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पीयू कर्मचारी सुशील कर रहे नेक काम.. दो महीने में 200 लोगों को दिया जीवनदान
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चंडीगढ़। कोरोना काल में तमाम लोग ऐसे हैं जो सेवाभाव रखते हैं। वह लोगों को किसी न किसी रूप में मदद पहुंचा रहे हैं। उन्हीं में शामिल हैं पीयू के कर्मचारी सुशील कुमार। दो माह में उन्होंने 200 से अधिक लोगों को खून दिलवाकर नया जीवन दिया। उनका यह मिशन लगातार जारी है। कहते हैं कि कोरोना काल में खून की लगातार कमी हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार लोगों को खून उपलब्ध करवाने की ठानी है।
सुशील कुमार पीयू की परीक्षा शाखा में कार्यरत हैं। पिछले साल लॉकडाउन में उन्होंने पीयू कैंपस के सभी कुत्तों को तीन माह तक रोटी आदि उपलब्ध कराई। उसके लिए उन्होंने हर दिन 20 से 25 घरों पर संपर्क किया और रोटियां आदि ले जाकर कुत्तों को खिलाई। इसके अलावा कैंपस में निर्माण आदि कार्य में जुटे मजदूरों के परिवारों को भी राशन आदि उपलब्ध करवाया। अब फिर से कोरोना ने पैर पसारे तो उन्होंने भी जिम्मा संभाल लिया। इस बार जिम्मा रक्त पहुंचाने का है। इसके लिए वह लीव फॉर ह्यूूमिनिटी संस्था से जुड़े और 400 लोगों को जोड़ा। इसके अलावा दोस्तों का भी एक ग्रुप बनाया और काम शुरू कर दिया। लोगों ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया। कोई फोन के जरिए तो कोई संस्था के जरिए। जैसे ही कोई फोन पहुंचता है तो वह अपने ग्रुप के संबंधित साथी को अस्पताल में मरीज के पास भेज देते हैं, जिनको खून की आवश्यकता होती है। सुशील कहते हैं कि हर माह 100 से अधिक लोगों को रक्त उपलब्ध करवाते हैं। वह खुद भी 13 बार रक्तदान कर चुके हैं। वह इस मिशन को जारी रखेंगे। सुशील के इस कार्य को पीयू के सभी लोग सराह रहे हैं।
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सुशील कुमार पीयू की परीक्षा शाखा में कार्यरत हैं। पिछले साल लॉकडाउन में उन्होंने पीयू कैंपस के सभी कुत्तों को तीन माह तक रोटी आदि उपलब्ध कराई। उसके लिए उन्होंने हर दिन 20 से 25 घरों पर संपर्क किया और रोटियां आदि ले जाकर कुत्तों को खिलाई। इसके अलावा कैंपस में निर्माण आदि कार्य में जुटे मजदूरों के परिवारों को भी राशन आदि उपलब्ध करवाया। अब फिर से कोरोना ने पैर पसारे तो उन्होंने भी जिम्मा संभाल लिया। इस बार जिम्मा रक्त पहुंचाने का है। इसके लिए वह लीव फॉर ह्यूूमिनिटी संस्था से जुड़े और 400 लोगों को जोड़ा। इसके अलावा दोस्तों का भी एक ग्रुप बनाया और काम शुरू कर दिया। लोगों ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया। कोई फोन के जरिए तो कोई संस्था के जरिए। जैसे ही कोई फोन पहुंचता है तो वह अपने ग्रुप के संबंधित साथी को अस्पताल में मरीज के पास भेज देते हैं, जिनको खून की आवश्यकता होती है। सुशील कहते हैं कि हर माह 100 से अधिक लोगों को रक्त उपलब्ध करवाते हैं। वह खुद भी 13 बार रक्तदान कर चुके हैं। वह इस मिशन को जारी रखेंगे। सुशील के इस कार्य को पीयू के सभी लोग सराह रहे हैं।
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