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कोरोना की दहशत के बीच पीयू के प्रोफेसरों को सीने चुनाव स्थगित होने की आशंका

Wed, 28 Apr 2021 02:28 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 28 Apr 2021 02:28 AM IST
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PU professors fear postponement of election in Corona amid panic
चंडीगढ़। कोरोना संक्रमण के बढ़ते केसों के मद्देनजर प्रोफेसरों को सीनेट स्थगित होने की आशंका है। पीयू में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए पहले ही सीनेट फैकल्टी, पुसा और पुकसा के चुनाव स्थगित हो चुके हैं। ऐसे में 10 मई को होने वाले यूनिवर्सिटी शैक्षणिक विभागों के प्रोफेसर के सीनेट चुनाव पर भी अनिश्चितता बरकरार है।
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प्रोफेसरों का यह भी कहना है कि यूनिवर्सिटी के फैसले बहुत ही असमंजस भरे होते हैं। अगर संक्रमण को देखते हुए चुनाव स्थगित किए हैं तो सभी वर्गों के लिए एक जैसा फैसला लेना चाहिए। यूनिवर्सिटी अलग-अलग कर फैसले दे रही है या तो चुनाव करवा लें या सभी को एक साथ स्थगित कर दें।
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उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण चुनाव प्रचार धीमा ही है। विभाग में किसी से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी की कक्षाएं खत्म होने पर 5 बजे के बाद ही मोबाइल पर बातचीत के द्वारा या व्हाट्सएप्प के जरिए ही प्रचार किया जा रहा है। मौजूदा हालातों को देखते हुए कुछ समझ भी नहीं आ रहा कि इस समय चुनाव करवाने ठीक होंगे या नहीं। प्रोफेसरों ने बताया कि वे शिक्षकों के प्रमोशन, शोध में सुधार और शिक्षकों की समस्याएं समय पर हल हो आदि मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। पीयू प्रोफसर वर्ग में 6 उम्मीदवार हैं। इनमें अंग्रेजी विभाग से प्रो. अक्षय कुमार, शिक्षा विभाग से प्रो. जतिंदर ग्रोवर, वनस्पति विभाग से प्रो. मलकियत सिद्धू, बायोकेमिस्ट्री विभाग से प्रो रजत संधीर, यूबीएस से प्रो. संजय कौशिक और बायोकेमिस्ट्री विभाग से प्रो. सुकेश शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। प्रोफेसर के चुनाव 10 मई को आयोजित करवाए जाने हैं और 12 मई को चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके लिए 5 बूथ बनाए गए हैं। इस वर्ग के लिए 279 मतदाता मतदान करेंगे।
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क्या कहते हैं उम्मीदवार
यूनिवर्सिटी में शक्ति का एकाधिकार खत्म होना चाहिए
यूनिवर्सिटी में किसी भी तरह के मुद्दे समय पर सुलझते ही नहीं है। यहां शक्ति का एकाधिकार है जिससे यूनिवर्सिटी को बचाने की जरूरत है। सीनेट को गुटबंदी करने की बजाय शिक्षक वर्ग व अन्य के साथ तालमेल बैठाकर काम करना चाहिए। - प्रो. अक्षय कुमार , उम्मीदवार
शिक्षकों के भले के लिए करेंगे काम
हमारा लक्ष्य रहेगा कि शिक्षकों की भलाई और उनके मुद्दों को हल करवाया जाए जिससे यूनिवर्सिटी की रैंकिंग इत्यादि में भी सुधार लाया जा सके और पहले की तरह इसका नाम हो। मेरा लक्ष्य शैक्षणिक समस्याओं को हल करवाने का रहेगा। - प्रो. सुकेश शर्मा, उम्मीदवार
शोध गुणवत्ता में होगा सुधार
यूनिवर्सिटी में शिक्षकों का गौरव बना रहना चाहिए। सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए प्रशासनिक ब्लॉक में सिंगल विंडो बननी चाहिए, जिससे उन्हें एनओसी इत्यादि लेने के लिए इधर-उधर चक्कर न लगाने पड़े। शोध की गुणवत्ता में सुधार और बिना रुकावट के होनी चाहिए जिससे शोधार्थियों और प्रोफेसर को परेशानी नहीं झेलनी पड़े। - प्रो. जतिंदर ग्रोवर, उम्मीदवार

शिक्षकों को समय पर प्रमोशन मिले
शिक्षकों की प्रमोशन समय पर होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी समय पर प्रमोशन करने की बजाय सालों तक काम को लटकाए रखती है। प्रमोशन पॉलिसी में तेजी लाने पर काम करेंगे। शिक्षकों को पिछली नौकरी का भी फायदा मिलना चाहिए। इसके अलावा हमारा मुद्दा रहेगा कि सभी शिक्षकों को समान अवसर दिलवाए जाए। अभी एक ही शिक्षक को कई अतिरिक्त चार्ज मिल जाते हैं, जो कि अन्य के साथ नाइंसाफी है। - प्रो मलकीयत सिद्धू, उम्मीदवार
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