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हाईकोर्ट का केंद्र सरकार से सवाल: क्या 150 साल पुराने वयस्कता अधिनियम में आयु संशोधन की जरूरत है

Wed, 28 Jul 2021 11:51 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 28 Jul 2021 11:51 AM IST
सार

पंचकूला के लड़के और चंडीगढ़ की लड़की ने सहमति संबंध (लिव इन) में रहने की बात कहते हुए हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले में याचिका का दायरा बढ़ाया। 

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Punjab And Haryana High Court issue Notice to Center, punjab, haryana and Chandigarh on Need of Amendment in Age in Indian Majority Act
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रेमी जोड़े की सुरक्षा से जुड़े एक मामले में सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि वयस्कता अधिनियम 150 साल पुराना है और ऐसे में यह देखना जरूरी है कि क्या वयस्कता की आयु में संशोधन की जरूरत है। हाईकोर्ट ने इस मामले में अब केंद्र सरकार सहित हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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पंचकूला के लड़के और चंडीगढ़ की लड़की ने सहमति संबंध (लिव इन) में रहने की बात कहते हुए हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर पंचकूला के एसीपी ने इस मामले में लड़की के दस्तावेजों की जांच की और बताया कि दोनों बालिग हैं। लड़की की आयु 19 वर्ष से कुछ कम है और लड़के की आयु 21 वर्ष से कुछ कम। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय वयस्कता अधिनियम अब 150 साल पुराना हो चुका है। जब यह अधिनियम बनाया गया था तब की स्थिति और अब की स्थिति में बहुत फर्क है। आज की तिथि में 20 साल तक के युवा तो अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे होते हैं, जबकि जब यह एक्ट बना था तब स्थिति ऐसी नहीं थी। ऐसे में अब यह जरूरी हो गया है कि एक बार फिर से वयस्कता की आयु पर विचार किया जाए। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि लगातार प्रेमी जोड़ों की आती याचिकाओं के कारण इस सवाल का जवाब और भी अधिक जरूरी हो जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र, हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को प्रतिवादी बना लिया है और इस सवाल पर जवाब मांगा है। साथ ही पूछा है कि क्या वयस्कता की आयु को लेकर संशोधन की उनकी कोई योजना है। संशोधन करना या न करना यह विधायिका के हाथ में है, लेकिन यहां सरकार की प्रतिक्रिया प्राप्त करना जरूरी हो गया है।

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