारा गुरु गोबिंद सिंह जी की ओर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि धार्मिक उत्सव के दौरान शहर से पालकी साहिब गुजरती है। इस दौरान रास्ते में कई मीट शॉप्स पड़ती हैं। आम तौर पर देखने में आता है कि यह मीट शॉप्स तय मानकों के अनुरूप नहीं चलते हैं और नियमों को ताक पर रखकर कटे हुए जानवर बाहर ही लटका देते हैं। इस दौरान एक तरफ धार्मिक दृष्टि से बेहद असहज स्थिति पैदा होती है, वहीं दूसरी ओर यहां से गुजरने वाले लोगों के लिए भी परेशानी पैदा होती है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जोकि पूरी तरह से शाकाहारी हैं।
याची ने कहा था कि ऐसी हालत केवल सिरसा में ही नहीं है बल्कि पूरे राज्य में है। पंजाब म्युनिसिपल एक्ट-1911 और हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट-1973 के सेक्शन-170 के तहत स्लॉटर हाउस (बूचड़खाना) से संबंधित प्रावधान हैं। इन प्रावधानों के तहत मीट शॉप्स के लिए लाइसेंस अनिवार्य होने के साथ साफ-सफाई और हाईजैनिक कंडीशन के बारे में दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। प्रावधान होने के बावजूद सख्ती से इनका पालन नहीं हो रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय को लेकर और याचिकाएं दायर न हों, लिहाजा जरूरी है कि हरियाणा सरकार इस मामले में पूरे राज्य में चल रहे स्लॉटर हाउस और मीट शॉप्स का डाटा, साफ-सफाई और हाईजैनिक कंडीशन का ब्यौरा सौंपे। सरकार को एक सितंबर को मामले की अगली सुनवाई पर इसकी जानकारी हाईकोर्ट को देनी होगी। पिछली सुनवाई पर जारी आदेशों के अनुरूप सोमवार को हरियाणा सरकार लोकल बॉडी विभाग के सचिव मौजूद रहे। हाईकोर्ट ने उन्हें इस संदर्भ में गंभीरता से कार्य कर अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिरसा के गुरुद्वारा गुरु गोबिंद सिंह जी की ओर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि धार्मिक उत्सव के दौरान शहर से पालकी साहिब गुजरती है। इस दौरान रास्ते में कई मीट शॉप्स पड़ती हैं। आम तौर पर देखने में आता है कि यह मीट शॉप्स तय मानकों के अनुरूप नहीं चलते हैं और नियमों को ताक पर रखकर कटे हुए जानवर बाहर ही लटका देते हैं। इस दौरान एक तरफ धार्मिक दृष्टि से बेहद असहज स्थिति पैदा होती है, वहीं दूसरी ओर यहां से गुजरने वाले लोगों के लिए भी परेशानी पैदा होती है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जोकि पूरी तरह से शाकाहारी हैं।
विज्ञापन
याची ने कहा था कि ऐसी हालत केवल सिरसा में ही नहीं है बल्कि पूरे राज्य में है। पंजाब म्युनिसिपल एक्ट-1911 और हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट-1973 के सेक्शन-170 के तहत स्लॉटर हाउस (बूचड़खाना) से संबंधित प्रावधान हैं। इन प्रावधानों के तहत मीट शॉप्स के लिए लाइसेंस अनिवार्य होने के साथ साफ-सफाई और हाईजैनिक कंडीशन के बारे में दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। प्रावधान होने के बावजूद सख्ती से इनका पालन नहीं हो रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय को लेकर और याचिकाएं दायर न हों, लिहाजा जरूरी है कि हरियाणा सरकार इस मामले में पूरे राज्य में चल रहे स्लॉटर हाउस और मीट शॉप्स का डाटा, साफ-सफाई और हाईजैनिक कंडीशन का ब्यौरा सौंपे। सरकार को एक सितंबर को मामले की अगली सुनवाई पर इसकी जानकारी हाईकोर्ट को देनी होगी। पिछली सुनवाई पर जारी आदेशों के अनुरूप सोमवार को हरियाणा सरकार लोकल बॉडी विभाग के सचिव मौजूद रहे। हाईकोर्ट ने उन्हें इस संदर्भ में गंभीरता से कार्य कर अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
विज्ञापन