Punjab News: पंजाब में उद्योगों को झटका, बिजली 50 पैसे यूनिट महंगी, एक अप्रैल से नई दरें होंगी लागू
पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन से मंजूरी मिलने के बाद पावरकॉम ने सर्कुलर जारी कर अधिकारियों को इसे लागू करने का निर्देश दिया। पावरकॉम ने घरेलू बिजली भी महंगी करने का प्रस्ताव रेगुलेटरी कमीशन को भेजा था। हालांकि अभी इसकी अनुमति नहीं मिली है।
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पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) ने उद्योगों को बड़ा झटका दिया है। पावरकॉम ने बिजली दरों में 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद अब उद्योगों को 5.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी। अगले पांच साल के लिए सालाना तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ इसे लागू किया जाएगा। एक अप्रैल से बढ़ी दर पर बिजली मिलेगी।
पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन से मंजूरी मिलने के बाद पावरकॉम ने सर्कुलर जारी कर अधिकारियों को इसे लागू करने का निर्देश दिया। पावरकॉम ने घरेलू बिजली भी महंगी करने का प्रस्ताव रेगुलेटरी कमीशन को भेजा था। हालांकि अभी इसकी अनुमति नहीं मिली है।
रेगुलेटरी कमीशन को भेजे प्रस्ताव में पावरकॉम ने दलील दी थी कि सूबे में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बाहर से महंगी बिजली व कोयला खरीदना पड़ रहा है। इससे खर्चे काफी बढ़ गया है लेकिन उस हिसाब से राजस्व नहीं मिल रहा है। बिजली सब्सिडी का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। इन सब दलीलों के साथ पावरकॉम ने रेगुलेटरी कमीशन को प्रस्ताव भेजकर बिजली की दरें बढ़ाने की अनुमति मांगी थी।
उधर, पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने रेगुलेटरी कमीशन के इस कदम को सही बताया है। एसोसिएशन के मुताबिक इससे पावरकॉम की आय में इजाफा होने से आर्थिक मुश्किलें कुछ हद तक हल हो सकेंगी। वहीं सरकार पर भी बिजली सब्सिडी का कुछ बोझ कम होगा।
करीब डेढ़ लाख उद्योग होंगे प्रभावित
बिजली के रेट बढ़ने से राज्य में करीब डेढ़ लाख उद्योग प्रभावित होंगे। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में इन उद्योगों को 2669 करोड़ की सब्सिडी दी है। इनमें छोटे उद्योगों को 189 करोड़, मध्यम उद्योगों को 289 करोड़ और बड़े उद्योगों को 2191 करोड़ की सब्सिडी दी गई है।
उद्योग पहले ही मंदी में, बिजली के रेट बढ़ाने से नुकसान
पटियाला के फोकल प्वाइंट इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान रोहित बांसल ने कहा कि उद्योग पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। सरकार को रेट बढ़ाने थे तो तीन महीने पहले बताकर बढ़ाने चाहिए थे। इससे उद्योगपति किसी आर्डर को लेते वक्त अपने उत्पाद का रेट भी उसी हिसाब से तय करता। अब पहले के आर्डर में रेट का इजाफा नहीं किया जा सकता है। इससे उद्योगपतियों को काफी नुकसान होगा। पंजाब सरकार को उद्योगों के हितों के बारे में भी सोचना चाहिए। वरना बचे हुए उद्योग भी पंजाब से शिफ्ट हो जाएंगे। पंजाब सरकार अपने फैसले पर दोबारा विचार करे।