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लोक लेखा समिति ने सदन में पेश की रिपोर्ट: विजिलेंस की ढिलाई से बच रहे गड़बड़ी के आरोपी अधिकारी, उच्चस्तरीय निगरानी की जरूरत

Tue, 22 Mar 2022 11:34 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 22 Mar 2022 11:34 PM IST
सार

समिति की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विभागों में ई टेंडरिंग में छेड़छाड़ की गई है। मामला संज्ञान में आने के बाद भी इस पर अभी तक विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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Public Accounts Committee presented the report in Haryana assembly
हरियाणा विधानसभा सत्र - फोटो : फाइल

विस्तार

विधानसभा की लोक लेखा समिति ने गड़बड़ी के मामलों में राज्य सतर्कता ब्यूरो की धीमी जांच गति पर सवाल उठाए हैं। समिति ने कहा है कि सतर्कता ब्यूरो की ढिलाई के चलते आरोपी अधिकारी नियमों के लाभ लेकर बच निकलते हैं। इसमें तेजी लाए जाने की जरूरत है। इसके साथ ही समिति ने पाया है कि विभाग ऑडिट पैरा की अनदेखी कर रहे हैं। इसलिए समिति ने सिफारिश की है कि सीएम विंडो की तर्ज पर महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों में शामिल पैरों की भी सरकार के उच्च स्तर पर मॉनिटरिंग हो।

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विधानसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष व घरौंडा से विधायक हरविंद्र कल्याण ने समिति की 82वीं रिपोर्ट मंगलवार को सदन में पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि इस वर्ष महालेखापरीक्षक की तीन रिपोर्टों पर कार्य किया गया है, जिसमें विभिन्न मामलों में 110 नई सुधारात्मक व दंडात्मक सिफारिशें की गई हैं। साथ ही पुरानी लंबित 1280 सिफारिशों पर भी कार्य किया गया है, जिनमें से 426 सिफारिशें लागू हुई हैं। हरियाणा में समितियों की सिफारिशों को लागू करने की दर 33 प्रतिशत है, जबकि लोकसभा में यह दर लगभग 65 प्रतिशत है। इसे और बढ़ाने की जरूरत है। समिति की सिफारिशों के लागू हुए बिना व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार होना कठिन होता है। 
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ई टेंडरिंग में हुई छेड़छाड़, रिकवरी सेल की सिफारिश
समिति की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विभागों में ई टेंडरिंग में छेड़छाड़ की गई है। मामला संज्ञान में आने के बाद भी इस पर अभी तक विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। समिति ने प्रदेश में बकाया राजस्व वसूली के लिए एक उच्च स्तरीय वसूली सेल के गठन की भी सिफारिश करते हुए लोकसभा की तर्ज पर हरियाणा विधानसभा में भी एपीएमएस लागू करने पर बल दिया।

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समिति के सभी सदस्यों की 90 बैठकों के बाद रिपोर्ट तैयार की गई है। हमारा प्रयास है कि पब्लिक के पैसे का उचित प्रबंधन हो। विभागों की कार्यप्रणाली को और पारदर्शी बनाने और उन पर उच्चस्तरीय निगरानी के लिए भी सिफारिश की गई है। - हरविंद्र कल्याण, अध्यक्ष, पीएसी समिति। 


दान में दिए रक्त की खरीद-फरोख्त ठीक नहीं: सीमा त्रिखा
चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं पर गठित समिति की अध्यक्ष सीमा त्रिखा ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि पहले रक्तदान में दिए गए रक्त की खरीद-फरोख्त होती थी, हमने इसे पकड़ा है। ये दान दिया रक्त है, उसे बेचने का काम नहीं किया जाना चाहिए। दान शब्द जहां आता है, अगर वहां पर खरीद होती है तो ये पाप है। 



समिति ने सिफारिश की है कि रक्तदान के लिए नए नियम बनें और हर रक्तदाता का पूरा विवरण सीएमओ के पास हो। इसके अलावा, पिटीशन कमेटी के चेयरमैन घनश्याम अरोड़ा की ओर से जगबीर मलिक, जनस्वास्थ्य सिंचाई कमेटी के अध्यक्ष दीपक मंगला, एस्टीमेट कमेटी के चेयरमैन सुभाष सुधा, पब्लिक अंडरटेकिंग कमेटी के अध्यक्ष असीम गोयल और कमेटी ऑन गर्वनमेंट एसोरेंस मोहम्मद इलियास ने भी अपनी अपनी कमेटियों की रिपोर्ट सदन में पेश की। 

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