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Punjab: यूएपीए कानून पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- नहीं बनने दिया जा सकता नागरिकों के उत्पीड़न का जरिया
Thu, 23 Nov 2023 12:15 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 23 Nov 2023 12:15 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि पढ़े लिखे और ट्रेंड पुलिसकर्मी सेवाएं दे रहे हैं तो यह चूक आखिर कैसे हुई। इस पर हाईकोर्ट को बताया गया कि आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच आरंभ कर दी गई है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जमानत से जुड़े एक मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) को नागरिकों के उत्पीड़न का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता। लुधियाना के पुलिस कमिश्नर की मौजूदगी में हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैए को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया।
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हत्या के प्रयास को लेकर लुधियाना पुलिस ने प्रमोद सहित अन्य पर एफआईआर दर्ज की थी। बाद में इसमें गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम जोड़ दिया। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रवैया अपनाते हुए लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को तलब किया था। बुधवार को पुलिस कमिश्नर कोर्ट में मौजूद रहे और हाईकोर्ट ने पूछा कि आखिर क्यों यूएपीए को केस में जोड़ा गया? इस पर अदालत को बताया गया कि कानून के गलत व्याख्यान के चलते यह गलती हुई थी और अब इसमें सुधार करते हुए यूएपीए एक्ट की धाराएं हटा ली हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि पढ़े लिखे और ट्रेंड पुलिसकर्मी सेवाएं दे रहे हैं तो यह चूक आखिर कैसे हुई। इस पर हाईकोर्ट को बताया गया कि आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच आरंभ कर दी गई है।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस को संवेदनशीलता से काम करना चाहिए और यूएपीए जैसे कानून में तो पुलिस की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को यूं ही काम करने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। निगरानी बेहद जरूरी है और उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे नियमित तौर पर अपने आधीन कार्य करने वालों से रिपोर्ट लें।