{"_id":"5d621e668ebc3e93c95efb7f","slug":"punjab-and-haryana-high-court-issues-notice-to-central-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"संपत्ति उत्तराधिकार कानून में लिंग भेद क्यों, जवाब दे केंद्र: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संपत्ति उत्तराधिकार कानून में लिंग भेद क्यों, जवाब दे केंद्र: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
Sun, 25 Aug 2019 11:10 AM IST
ajay kumar
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 25 Aug 2019 11:10 AM IST
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संपत्ति उत्तराधिकार अधिनियम में लिंग आधारित भेदभाव पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। नेशनल लॉ स्कूल के छात्र दक्ष कादियान ने एडवोकेट सार्थक गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधान को चुनौती दी है।
विज्ञापन
जनहित याचिका के माध्यम से याची ने बताया कि प्रावधान के अनुसार अगर घर के मुखिया की मौत हो जाती है और उसने कोई वसीयत नहीं छोड़ी है तो उत्तराधिकारियों को तीन श्रेणी में बांटा गया है।
विज्ञापन
पहली श्रेणी के उत्तराधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती है जिसमें बेटा, बेटी, पोता- पोती आदि शामिल हैं। यदि पहली श्रेणी के उत्तराधिकारी मौजूद नहीं होते हैं तो दूसरी श्रेणी को मौका दिया जाता है। इसमें पुरुष रिश्तेदार को ही प्राथमिकता दी जाती है। यानी बुआ के स्थान पर चाचा को प्राथमिकता मिलती है।
विज्ञापन
वहीं, तीसरी श्रेणी की बात करें तो बेटे की बेटी का बेटा या बेटे की बेटी की बेटी में से वरीयता देने की बात आती है तो इनमें से महिला को प्राथमिकता मिलती है। ऐसे में बेटे की बेटी की बेटी पूरी प्रापर्टी की हकदार होगी जबकि लड़के का हक नहीं होगा। याची ने कहा कि इस प्रकार लिंग के आधार पर भेदभाव करना सीधे तौर पर सांविधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
साथ ही याची ने बताया कि जब करीबी रिश्तेदारों में प्रॉपर्टी के बंटवारे की बात आती है तो वहां पुरुष रिश्तेदारों को ही प्राथमिकता दी जाती है और महिलाओं से भेदभाव। वहीं कुछ मामले में इससे उलट हैं। ऐसे में प्रावधान ऐसा हो जो लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त करने वाला हो। हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।