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CM बादल की जनसभा में भड़के लोग, विरोधी नारेबाजी और बहिष्कार
ब्यूरो/अमर उजाला, लंबी (मुक्तसर)
Updated Mon, 16 Jan 2017 06:26 PM IST
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जनसभा में बादल के साथ मिड्ढूखेड़ा को देख भड़के लोग
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मुख्यमंत्री बादल की जनसभा में लोग भड़क गए और उन्होंने जमकर हंगामा किया। लोगों ने विरोधी नारेबाजी करते हुए सभा का बहिष्कार कर दिया। लंबी के गांव सिखवाला में सोमवार को बादल के साथ कोआपरेटिव बैंक पंजाब के चेयरमैन तेजिंदर सिंह मिड्ढूखेड़ा को देखकर सभा में मौजूद अकाली दल से संबंधित लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शनकारी चेयरमैन मिड्ढूखेड़ा पर हलके के गांवों में गुटबंदी करने का आरोप लगा रहे थे। मुख्यमंत्री सोमवार को लंबी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में चुनाव प्रचार कर रहे थे। प्रचार मुहिम के तहत मुख्यमंत्री बादल ने जैसे ही गांव सिखवाला पहुंच भाषण शुरू किया वैसे ही उनके साथ आए चेयरमैन तेजिंदर सिंह मिड्ढूखेड़ा को देखकर अधिकतर लोग भड़क गए।
उन्होंने मिड्ढूखेड़ा के खिलाफ नारेबाजी कर जनसभा का बहिष्कार किया। इसके बाद बादल वहां महज दस मिनट भाषण देकर खानापूर्ति कर चलते बने।
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प्रदर्शनकारी चेयरमैन मिड्ढूखेड़ा पर हलके के गांवों में गुटबंदी करने का आरोप लगा रहे थे। मुख्यमंत्री सोमवार को लंबी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में चुनाव प्रचार कर रहे थे। प्रचार मुहिम के तहत मुख्यमंत्री बादल ने जैसे ही गांव सिखवाला पहुंच भाषण शुरू किया वैसे ही उनके साथ आए चेयरमैन तेजिंदर सिंह मिड्ढूखेड़ा को देखकर अधिकतर लोग भड़क गए।
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उन्होंने मिड्ढूखेड़ा के खिलाफ नारेबाजी कर जनसभा का बहिष्कार किया। इसके बाद बादल वहां महज दस मिनट भाषण देकर खानापूर्ति कर चलते बने।
बादल से शिकवा नहीं, मिड्ढूखेड़ा गुटबंदी करते हैं
सीएम बादल
- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें मुख्यमंत्री बादल से कोई गिला-शिकवा नहीं है, मगर चेयरमैन मिड्ढूखेड़ा गांवों में गुटबंदी पैदा कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार प्रदर्शनकारियों का गांव कक्खांवाली के सरपंच सुखचैन सिंह से कोई विवाद चल रहा था।
10 नवंबर को इस मामले में बैंक में कोई लड़ाई हो गई थी। इसमें वह लोग चेयरमैन तेजिंदर मिड्ढूखेड़ा के पास अपने पक्ष में मदद मांगने गए थे। मगर मिड्ढूखेड़ा ने उनकी मदद के बजाय सरपंच सुखचैन का साथ दिया था।
इस वजह से भड़के लोगों ने सभा का बहिष्कार कर दिया। गांव पंजावा में भी मुख्यमंत्री बादल के पहुंचने से पहले चेयरमैन मिड्ढूखेड़ा की खिलाफत हुई, मगर वहां अकाली नेताओं व पुलिस ने मुख्यमंत्री बादल के पहुंचने तक मामला शांत कर सबको बैठा दिया।
10 नवंबर को इस मामले में बैंक में कोई लड़ाई हो गई थी। इसमें वह लोग चेयरमैन तेजिंदर मिड्ढूखेड़ा के पास अपने पक्ष में मदद मांगने गए थे। मगर मिड्ढूखेड़ा ने उनकी मदद के बजाय सरपंच सुखचैन का साथ दिया था।
इस वजह से भड़के लोगों ने सभा का बहिष्कार कर दिया। गांव पंजावा में भी मुख्यमंत्री बादल के पहुंचने से पहले चेयरमैन मिड्ढूखेड़ा की खिलाफत हुई, मगर वहां अकाली नेताओं व पुलिस ने मुख्यमंत्री बादल के पहुंचने तक मामला शांत कर सबको बैठा दिया।