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पीयू सीनेट चुनाव में कोरोना पीड़ित वोट डालेंगे या नहीं, अभी तय नहीं
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेट चुनाव में कोरोना संक्रमित अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे या नहीं, अभी तय नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, घमासान इस बात को लेकर मचा है कि कोरोना संक्रमितों को चुनाव से दूर रखा जाए। तर्क दिया जा रहा है कि यदि कोरोना संक्रमित वोट डालते हैं तो दूसरे लोग भी संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। इस वजह से इन्हें दूर रखा जाए। हालांकि, सीनेट चुनाव में एक-एक मत कीमती होता है। एक सीनेटर चार फैकल्टी में मत डालता है। एक ही व्यक्ति चार सदस्यों के लिए मतदान करता है।
सूत्रों के मुताबिक तीन से चार पूर्व सीनेटर संक्रमित हैं। कुछ में लक्षण मिले हैं, लेकिन जांच नहीं करवाई है। 26 अप्रैल को होने वाले चुनाव में अगर यह मत का प्रयोग करते हैं तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। पीयू के कुछ शिक्षकों ने इससे पीयू प्रशासन अधिकारियों को अवगत कराया है। उन्होंने संक्रमितों को चुनाव से दूर रखने को कहा है। यह भी तर्क दिया है कि घरों से मतदान करवाया जाए। अगर पीयू ऐसा करती है तो फिर चुनाव आयोग के मुताबिक सभी चुनाव क्षेत्र की मतगणना एक साथ होनी चाहिए। इसे लेकर एक ग्रुप पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है। अब पीयू को तय करना है कि वह किस तरह मतदान करवाती है। उधर, जानकारों का कहना है कि इसमें बैलेट पेपर से चुनाव होता है और वह कई हाथों से गुजरता है। कोरोना से दूसरे लोगों का बचाव भी जरूरी है।
हर किसी को मत का अधिकार
पीयू के कुछ शिक्षकों का कहना है कि सीनेट चुनाव चार साल में एक बार होता है। हर मतदाता की इच्छा होती है कि वह मतदान करे, लेकिन अगर कोरोना के कारण उसे रोक दिया जाता है तो यह ठीक नहीं है। क्योंकि कोरोना में उसका कोई दोष नहीं है। वोट देने की अनुमति मिलनी चाहिए। उनके वोटों को अलग रखवाया जा सकता है और आखिर में उनकी गिनती की जा सकती है या फिर चुनाव अधिकारी ई-मेल के जरिए उनसे मत देने वाले सदस्यों के नाम गोपनीय तरीके से मांग सकता है। इस बारे में पीयू प्रशासन का कहना है कि कोरोना संक्रमित वोट डालेंगे या नहीं, इस पर निर्णय होना बाकी है।
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सूत्रों के मुताबिक तीन से चार पूर्व सीनेटर संक्रमित हैं। कुछ में लक्षण मिले हैं, लेकिन जांच नहीं करवाई है। 26 अप्रैल को होने वाले चुनाव में अगर यह मत का प्रयोग करते हैं तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। पीयू के कुछ शिक्षकों ने इससे पीयू प्रशासन अधिकारियों को अवगत कराया है। उन्होंने संक्रमितों को चुनाव से दूर रखने को कहा है। यह भी तर्क दिया है कि घरों से मतदान करवाया जाए। अगर पीयू ऐसा करती है तो फिर चुनाव आयोग के मुताबिक सभी चुनाव क्षेत्र की मतगणना एक साथ होनी चाहिए। इसे लेकर एक ग्रुप पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है। अब पीयू को तय करना है कि वह किस तरह मतदान करवाती है। उधर, जानकारों का कहना है कि इसमें बैलेट पेपर से चुनाव होता है और वह कई हाथों से गुजरता है। कोरोना से दूसरे लोगों का बचाव भी जरूरी है।
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हर किसी को मत का अधिकार
पीयू के कुछ शिक्षकों का कहना है कि सीनेट चुनाव चार साल में एक बार होता है। हर मतदाता की इच्छा होती है कि वह मतदान करे, लेकिन अगर कोरोना के कारण उसे रोक दिया जाता है तो यह ठीक नहीं है। क्योंकि कोरोना में उसका कोई दोष नहीं है। वोट देने की अनुमति मिलनी चाहिए। उनके वोटों को अलग रखवाया जा सकता है और आखिर में उनकी गिनती की जा सकती है या फिर चुनाव अधिकारी ई-मेल के जरिए उनसे मत देने वाले सदस्यों के नाम गोपनीय तरीके से मांग सकता है। इस बारे में पीयू प्रशासन का कहना है कि कोरोना संक्रमित वोट डालेंगे या नहीं, इस पर निर्णय होना बाकी है।
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