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पीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग ने बनाई रूसा प्रयोगशाला
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने उच्च स्तरीय प्रयोगशाला बना दी है। साथ ही उस पर बोर्ड भी लगाया दिया गया है। विभाग के मुताबिक इस प्रयोगशाला के लिए आधुनिक उपकरण व मशीनें आदि खरीदी गई हैं। वहीं दूसरी ओर विभाग के कुछ छात्रों ने मांग रखी है कि प्रयोगशाला का लाभ सभी छात्रों को मिलना चाहिए। यह केवल कुछ ही छात्रों के लिए न खोली जाए। साथ ही इस प्रयोगशाला के खुलने व बंद होने का समय तय होना चाहिए।
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत केंद्र सरकार ने विशेष प्रोजेक्ट के तहत ऊष्मायन केंद्र के लिए सात करोड़ रुपये पंजाब विश्वविद्यालय को दिए थे। इस बजट से भौतिक विज्ञान विभाग, रसायन विज्ञान विभाग, वनस्पति विज्ञान विभाग आदि विभागों में उच्च स्तरीय प्रयोगशालाएं बननी थीं। इन प्रयोगशालाओं का लाभ बाहर के विद्यार्थियों को भी मिलना था, लेकिन ये पूरी तरह बन नहीं सकीं। वनस्पति विज्ञान विभाग ने प्रयोगशाला बनाई है, लेकिन उपकरण कितने नए और पुराने हैं, इसका हिसाब पूरा नहीं लगाया जा रहा लेकिन विद्यार्थियों ने मांग उठाई है कि सभी को लैब का लाभ मिलना चाहिए। प्रयोगशाला का ताला दिन में बंद नहीं होना चाहिए। बाहरी छात्रों के भी पंजीकरण करके उन्हें इसका लाभ दिया जाए।
अब शोध बजट का इंतजार
रूसा के तहत पीयू की ओर से भेजे गए 110 शोध प्रस्ताव केंद्र सरकार ने पास किए थे। इसके तहत 50 करोड़ रुपये मंजूर हुए। इस रकम में से अब तक केवल सात करोड़ रुपये ही मिले हैं जो ऊष्मायन केंद्र व प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए हैं। बाकी रकम का इंतजार किया जा रहा है। तीन साल बीत गए। शिक्षकों ने जो शोध प्रस्ताव भेजे थे, कई तो अब अपडेट करने लायक हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि शोध बजट मिल जाता है तो शोध को बल मिलेगा। इससे पीयू की रैंकिंग बेहतर हो सकेगी। इसके लिए पीयू को पहल करनी चाहिए। हालांकि पीयू के अधिकारियों ने केंद्र सरकार को इस बजट के लिए चिट्ठी लिखी है। आगे भी प्रयास करने की बात पीयू की ओर से किया जा रहा है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
रूसा की प्रयोगशाला विभाग में बनकर तैयार है। सबसे पहले हमने बनाई है। उपकरण व मशीनें खरीद लिए गए हैं। सभी छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। -प्रो. प्रोमिला पाठक, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, पीयू
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राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत केंद्र सरकार ने विशेष प्रोजेक्ट के तहत ऊष्मायन केंद्र के लिए सात करोड़ रुपये पंजाब विश्वविद्यालय को दिए थे। इस बजट से भौतिक विज्ञान विभाग, रसायन विज्ञान विभाग, वनस्पति विज्ञान विभाग आदि विभागों में उच्च स्तरीय प्रयोगशालाएं बननी थीं। इन प्रयोगशालाओं का लाभ बाहर के विद्यार्थियों को भी मिलना था, लेकिन ये पूरी तरह बन नहीं सकीं। वनस्पति विज्ञान विभाग ने प्रयोगशाला बनाई है, लेकिन उपकरण कितने नए और पुराने हैं, इसका हिसाब पूरा नहीं लगाया जा रहा लेकिन विद्यार्थियों ने मांग उठाई है कि सभी को लैब का लाभ मिलना चाहिए। प्रयोगशाला का ताला दिन में बंद नहीं होना चाहिए। बाहरी छात्रों के भी पंजीकरण करके उन्हें इसका लाभ दिया जाए।
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अब शोध बजट का इंतजार
रूसा के तहत पीयू की ओर से भेजे गए 110 शोध प्रस्ताव केंद्र सरकार ने पास किए थे। इसके तहत 50 करोड़ रुपये मंजूर हुए। इस रकम में से अब तक केवल सात करोड़ रुपये ही मिले हैं जो ऊष्मायन केंद्र व प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए हैं। बाकी रकम का इंतजार किया जा रहा है। तीन साल बीत गए। शिक्षकों ने जो शोध प्रस्ताव भेजे थे, कई तो अब अपडेट करने लायक हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि शोध बजट मिल जाता है तो शोध को बल मिलेगा। इससे पीयू की रैंकिंग बेहतर हो सकेगी। इसके लिए पीयू को पहल करनी चाहिए। हालांकि पीयू के अधिकारियों ने केंद्र सरकार को इस बजट के लिए चिट्ठी लिखी है। आगे भी प्रयास करने की बात पीयू की ओर से किया जा रहा है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
रूसा की प्रयोगशाला विभाग में बनकर तैयार है। सबसे पहले हमने बनाई है। उपकरण व मशीनें खरीद लिए गए हैं। सभी छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। -प्रो. प्रोमिला पाठक, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, पीयू