प्राइवेट पब्लिशर्स की किताब मामले में अधिकारियों की मंशा पर सवाल
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चंडीगढ़। शहर के प्राइवेट स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को सिलेबस से हटवाने में यूटी प्रशासन के अधिकारियों की मंशा शक के दायरे में है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 17 मार्च को ही आदेश जारी कर नए सत्र से निजी प्रकाशकों की किताबों को सिलेबस से हटाने का आदेश जारी कर दिया था।
लेकिन शिक्षा विभाग से जुड़े किसी भी बड़े अधिकारी ने प्राइवेट स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को सिलेबस से हटवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। विभाग द्वारा निजी स्कूलों को इस संबंध में कोई नोटिस या सर्कुलर जारी नहीं किया गया। अधिकारियों की लापरवाही के कारण हजारों अभिभावकों की जेब निजी स्कूल और प्राइवेट पब्लिशर्स ने जमकर लूटी। एनसीईआरटी की किताबों के जो सेट 300 रुपये में मिल सकते हैं, उस पर अभिभावकों को 4 से 6 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ा।
इस बीच, यूटी प्रशासन के अधिकारियों की अनदेखी के खिलाफ कुछ अभिभावक पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। स्कूलों द्वारा माइनॉरिटी मामले में शिक्षा विभाग को लीगल नोटिस भी भेजा जा चुका है।
अभिभावकों की नहीं हुई सुनवाई
हाईकोर्ट द्वारा एनसीईआरटी किताबें लगाने के आदेश के बावजूद प्राइवेट स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को मजबूर किया। कई अभिभावकों ने मामले को जिला शिक्षा अधिकारी, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन से लेकर शिक्षा सचिव तक उठाया। लेकिन अभिभावकों को अधिकारियों से मामले में कार्रवाई के सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिलते रहे।
अधिकारियों के बच्चे तो कैसे करें कार्रवाई
जिन स्कूलों के खिलाफ प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें सिलेबस में शामिल करने की शिकायतें आ रही हैं, उन स्कूलों में यूटी प्रशासन के अलावा शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे में इन प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने से अधिकारी बच रहे हैं।
हेल्पलाइन सिर्फ दिखाने को लेकिन एक्शन कोई नहीं
निजी स्कूलों द्वारा प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में शामिल करने के खिलाफ शिकायतों के लिए सीबीएसई रीजनल सेंटर पंचूकला, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन और शिक्षा सचिव तक के हेल्पलाइन नबंर दिए गए हैं। इन हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतें करने के लिए जब फोन किया जाता है तो अधिकतर फोन कॉल्स को रिसीव ही नहीं किया जाता। अधिकारी भी शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। पंचकूला सीबीएसई रीजनल सेंटर ने अभी तक मामले में अपने स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि अधिकारी लगातार कार्रवाई का आश्वासन दे रहे हैं।
रूबिंदरजीत सिंह बराड़ , डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़ ने बताया कि प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें हटाने का कोर्ट से सीबीएसई को नोटिस भेजा गया है। लेकिन इस मामले में यूटी शिक्षा विभाग आने वाले दिनों में अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा। सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाती हैं। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।