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Punjab News: बैसाखी छीन असहाय पति को धक्का देना क्रूरता, हाईकोर्ट ने दिया तलाक का आदेश
Thu, 03 Nov 2022 09:21 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 03 Nov 2022 09:21 PM IST
सार
याची को पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में एकमुश्त 15 लाख व बेटे को 10 लाख रुपये का 6 माह में भुगतान करना होगा। कोर्ट ने पति की याचिका का निपटारा करते हुए होशियारपुर की फैमिली कोर्ट का आदेश खारिज कर तलाक का आदेश दिया है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तलाक से जुड़ी एक याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि बैसाखी छीनकर असहाय पति को धक्का मार जमीन पर गिराना क्रूरता है। इस प्रकार की क्रूरता और याची को दिव्यांग होने के तानों के चलते वह पत्नी से तलाक का हकदार है। याचिका दाखिल करते हुए होशियारपुर निवासी पति ने बताया कि उसका विवाह 3 मार्च 2004 को नकोदर में हुआ था।
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विवाह से पूर्व याची को युवती की आयु 29 साल बताई गई थी जबकि बाद में पता चला कि वह 38 वर्ष की है। शादी के 10 दिन के भीतर ही उसने याची को सबके सामने लूला-लंगड़ा कहना शुरू कर दिया। इससे आहत होकर याची ने रिश्तेदारों व दोस्तों को घर पर बुलाना बंद कर दिया। उसके इस बर्ताव के कारण याची के घरवालों ने उसे बेदखल कर दिया।
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याची पत्नी के साथ अलग रहने लगा तब भी पत्नी का बर्ताव नहीं बदला। इसके कुछ समय बाद महिला गहने, नकदी लेकर और पति को छोड़कर मायके चली गई। याची ने पत्नी को वापस लाने का बहुत प्रयास किया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। याची की पत्नी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची उसके साथ बुरा बर्ताव करता था।
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याची ने ही उसे गर्भवती होने के बावजूद घर से निकाल दिया था और बच्चा होने के बाद कोई उसे देखने तक नहीं आया। याची ने बताया कि होशियारपुर की फैमिली कोर्ट ने पत्नी के व्यवहार को लेकर याची की दलीलों को केवल आरोप मान तलाक से इन्कार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची के पिता समेत कई गवाहों ने पत्नी द्वारा दिव्यांगता को लेकर की गई टिप्पणियों को लेकर गवाही दी है लेकिन फैमिली कोर्ट ने इसकी ओर ध्यान नहीं दिया।
बेबस पति जो अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं है उससे बैसाखी छीनना, धक्का देकर गिराना और उसकी दिव्यांगता को लेकर टिप्पणी करना क्रूरता है। ऐसे में पति तलाक का हकदार है। हालांकि पत्नी की जरूरतों को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में याची को पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में एकमुश्त 15 लाख व बेटे को 10 लाख रुपये का 6 माह में भुगतान करना होगा। कोर्ट ने पति की याचिका का निपटारा करते हुए होशियारपुर की फैमिली कोर्ट का आदेश खारिज कर तलाक का आदेश दिया है।