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शिक्षकों की भर्ती के लिए पीयू को फिर से लेनी होगी यूजीसी की अनुमति
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय को स्थायी शिक्षकों व कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए यूजीसी से फिर अनुमति लेनी होगी। अब वित्तीय सहमति मिलने के बाद ही पीयू अगला कदम उठा पाएगी। माना जा रहा है कि अब रिक्तियां भरना आसान नहीं होगा। ऐसे में छात्र-शिक्षक अनुपात को पूरा नहीं किया जा सकेगा और इसका असर रैंकिंग पर भी पड़ेगा। हालांकि अधिकारी दावे कर रहे हैं कि 2022 से पहले नैक के सभी मानक पूरे कर लिए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार पीयू ने पिछले साल 26 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्तियां निकाली थीं। इसके लिए आवेदन मांगे गए। पीयू को लगभग 1100 आवेदन मिले। इन आवेदनों की छंटनी शुरू हुई थी कि सिंडिकेट ने इन पर सवाल खड़े कर दिए और भर्ती की प्रक्रिया बाधित हो गई। सवाल खड़े किए कि जो रिक्तियां निकाली गई हैं, वहां शिक्षकों की भर्ती इतनी जरूरी नहीं है। इन रिक्तियों के अलावा कई विभाग ऐसे हैं, जहां शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन वहां रिक्तियां नहीं निकाली गई। इस पर सिंडिकेट ने रिक्तियों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया और रिकॉर्ड जांचे। नौ पदों को स्वीकृति दी गई, लेकिन इसमें से भी सात पदों पर फिर अड़ंगा लगा दिया गया। कई बार इस प्रकरण के बारे में बैठक हुई, लेकिन सभी बेनतीजा रहीं। पीयू को इन भर्तियों को करने के लिए यूजीसी से विशेष अनुमति लेनी पड़ी थी और वर्षों बाद रिक्तियां को रास्ता साफ हुआ था।
इस बारे में डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी ने कहा कि छात्र व शिक्षकों के अनुपात को पूरा करने के लिए शिक्षकों की भर्ती जरूरी है। इस मानक की पूर्ति के लिए पीयू प्रशासन जुटा हुआ है। समय रहते सफलता मिल जाएगी।
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अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां भी नहीं हो पाईं
पीयू ने पांच माह पहले 21 अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां करने के लिए विज्ञापन निकाला था। आवेदन मांगे गए थे और साक्षात्कार के आधार पर सीधी भर्ती की जानी थी, लेकिन इस भर्ती के जरिए बैकडोर एंट्री का रास्ता साफ होता, ऐसे में इस पर भी रोक लगा दी गई। अब पीयू को चिंता है कि डेढ़ साल बाद नैक की टीम दौरा करेेग और वह शिक्षक-छात्र अनुपात देखेगी जो पूरा नहीं मिलेगा। इसी बिंदू के कारण पीयू को रैंकिंग में पिछड़ना पड़ सकता है। हालांकि पीयू प्रशासन कोशिश में जुटा है कि नैक की टीम के दौरा करने से पहले इनकी पूर्ति कर ली जाए।
केंद्र ने लगाई है भर्तियों पर रोक
केंद्र सरकार ने अपने कई विभागों में आदेश दिए हैं कि नई भर्तियां न की जाएं और बहुत आवश्यक हो तो उसके लिए अनुमति ली जाए। इसी के तहत पीयू से भी कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि पीयू की भर्ती प्रक्रिया अब लंबे समय तक टल सकती है, क्योंकि केंद्र के पास पैसे की कमी है। जो लोग काम कर रहे हैं, उन्हें समय पर वेतन मिल जाए, यह बड़ी बात है। हालांकि पीयू प्रशासन ने ताकत लगाई हुई है। अगले साल तक भर्तियों का रास्ता साफ हो सकता है।
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जानकारी के अनुसार पीयू ने पिछले साल 26 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्तियां निकाली थीं। इसके लिए आवेदन मांगे गए। पीयू को लगभग 1100 आवेदन मिले। इन आवेदनों की छंटनी शुरू हुई थी कि सिंडिकेट ने इन पर सवाल खड़े कर दिए और भर्ती की प्रक्रिया बाधित हो गई। सवाल खड़े किए कि जो रिक्तियां निकाली गई हैं, वहां शिक्षकों की भर्ती इतनी जरूरी नहीं है। इन रिक्तियों के अलावा कई विभाग ऐसे हैं, जहां शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन वहां रिक्तियां नहीं निकाली गई। इस पर सिंडिकेट ने रिक्तियों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया और रिकॉर्ड जांचे। नौ पदों को स्वीकृति दी गई, लेकिन इसमें से भी सात पदों पर फिर अड़ंगा लगा दिया गया। कई बार इस प्रकरण के बारे में बैठक हुई, लेकिन सभी बेनतीजा रहीं। पीयू को इन भर्तियों को करने के लिए यूजीसी से विशेष अनुमति लेनी पड़ी थी और वर्षों बाद रिक्तियां को रास्ता साफ हुआ था।
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इस बारे में डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी ने कहा कि छात्र व शिक्षकों के अनुपात को पूरा करने के लिए शिक्षकों की भर्ती जरूरी है। इस मानक की पूर्ति के लिए पीयू प्रशासन जुटा हुआ है। समय रहते सफलता मिल जाएगी।
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अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां भी नहीं हो पाईं
पीयू ने पांच माह पहले 21 अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां करने के लिए विज्ञापन निकाला था। आवेदन मांगे गए थे और साक्षात्कार के आधार पर सीधी भर्ती की जानी थी, लेकिन इस भर्ती के जरिए बैकडोर एंट्री का रास्ता साफ होता, ऐसे में इस पर भी रोक लगा दी गई। अब पीयू को चिंता है कि डेढ़ साल बाद नैक की टीम दौरा करेेग और वह शिक्षक-छात्र अनुपात देखेगी जो पूरा नहीं मिलेगा। इसी बिंदू के कारण पीयू को रैंकिंग में पिछड़ना पड़ सकता है। हालांकि पीयू प्रशासन कोशिश में जुटा है कि नैक की टीम के दौरा करने से पहले इनकी पूर्ति कर ली जाए।
केंद्र ने लगाई है भर्तियों पर रोक
केंद्र सरकार ने अपने कई विभागों में आदेश दिए हैं कि नई भर्तियां न की जाएं और बहुत आवश्यक हो तो उसके लिए अनुमति ली जाए। इसी के तहत पीयू से भी कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि पीयू की भर्ती प्रक्रिया अब लंबे समय तक टल सकती है, क्योंकि केंद्र के पास पैसे की कमी है। जो लोग काम कर रहे हैं, उन्हें समय पर वेतन मिल जाए, यह बड़ी बात है। हालांकि पीयू प्रशासन ने ताकत लगाई हुई है। अगले साल तक भर्तियों का रास्ता साफ हो सकता है।