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पीयू क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में पीछे
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पीयू क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में पीछे
1001-1200 ब्रैकेट के मध्य में आई रैंक, इस रैंक में आते हैं सैकड़ों विश्वविद्यालय
इससे पहले भी पीयू की गिरी थी रैंक, रैंक गिरने के कारणों पर काम नहीं हो रहा
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय एक बार फिर रैंकिंग में पिछड़ा है। पीयू बुधवार को जारी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग एक हजार ब्रैकेट में स्थान नहीं बना पाई। पीयू की रैंक 1001-1200 ब्रैकेट के मध्य आई है। इस ब्रैकेट के मध्य सैकड़ों विश्वविद्यालय आते हैं। पिछले साल 1001 प्लस ब्रैकेट में पीयू थी। रैंकिंग किस कारण पिछड़ी, इसके कारण पीयू के जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं बताए। पीयू के कुछ शिक्षकों का कहना है कि रैंकिंग के आंकड़े भेजने वाले और उन्हें सार्वजनिक करने वाले लोगों को बेहतर कार्य करना होगा। आईक्यूएसी कार्यालय को इस ओर ध्यान देना होगा। रैंकिंग को लेकर आईक्यूएसी निदेशक से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
क्यूएस रैंकिंग में देश के आईआईएससी बंगलूरू, आईआईटी बांबे, आईआईटी दिल्ली को बेहतर रैंक मिली है। सरकारी संस्थानों ने भी बेहतर कार्य किया, लेकिन पीयू इसमें पिछड़ गई। बहुत कम ही रैंक ऐसी हैं, जिसमें पीयू कुछ सुधार कर रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में आगे नहीं बढ़ पा रही है। क्यूएस रैंकिंग इसका उदाहरण है। पिछले सप्ताह जारी हुई एक रैंकिंग में भी पीयू पिछड़ी थी। लगातार रैंकिंग में गिरावट आ रही है।
जानकारी के अनुसार क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग यूके की ओर से जारी की जाती है। इस रैंक का अपना एक महत्व है। शैक्षणिक सहकर्मी की समीक्षा, संकाय व छात्र अनुपात, प्रशंसा पत्र के अनुसार संकाय, नियोक्टा प्रतिष्ठा आदि के आधार पर यह रैंक जारी होती है।
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पीयू क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में पीछे
1001-1200 ब्रैकेट के मध्य में आई रैंक, इस रैंक में आते हैं सैकड़ों विश्वविद्यालय
इससे पहले भी पीयू की गिरी थी रैंक, रैंक गिरने के कारणों पर काम नहीं हो रहा
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय एक बार फिर रैंकिंग में पिछड़ा है। पीयू बुधवार को जारी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग एक हजार ब्रैकेट में स्थान नहीं बना पाई। पीयू की रैंक 1001-1200 ब्रैकेट के मध्य आई है। इस ब्रैकेट के मध्य सैकड़ों विश्वविद्यालय आते हैं। पिछले साल 1001 प्लस ब्रैकेट में पीयू थी। रैंकिंग किस कारण पिछड़ी, इसके कारण पीयू के जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं बताए। पीयू के कुछ शिक्षकों का कहना है कि रैंकिंग के आंकड़े भेजने वाले और उन्हें सार्वजनिक करने वाले लोगों को बेहतर कार्य करना होगा। आईक्यूएसी कार्यालय को इस ओर ध्यान देना होगा। रैंकिंग को लेकर आईक्यूएसी निदेशक से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
क्यूएस रैंकिंग में देश के आईआईएससी बंगलूरू, आईआईटी बांबे, आईआईटी दिल्ली को बेहतर रैंक मिली है। सरकारी संस्थानों ने भी बेहतर कार्य किया, लेकिन पीयू इसमें पिछड़ गई। बहुत कम ही रैंक ऐसी हैं, जिसमें पीयू कुछ सुधार कर रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में आगे नहीं बढ़ पा रही है। क्यूएस रैंकिंग इसका उदाहरण है। पिछले सप्ताह जारी हुई एक रैंकिंग में भी पीयू पिछड़ी थी। लगातार रैंकिंग में गिरावट आ रही है।
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जानकारी के अनुसार क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग यूके की ओर से जारी की जाती है। इस रैंक का अपना एक महत्व है। शैक्षणिक सहकर्मी की समीक्षा, संकाय व छात्र अनुपात, प्रशंसा पत्र के अनुसार संकाय, नियोक्टा प्रतिष्ठा आदि के आधार पर यह रैंक जारी होती है।
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