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Chandigarh: पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट की हालत खराब, स्टैंड के बजाय इधर-उधर खड़ी हैं साइकिलें
Thu, 10 Nov 2022 04:13 PM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 10 Nov 2022 04:13 PM IST
सार
लोगों का आरोप है कि कंपनी का पूरा ध्यान डॉकिंग स्टेशन के विज्ञापन पर है, वह साइकिलों की बिल्कुल भी देखभाल नहीं कर रहे हैं। न ही खराब साइकिलों को ठीक किया जा रहा है।
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खाली पड़ा साइकिल स्टैंड
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
चंडीगढ़ में साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत बड़े जोर-शोर से की गई। अब उनकी हालत बहुत खराब है। स्टैंड पर साइकिलें नजर नहीं आतीं। कोई साइकिल सड़क किनारे खड़ी है, कोई किसी दीवार के साथ तो कोई पिछले कई महीनों से मार्केट की पार्किंग में पड़ी हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर जीपीएस लगा है, तो कंपनी इनकी लोकेशन की पहचान कर इन्हें उठा कर स्टैंड पर क्यों नहीं लेकर जा रही है।
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स्थिति इस कदर खराब है कि ज्यादातर जो साइकिलें स्टैंड पर खड़ी हैं, वह भी दिखावा मात्र ही हैं। कई की बैटरी डाउन है तो कुछ खराब पड़ी हैं। कंपनी और नगर निगम की अनदेखी की वजह से लोग ज्यादातर साइकिलों का इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे हैं। कई साइकिलों पर लगे क्यूआर कोड खराब हैं। ये मोबाइल एप से स्कैन नहीं हो पाते। कई साइकिलों की लाइट टूट चुकी है। तार लटक रहे हैं। इनके स्टैंड टूटे हुए हैं या फिर ढीले हैं। कई डॉकिंग स्टेशन ऐसी जगह बनाए गए हैं, जहां लोग जाते ही नहीं। कुछ स्टैंड के पास लोगों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वहां एक भी साइकिल नहीं होती।
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लोगों का आरोप है कि कंपनी का पूरा ध्यान डॉकिंग स्टेशन के विज्ञापन पर है, वह साइकिलों की बिल्कुल भी देखभाल नहीं कर रहे हैं। न ही खराब साइकिलों को ठीक किया जा रहा है। सेक्टर-45 की कुसुम ने बताया कि सेक्टर-45 समेत पूरे शहर में ही पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट का बहुत बुरा हाल है। कहा कि वे जहां भी साइकिलों को देखती हैं, कंपनी को फोन कर साइकिलों को उठवाती हैं। अब तक करीब 200 साइकिलों के लिए उन्होंने कंपनी को फोन किया है। नयागांव से भी कई साइकिलों को रिकवर कराया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब साइकिलों में जीपीएस लगा है तो कंपनी को पता क्यों नहीं चलता कि उनकी साइकिलें कहां खड़ी हैं।
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केस -1
सेक्टर-9 स्थित स्टेट बैंक के पास पिछले करीब एक महीने से चार साइकिलें हैं। इनमें से कुछ इलेक्ट्रिक भी हैं। आज तक इन्हें उठाने कोई नहीं आया। खड़े-खड़े इन पर धूल जम गई है।
केस- 2
सेक्टर-9 स्थित एचएसबीसी बैंक के बैक साइड की टू-व्हीलर पार्किंग में एक साइकिल करीब तीन महीने से खड़ी है। साइकिल की हालत को देखकर लगता है कि इसे कुछ शरारती तत्वों ने तोड़ने की भी कोशिश की।
केस-3
सेक्टर-22बी की मोबाइल मार्केट के पब्लिक टॉयलेट के पास डॉकिंग स्टेशन है। मार्केट के अंदर स्टेशन होने के बावजूद मार्केट के दूसरे हिस्सों में साइकिलें खड़ी रहती हैं। यहां भी पिछले काफी दिनों से साइकिलें नीचे गिरी हुई हैं।
साइकिलों को अपना नहीं समझते शहरवासी, कर रहे हैं लापरवाही
शहरवासी भी साइकिलों के प्रति काफी लापरवाह हैं। कई लोग साइकिल चलाने के बाद डॉकिंग स्टेशन के बजाय कहीं भी छोड़ देते हैं। कई साइकिलों का सामान चोरी हो चुका है। इसमें हैंडल की रबर, सीट, टायर, घंटी आदि शामिल हैं। लॉक न खुलने पर लोग जबरन साइकिल निकालने का प्रयास करते हैं और नुकसान करके चले जाते हैं। कई साइकिलों को जानबूझ कर भी तोड़ा गया है।
---चार फेज में चलनी थी 5000 साइकिलें---
फेज 1 - 27 जनवरी 2021 से 27 अप्रैल 21
फेज 2 - 28 अप्रैल 2021 से 27 अगस्त 21
फेज 3 - 28 अगस्त 2021 से 27 दिसंबर 21
फेज 4- 28 दिसंबर 2021 से 27 अप्रैल 2022
अभी तीसरा फेज भी शुरू नहीं
समझौते के अनुसार 27 अप्रैल 2022 तक चार चरणों में 5000 साइकिलें चलानी थीं, लेकिन अभी कंपनी ने तीसरा फेज भी शुरू नहीं किया है। हाल ही में कंपनी ने स्मार्ट
सिटी को आवेदन देकर कहा है कि उनके पास फंड की कमी है, इसलिए जुलाई 2023 में सभी चरणों को पूरा कर लिया जाएगा। हर फेज में 1250 साइकिलें चलाने की
योजना है।
---योजना एक नजर में ---
कुल उपयोगकर्ता- 2.02 लाख
कुल राइड- 5.75 लाख
प्रतिदिन औसतन राइड- 1600
कुल किलोमीटर- 23 लाख से ज्यादा
पर्यावरण में कार्बन जाने से बचाया- 527 टन