फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab and Haryana High Court said, if wife is minor and marriage is not valid even then husband is her guardian

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा- अगर पत्नी नाबालिग और शादी वैध नहीं तो भी पति उसका अभिभावक

Wed, 09 Jun 2021 12:19 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 09 Jun 2021 12:19 AM IST
सार

हरियाणा के पानीपत निवासी युवक की याचिका पर हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दोनों विवाहित हैं और साथ रह रहे हैं तो पति ही उसका अभिभावक है। हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट के अनुसार पति लड़की का अभिभावक होने का अधिकार रखता है। दरअसल, मामला प्रेम विवाह से जुड़ा है।

विज्ञापन
Punjab and Haryana High Court said, if wife is minor and marriage is not valid even then husband is her guardian
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रेम विवाह के एक मामले में लड़की के नाबालिग होने और अपहरण की एफआईआर को रद्द करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दोनों विवाहित हैं और साथ रह रहे हैं तो पति ही उसका अभिभावक है। ऐसी स्थिति में इसे अपहरण का मामला नहीं माना जा सकता और इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने एफआईआर खारिज करने का आदेश जारी कर दिया। 

विज्ञापन


हरियाणा के पानीपत निवासी युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उसने और शिकायतकर्ता की बेटी ने घर से भाग कर विवाह किया था। इसके चलते पिता ने अपहरण व अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई थी। याची ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर ही डीएसपी के सामने शिकायतकर्ता की बेटी का बयान हुआ था जिसमें उसने कहा था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और याची उसका पति है। इसके बाद सब डिवीजन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने हुए बयान में भी उसने इसी बात को स्वीकार किया। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने याची पक्ष और शिकायतकर्ता को सुनने के बाद कहा कि भले ही लड़की विवाह के समय नाबालिग थी लेकिन उसने अपनी इच्छा से विवाह किया था और वर्तमान में वह साथ रह रहे हैं। हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट के अनुसार पति लड़की का अभिभावक होने का अधिकार रखता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार उस समय इस शादी को वैध नहीं माना जा सकता था और गार्जियन एवं वार्ड्स एक्ट के अनुसार माता-पिता ही कानूनी अभिभावक होते हैं लेकिन इस मामले में दोनों ने परिवार के खिलाफ जाकर विवाह किया और साथ रह रहे हैं तो पति ही अभिभावक है। 


हाईकोर्ट ने कहा कि यह देखना अहम है कि लड़की का कल्याण किसमें है और इस मामले में लड़की पति के साथ खुशी से रह रही है और ससुराल में उसे कोई समस्या नहीं है। ऐसे में पति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed