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चंडीगढ़ प्रशासन को आसान टोल फ्री नंबर बनाने के निर्देश
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 May 2014 11:29 PM IST
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चंडीगढ़ में लावारिस कुत्तों का आतंक रोकने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में चल रही याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस राजन गुप्ता ने यूटी प्रशासन को निर्देश दिया है कि लावारिस कुत्तों के लोगों को काटने एवं अन्य आतंक की शिकायतों पर तुरंत राहत के लिए टोल फ्री नंबर स्थापित किया जाए।
जिससे लोगों तक बचाव दस्ता जल्द पहुंच सके। यह निर्देश प्रशासन द्वारा उस व्यवस्था को उजागर करने पर दिए गए, जिसमें कहा गया कि डाग कैंपेन सेंटर की वेबसाइट पर टोल फ्री नंबर दिया गया है।
इस पर याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट कुनाल मुलवानी ने आपत्ति उठाई कि आम व्यक्ति या रिक्शेवाला वेबसाइट कैसे देख सकता है और तुरत कार्रवाई के लिए पहले वेबसाइट कहां से ढूंढी जाए।
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इसके अलावा वेबसाइट पर भी 10 अंकों का नंबर है, जो याद नहीं रह सकता, लिहाजा पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर की भांति कोई छोटा एवं आसान नंबर स्थापित किया जाना चाहिए।
प्रशासन के सीनियर स्टेंडिंग काउंसिल संजीव शर्मा ने बेंच को जानकारी दी कि हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक लावारिस कुत्तों के प्रबंधन पर पुख्ता योजना बनाई गई है।
बताया गया कि अभी इसकी प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने कहा कि डाग कंट्रोल सेल स्थापित गिया गया है, एनजीओ के शेल्टरों में लावारिस कुत्तों को रखा जाता है, कुत्तों को पकड़ने के लिए तीन डाग वैन हैं, इन वैन में प्रशिक्षित स्टाफ है, लावारिस कुत्तों के शवों के निपटारे के लिए सेक्टर-25 में इनसिनरेटर स्थापित किया जा रहा है।
कुत्तों की नसबंदी की जा रही है, नसबंदी के लिए शिविर लगाए जाते हैं, नगर निगम लोगों को जागरूक करने की मुहिम के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराएगा। इसके अलावा अन्य प्रबंध भी किए जा रहे हैं।
प्रशासन के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने फिलहाल टोल फ्री नंबर के अलावा एनजीओ को कुत्तों के प्रबंधन के लिए दी जा रही वित्तीय मदद की मानीटरिंग पर रिपोर्ट तलब की है। साथ ही इस संबंध में पिछले एक साल का ब्योरा भी तलब किया गया है।
कुत्ते के टीकाकरण को 1000 की मदद, पीड़ित को कुछ नहीं
कुत्तों के काटने के अनेक मामले होने की सूरत में पीड़ितों को मुआवजा देने में असमर्थता जताने वाले प्रशासन ने अपने जवाब में कहा है कि लावारिस कुत्तों की नसबंदी एवं अन्य टीकाकरण के लिए तीन एनजीओ को एक हजार रुपये प्रति कुत्ता दिया जाता है।
नगर निगम ने पिछले साल ही यह राशि 775 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये की है। हाईकोर्ट ने अब इसी फंडिंग की मानीटरिंग तलब की है।
उल्लेखनीय है कि वीरवार को दाखिल जवाब में प्रशासन ने कुत्तों के काटने के मामले में पीड़ितों के मुफ्त इलाज का जिक्र भी नहीं किया है।
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जिससे लोगों तक बचाव दस्ता जल्द पहुंच सके। यह निर्देश प्रशासन द्वारा उस व्यवस्था को उजागर करने पर दिए गए, जिसमें कहा गया कि डाग कैंपेन सेंटर की वेबसाइट पर टोल फ्री नंबर दिया गया है।
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इस पर याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट कुनाल मुलवानी ने आपत्ति उठाई कि आम व्यक्ति या रिक्शेवाला वेबसाइट कैसे देख सकता है और तुरत कार्रवाई के लिए पहले वेबसाइट कहां से ढूंढी जाए।
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इसके अलावा वेबसाइट पर भी 10 अंकों का नंबर है, जो याद नहीं रह सकता, लिहाजा पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर की भांति कोई छोटा एवं आसान नंबर स्थापित किया जाना चाहिए।
प्रशासन के सीनियर स्टेंडिंग काउंसिल संजीव शर्मा ने बेंच को जानकारी दी कि हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक लावारिस कुत्तों के प्रबंधन पर पुख्ता योजना बनाई गई है।
बताया गया कि अभी इसकी प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने कहा कि डाग कंट्रोल सेल स्थापित गिया गया है, एनजीओ के शेल्टरों में लावारिस कुत्तों को रखा जाता है, कुत्तों को पकड़ने के लिए तीन डाग वैन हैं, इन वैन में प्रशिक्षित स्टाफ है, लावारिस कुत्तों के शवों के निपटारे के लिए सेक्टर-25 में इनसिनरेटर स्थापित किया जा रहा है।
कुत्तों की नसबंदी की जा रही है, नसबंदी के लिए शिविर लगाए जाते हैं, नगर निगम लोगों को जागरूक करने की मुहिम के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराएगा। इसके अलावा अन्य प्रबंध भी किए जा रहे हैं।
प्रशासन के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने फिलहाल टोल फ्री नंबर के अलावा एनजीओ को कुत्तों के प्रबंधन के लिए दी जा रही वित्तीय मदद की मानीटरिंग पर रिपोर्ट तलब की है। साथ ही इस संबंध में पिछले एक साल का ब्योरा भी तलब किया गया है।
कुत्ते के टीकाकरण को 1000 की मदद, पीड़ित को कुछ नहीं
कुत्तों के काटने के अनेक मामले होने की सूरत में पीड़ितों को मुआवजा देने में असमर्थता जताने वाले प्रशासन ने अपने जवाब में कहा है कि लावारिस कुत्तों की नसबंदी एवं अन्य टीकाकरण के लिए तीन एनजीओ को एक हजार रुपये प्रति कुत्ता दिया जाता है।
नगर निगम ने पिछले साल ही यह राशि 775 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये की है। हाईकोर्ट ने अब इसी फंडिंग की मानीटरिंग तलब की है।
उल्लेखनीय है कि वीरवार को दाखिल जवाब में प्रशासन ने कुत्तों के काटने के मामले में पीड़ितों के मुफ्त इलाज का जिक्र भी नहीं किया है।