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Punjab News: महिला आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने को चुनौती देने वालीं मनीषा गुलाटी की याचिका पर फैसला सुरक्षित
Fri, 17 Mar 2023 08:44 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 17 Mar 2023 08:44 PM IST
सार
याची ने बताया कि पंजाब सरकार ने 31 जनवरी को यह कहते हुए उनकी एक्सटेंशन के आदेश रद्द कर दिया था कि एक्ट का उल्लंघन कर उन्हें एक्सटेंशन दी गई थी। गुलाटी ने याचिका में कहा था है कि जिस अथॉरिटी और एक्ट के तहत उन्हें नियुक्ति दी गई है, उसी के तहत उन्हें एक्सटेंशन भी दी जा सकती है। ऐसे में उनकी एक्सटेंशन रद्द करने का आदेश गलत है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन पद से हटाने को चुनौती देने वालीं मनीषा गुलाटी की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पंजाब सरकार ने दूसरी बाद उन्हें पद से हटाया है और इससे पहले उनके हाईकोर्ट में जाने के बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया था। अब पद से हटाने का कारण स्पष्ट न होने और तकनीकी कारणों को आधार बनाते हुए आदेश को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की गई है।
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मनीषा गुलाटी ने सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति तय प्रक्रिया के तहत तीन वर्ष के लिए 13 मार्च 2018 को की गई थी। उन्हें 18 सितंबर 2020 से 19 मार्च 2021 तक और फिर बाद में 18 मार्च 2024 तक एक्सटेंशन दे दी गई थी। उन्हें यह एक्सटेंशन भी तय प्रक्रिया के तहत दी गई थी।
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याची ने बताया कि पंजाब सरकार ने 31 जनवरी को यह कहते हुए उनकी एक्सटेंशन के आदेश रद्द कर दिया था कि एक्ट का उल्लंघन कर उन्हें एक्सटेंशन दी गई थी। गुलाटी ने याचिका में कहा था है कि जिस अथॉरिटी और एक्ट के तहत उन्हें नियुक्ति दी गई है, उसी के तहत उन्हें एक्सटेंशन भी दी जा सकती है। ऐसे में उनकी एक्सटेंशन रद्द करने का आदेश गलत है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
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15 फरवरी को पंजाब सरकार ने गुलाटी को पद से हटाने का निर्णय वापस लेने की पंजाब सरकार को जानकारी दी थी। इसके बाद हाइकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया था। अब दोबारा पंजाब सरकार ने नए सिरे से उन्हें पद से हटाने का आदेश दिया है। पंजाब सरकार के नए सिरे से जारी आदेश में पद से हटाने का कारण स्पष्ट न होने और आदेश की वैधता को भी चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में लगातार तीन दिन की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुना और इसके बाद शुक्रवार को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।