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हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका: कहा- मामा से होती है 2 मां जैसी सुरक्षा की अपेक्षा, मगर भांजे के लिए हैवान बन गया

Sat, 21 Oct 2023 01:19 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 21 Oct 2023 01:19 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि पैसे के विवाद के चलते कोई माता-पिता अपने छोटे मासूम बच्चे की इज्जत को दांव पर नहीं लगाएंगे। मेडिकल एविडेंस और परिस्थितियों को देखते हुए याची का दावा सही प्रतीत नहीं हो रहा है। इस मामले में आरोपी और पीड़ित दोनों बिल्कुल करीबी रिश्तेदार थे। ऐसे में हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

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Punjab and Haryana High Court rejected appeal against sentence
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भांजे से कुकर्म के दोषी मामा की सजा के खिलाफ अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामा से दो मां की तरह भांजे की रक्षा की उम्मीद होती है लेकिन वह छह साल के भांजे के लिए हैवान बन गया। ऐसा कृत्य करने वाला किसी रहम का हकदार नहीं है।

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याचिका दाखिल करते हुए गुरदासपुर निवासी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके खिलाफ कुकर्म के मामले में अप्रैल 2017 में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ याची के घर आया था। शिकायतकर्ता जो याची का जीजा है, उसने अपने बड़े बेटे को जब काफी देर नहीं देखा तो बाहर खोजने गया और वह उसे रोता मिला। जब पीड़ित से पूछा गया तो उसने पूरी कहानी पिता को बता दी।
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पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली। याची पर आरोप है कि उसने अपने भांजे के साथ कुकर्म किया है जो गलत है। याची का पीड़ित के पिता के साथ पैसों को लेकर विवाद था जिसके चलते यह झूठा मामला दर्ज करवाया गया है। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में उसे 10 साल की सजा सुनाई है जो गलत है और इस आदेश को खारिज किया जाना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पैसे के विवाद के चलते कोई माता-पिता अपने छोटे मासूम बच्चे की इज्जत को दांव पर नहीं लगाएंगे। मेडिकल एविडेंस और परिस्थितियों को देखते हुए याची का दावा सही प्रतीत नहीं हो रहा है। इस मामले में आरोपी और पीड़ित दोनों बिल्कुल करीबी रिश्तेदार थे। ऐसे में हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

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